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UP: हाईकोर्ट ने स्कूलों के विलय की एक और याचिका खारिज की, सरकार ने दी दलील- पहले ही हो चुका है निर्णय
Thu, 10 Jul 2025 02:23 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 10 Jul 2025 02:23 PM IST
सार
हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सरकारी स्कूलों के विलय को चुनौती देने वाली एक और याचिका खारिज कर दी है। याचिका पर राज्य सरकार ने आपत्ति जताकर अपना पक्ष रखा।
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- फोटो : ANI
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट को लखनऊ पीठ ने प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों के विलय के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को बृहस्पतिवार को शुरुआती सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है। याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार की ओर आपत्ति उठाई गई कि मामले में उठाए गए मुद्दे पहले ही सीतापुर के 51 बच्चों की याचिका में एकल पीठ ने निर्णीत कर दिए हैं। ऐसे में समान मुद्दों को लेकर दाखिल यह पीआईएल सुनवाई के योग्य नहीं है। सरकार की आपत्ति पर गौर करने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
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न्यायमूर्ति ए आर मसूदी और न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की पीठ ने यह आदेश स्थानीय अधिवक्ता ज्योति राजपूत की जनहित याचिका पर दिया। इसमें राज्य सरकार के स्कूलों के विलय या दो स्कूलों को जोड़ने के राज्य सरकार के 16 जून के आदेश को चुनौती देकर रद्द करने का आग्रह किया गया था।
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याची ने गांवों के दूरदराज इलाकों में रहने वाले गरीबों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए परिवहन व्यवस्था किए जाने की भी गुजारिश की थी। याचिका में आरटीई अधिनियम के तहत राज्य सरकार को बच्चों के परिवहन के दिशानिर्देश तय करने के निर्देश देने का भी आग्रह किया गया था। याची ने स्कूलों के विलय को गरीब बच्चों के हितों के खिलाफ बताया था।
राज्य सरकार के अपर महाधिवक्ता अनुज कुदेसिया ने मुख्य स्थाई अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह के साथ दलील दी कि इसी 7 जुलाई को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्कूलों के विलय के खिलाफ सीतापुर के 51 बच्चों द्वारा दाखिल याचिका समेत एक अन्य याचिका पर विस्तृत फैसला देकर खारिज कर दिया है। ऐसे में समान मामले में यह जनहित याचिका सुनवाई के लायक नहीं है। कोर्ट ने सरकार की ओर से उठाई गई शुरुआती आपत्ति के मद्देनजर जनहित याचिका खारिज कर दी।