UP: लखनऊ में कैंसर संस्थान के मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा, अब तक 70 से अधिक छोड़ चुके नौकरी
कैंसर संस्थान के मानसिक रोग विभागाध्यक्ष ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे विभाग बंद होने की स्थिति बन गई है। लगातार डॉक्टरों और कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने से मरीजों की परेशानी बढ़ रही है। कम वेतन और कमजोर सेवा शर्तों को इस्तीफों की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
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कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान को मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष ने अलविदा कह दिया है। डॉ. अभिनव तिवारी ने एक महीने के नोटिस के साथ अपना इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद संस्थान में मनोरोग विभाग बंद हो जाएगा। इससे कैंसर संग मानसिक रोग की दंश झेल रहे मरीजों की मुसीबत बढ़ेगी।
कैंसर संस्थान में करीब 300 बेड पर मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। 24 घंटे इमरजेंसी संचालित की जा रही है। ओपीडी में 400 से अधिक नए-पुराने मरीज आ रहे हैं। इन मरीजों के इलाज व देखभाल का जिम्मा संस्थान के 33 नियमित, एक प्रतिनियुक्त पर तैनात डॉक्टरों पर हैं। साथ ही आठ डॉक्टर चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय की तरफ से बांड के तहत तैनात किए गए हैं। 70 से ज्यादा नर्स, पैरामेडिकल व अन्य श्रेणी के कर्मचारी नौकरी छोड़कर जा चुके हैं।
दस माह में रास नहीं आया संस्थान
मानसिक रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. अभिनव तिवारी ने अपना इस्तीफा है। डॉ. तिवारी ने पिछले वर्ष सितंबर में संस्थान ज्वॉइन किया था। करीब 10 महीने की सेवा के बाद उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया। अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों के लगातार इस्तीफों की सबसे बड़ी वजह यहां मिलने वाला वेतन है। डॉक्टरों का कहना है कि दूसरे सरकारी और स्वायत्त चिकित्सा संस्थानों की तुलना में यहां वेतन काफी कम है। इससे डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर संस्थान छोड़ रहे हैं।
वेतन कम होने से डॉक्टर छोड़ रहे नौकरी
कैंसर संस्थान में लगातार डॉक्टरों के इस्तीफों ने प्रशासन की मुसीबत बढ़ गई है। डॉक्टरों का कहना है कि संस्थान में वेतनमान और सेवा शर्तें अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों की तुलना में कम आकर्षक हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ डॉक्टर बेहतर अवसर मिलने पर संस्थान छोड़ रहे हैं।
यदि जल्द ही वेतन और सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले समय में और डॉक्टरों के इस्तीफे हो सकते हैं। इसका सीधा असर मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर पड़ेगा। कई विभागों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और बढ़ सकती है। जिससे इलाज के साथ संस्थान की शैक्षणिक और शोध गतिविधियां भी प्रभावित होने की आशंका है।