'25 किसानों की मौत हुई पर आत्महत्या नहीं की'
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विधान परिषद में बुधवार को सरकार ने यह तो स्वीकार किया कि प्रदेश में 27 फरवरी से 15 मार्च के बीच बारिश और ओलावृष्टि से हुई तबाही के दौरान 25 किसानों की मौत हुई है। पर, यह भी साफ किया कि किसी किसान ने आत्महत्या नहीं की। भाजपा सहित विपक्ष के कुछ अन्य सदस्यों ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
नेता सदन अहमद हसन ने प्रदेश सरकार की तरफ से किए गए राहत के काम गिनाए। केंद्र की तरफ से मदद न मिलने की शिकायत भी की। भाजपा व सत्तापक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए। सरकार के जवाब से असंतुष्ट भाजपा ने बहिर्गमन कर दिया।
शून्य प्रहर में भाजपा के हृदयनारायण दीक्षित, केदारनाथ सिंह व महेन्द्र सिंह ने कार्यस्थगन सूचना के जरिये यह मामला उठाया। आरोप लगाया कि लगभग डेढ़ दर्जन किसानों ने आत्महत्या कर ली। गेहूं, सरसों, लाही, चना, मटर, आलू, दलहन व तिलहन की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।
पीड़ित किसानों को क्षतिपूर्ति की पूरी धनराशि नहीं मिली है। नेता सदन अहमद हसन ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया। कहा, सरकार ने तत्काल राहत कार्य शुरू कर दिए। 24 जिलों को 44.50 करोड़ रुपये मार्च के पहले सप्ताह में ही भेज दिए गए थे। 32 जिलों में 631 करोड़ रुपये की क्षति हुई है।
50 प्रतिशत से कम नुकसान पर भी मदद
नेता सदन ने केंद्र सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया। कहा कि केंद्र से कोई मदद अभी तक नहीं मिली है। भाजपा को प्रदेश सरकार पर आरोप लगाने से पहले केंद्र से भी मदद दिलाने की बात सोचनी चाहिए।
बताया कि बिजली गिरने, ओला गिरने, घर गिरने या बिजली लाइन के तार टूटने जैसे हादसों से 25 किसानों की मौत हुई है। इनमें प्रत्येक के परिवार को प्रदेश सरकार ने अपनी तरफ से पांच-पांच लाख रुपये की मदद मुहैया करा दी है। केंद्र ने न तो अभी तक टीम भेजी, न कोई मदद ही दी।
हसन ने कहा, केंद्र सरकार का नियम 50 प्रतिशत या इससे अधिक नुकसान पर ही मदद देने का है लेकिन प्रदेश सरकार ने 50 प्रतिशत से कम नुकसान वाले किसानों की भी मदद का फैसला किया है। इसके लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है।