अखिलेश ने MBBS की 622 सीटें बचाईं
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मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की आपत्तियों के कारण फंसी नौ मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें बचाने में राज्य सरकार कामयाब हो गई है।
एमसीआई ने इन कॉलेजों की 622 सीटों में दाखिले को हरी झंडी दे दी है। खास बात यह है कि पिछले वर्ष आगरा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 22 सीटें कम कर दी गई थीं।
इसे भी सरकार ने एमसीआई से वापस ले ली हैं। अब यहां भी वर्तमान शैक्षिक सत्र में 150 सीटों पर दाखिले होंगे।
एमसीआई की टीम ने इस साल की शुरुआत में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों का दौरा कर इनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर व शिक्षकों की कमी पर खासी आपत्ति जताने के साथ ही इन कॉलेजों में एमबीबीएस की 622 सीटों में दाखिले पर रोक लगा दी थी।
खाली पद भरने के दिए आदेश
इसके बाद प्रदेश सरकार हरकत में आई और मेडिकल कॉलेजों में पदों का सृजन किया गया। शिक्षकों व स्टाफ के खाली पदों को भरने के भी आदेश दिए गए।
वहीं, प्रदेश सरकार ने एमसीआई के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा। खुद प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा बीएस भुल्लर, महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा केके गुप्ता सहित पूरी टीम ने गत 12 जुलाई को एमसीआई में जाकर अपना पक्ष रखा।
सरकार ने एमसीआई को पूरा विवरण प्रस्तुत किया कि किस मेडिकल कॉलेज के लिए अब तक क्या-क्या किया जा चुका है।
इसके बाद एमसीआई ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों की पुरानी सीटें बरकरार रखने की हरी झंडी दे दी है।
सहारनपुर मेडिकल कॉलेज को नहीं मिली मंजूरी
सहारनपुर मेडिकल कॉलेज में वर्तमान शैक्षिक सत्र से एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं शुरू हो पाएगी।
एमसीआई ने इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरे न होने के कारण इस मेडिकल कॉलेज की 100 सीटों पर दाखिले के लिए लेटर ऑफ परमिशन नहीं दिया है।
ऐसे में यहां एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए अभी एक साल और इंतजार करना होगा।
किस कॉलेज की कितनी सीटें
कन्नौज मेडिकल कॉलेज--100
जालौन मेडिकल कॉलेज--100
आजमगढ़ मेडिकल कॉलेज--100
अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज--100
झांसी मेडिकल कॉलेज--50
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज--50
इलाहाबाद मेडिकल कॉलेज--50
मेरठ मेडिकल कॉलेज--50
आगरा मेडिकल कॉलेज--22
मामले पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमूख सचिव बीएस भुल्लर का कहना है कि एमसीआई की जितनी भी आपत्तियां थीं, उनमें से ज्यादातर हमने दूर कर दी हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सभी सीटें बचाने में सरकार कामयाब रही है।