'गुड गवर्नेंस' पर एक कदम आगे बढ़ी अखिलेश सरकार
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वित्त वर्ष 2015-16 का विकास एजेंडा सूबे के आगामी बजट का भी आईना होगा। सरकार ने इसीलिए एजेंडे को वित्त वर्ष शुरू होने के तीन महीने पहले ही तैयार करने की योजना बना ली है।
सपा सरकार ने सत्ता संभालने के साथ ही हर वित्तीय वर्ष में अपनी प्राथमिकता वाले कार्यों को पहले ही तय करना शुरू किया। इससे विभागों को काम में आसानी होने लगी।
नीतियां बनाने और कार्यों को पूरा करने की डेडलाइन तय करना आसान हो गया। मगर विकास एजेंडा वित्त वर्ष शुरू होने के ठीक पहले तैयार होने से विभागों को प्राथमिकताओं के हिसाब से बजट आवंटन कराने में दिक्कतें आने लगीं।
बजट पूर्वानुमान पहले ले लिए जाते थे और एजेंडा बाद में फाइनल होता था। इस बार सरकार ने अगले वित्त वर्ष का बजट बनाने के पहले ही एजेंडे को अंतिम रूप देने की कवायद शुरू की।
मुख्य सचिव भी कर चुके हैं समीक्षा
विभिन्न विभागों से विचार-विमर्श का काम लगभग पूरा हो चुका है। मुख्य सचिव अपने स्तर पर एजेंडे की समीक्षा भी कर चुके हैं।
करीब-करीब सभी प्रमुख विभागों को पता चल गया है कि विकास एजेंडे में उनके किन-किन कार्यों को स्थान दिया जा रहा है। जल्दी ही इसे विभागों को आधिकारिक रूप से जारी कर दिया जाएगा।
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इस बार दो बड़े काम किए जा रहे हैं। पहला, जिले की विकास योजनाएं बजट के पहले ही जिलों से स्वीकृत कराने की योजना बनी। इस पर तेजी से अमल हो रहा है।
दूसरा, विकास एजेंडा भी बजट से पहले फाइनल किया जा रहा है। इससे विभाग सरकार की प्राथमिकताओं को शामिल कर अपने वार्षिक बजट अनुमान को अंतिम रूप देंगे।
प्राथमिकताओं के लिए मिलेगा पूरा साल
इससे जहां वर्ष की शुरुआत में ही बजट की व्यवस्था हो जाएगी, वहीं प्राथमिकताओं पर काम के लिए पूरा साल मिल पाएगा।
विकास एजेंडा बजट प्रस्ताव तैयार होने के बाद सामने आने पर उसके तमाम कार्यों के लिए अनुपूरक बजट का इंतजार करना होता था। इससे प्राथमिकता के कई काम पिछड़ जाते थे। नई व्यवस्था से ऐसा नहीं होगा।