केंद्र से 6000 करोड़ की मांग करेंगे अखिलेश
प्रदेश सरकार ने सूबे के 44 सूखा प्रभावित जिलों के किसानों की मदद के लिए केंद्र से 6000 करोड़ रुपये की मदद मांगने की तैयारी की है। कैबिनेट से सूखा प्रभावित जिलों व केंद्र को भेजे जाने वाले मांगपत्र की मंजूरी लेने की योजना है। इसके बाद मांगपत्र केंद्र को भेजा जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि जिलाधिकारियों की आई रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश के 75 में से 44 जिलों को सूखाग्रस्त मान लिया गया है। इन जिलों में 50 फीसदी से भी कम बरसात हुई है। इससे किसानों को जबर्दस्त नुकसान हुआ है। काफी फसलें बर्बाद हो गई हैं।
सिंचाई के साधन न होने से बोई गई फसलें सूख गई हैं। पेयजल का संकट भी बना है। सूखे से नुकसान का आकलन करने के बाद शासन ने फसलों के नुकसान का मुआवजा, कृषि निवेश, सिंचाई व पेयजल सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ अस्पतालों में दवाओं की व्यवस्था आदि के लिए केंद्र सरकार से 6000 करोड़ रुपये मांगने का प्रस्ताव तैयार किया है। अब इस पर कैबिनेट की मुहर लगवाई जाएगी।
ये जिले घोषित हो सकते हैं सूखाग्रस्त
शासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राजस्व विभाग ने इस संबंध में कार्यवाही शुरू कर प्रस्ताव को कैबिनेट की अनुमति के लिए भेज दिया है। शासन ने इस प्रस्ताव को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन मंजूरी दिलाने की कार्यवाही शुरू कर दी है।
फैजाबाद व अमेठी सहित 44 जिले सूखाग्रस्त हो सकते हैं घोषित
चंदौली, कानपुर नगर, उन्नाव, बांदा, अमेठी, कुशीनगर, मुजफ्फरनगर, शामली, देवरिया, आजमगढ़, बरेली, कन्नौज, झांसी, चित्रकूट, मथुरा, अलीगढ़, अमरोहा, जालौन, पीलीभीत, मऊ, जौनपुर, हमीरपुर, फैजाबाद, सहारनपुर, मेरठ, रामपुर, बदायूं, एटा, औरैया, कौशांबी, फतेहपुर, हापुड़, इटावा, कानपुर देहात, मैनपुरी, बुलंदशहर, महोबा, फीरोजाबाद, हरदोई, फर्रुखाबाद, गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद, सोनभद्र व महराजगंज।
इस पर यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन का कहना है कि ‘‘सूखा प्रभावित जिलों की रिपोर्ट का विश्लेषण कर नुकसान का प्रारंभिक आकलन कर लिया गया है। 44 जिलों के लिए करीब 6000 करोड़ रुपये की मांग की जाएगी। सूखा प्रभावित किसानों की मदद के लिए मांगपत्र जल्द ही केंद्र सरकार को भेज दिया जाएगा। जिलाधिकारियों को प्रभावित किसानों को सूखा प्रबंधन योजना के अंतर्गत सुविधाएं देने का निर्देश भी दे दिया गया है।’’