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Ayodhya: राज्यपाल बोलीं- अगले 10 साल का विजन डॉक्यूमेंट तैयार करें राज्य के सभी विश्वविद्यालय
Tue, 04 Mar 2025 03:47 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 04 Mar 2025 03:47 PM IST
सार
यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय अगले 10 साल के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को भी आत्मनिर्भर बनना होगा।
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उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
- फोटो : amar ujala
विस्तार
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि राज्य के सभी विश्वविद्यालय आगामी 10 साल का विजन डॉक्यूमेंट बनाएं। इसके तहत शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ मिल बैठकर कुछ नया प्लान करें और उसी के अनुसार काम करें।
राज्यपाल मंगलवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर विवेकानंद प्रेक्षागृह में स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हमें भगवान श्रीराम से सीखना होगा और उनके पदचिन्हों पर चलना होगा। श्रीराम के चरित्र पर सभी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के बीच डिबेट होनी चाहिए ताकि वह कुछ सीखें और श्री राम के चरित्र को अपने जीवन में उतारें। इससे जिंदगी को बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा कि श्री अन्न यानी मिलेट के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए झांसी विश्वविद्यालय से सीखना होगा। वहां पर श्री अन्न को बेचकर आर्थिक तरक्की की जा रही है। सभी विश्वविद्यालय को आने वाले समय में आत्मनिर्भर बनना ही होगा क्योंकि बहुत समय तक ग्रांट के भरोसे नहीं रहा जा सकता है। अपने खुद के आय के स्रोत पैदा करने होंगे।
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श्री अन्य के माध्यम से बीमारी और कुपोषण से भी मुक्ति मिलेगी। इसकी पूरे विश्व में इस समय मांग हो रही है। हम दे रहे हैं लेकिन खुद इसे नहीं खा रहे हैं। बेटियों के स्वास्थ्य की भी चिंता करनी होगी। खेल के माध्यम से युवाओं को नई दिशा दिखानी होगी, जो खेलेगा वह खिलेगा, इस ध्येय वाक्य को याद रखना होगा।
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राज्यपाल मंगलवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की स्थापना के 50 साल पूरे होने पर विवेकानंद प्रेक्षागृह में स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हमें भगवान श्रीराम से सीखना होगा और उनके पदचिन्हों पर चलना होगा। श्रीराम के चरित्र पर सभी विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों के बीच डिबेट होनी चाहिए ताकि वह कुछ सीखें और श्री राम के चरित्र को अपने जीवन में उतारें। इससे जिंदगी को बदला जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि श्री अन्न यानी मिलेट के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए झांसी विश्वविद्यालय से सीखना होगा। वहां पर श्री अन्न को बेचकर आर्थिक तरक्की की जा रही है। सभी विश्वविद्यालय को आने वाले समय में आत्मनिर्भर बनना ही होगा क्योंकि बहुत समय तक ग्रांट के भरोसे नहीं रहा जा सकता है। अपने खुद के आय के स्रोत पैदा करने होंगे।
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श्री अन्य के माध्यम से बीमारी और कुपोषण से भी मुक्ति मिलेगी। इसकी पूरे विश्व में इस समय मांग हो रही है। हम दे रहे हैं लेकिन खुद इसे नहीं खा रहे हैं। बेटियों के स्वास्थ्य की भी चिंता करनी होगी। खेल के माध्यम से युवाओं को नई दिशा दिखानी होगी, जो खेलेगा वह खिलेगा, इस ध्येय वाक्य को याद रखना होगा।
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