लोकायुक्त नियुक्ति पर सीएम व राज्यपाल में तीखी बयानबाजी
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सुप्रीम कोर्ट द्वारा जस्टिस वीरेंद्र सिंह यादव को यूपी का लोकायुक्त नियुक्त किए जाने पर राज्यपाल राम नाईक ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। बृहस्पतिवार को कानपुर में उन्होंने कहा, सरकार इस मामले में पूरी तरह फेल रही है।
जो नाम चयन समिति के जरिये तय होना चाहिए, वह नहीं किया जा सका। तालमेल में कमी के चलते सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में हस्तक्षेप कर अपने स्तर से नियुक्ति करनी पड़ी।
उधर, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, सब जानते हैं कि इस मामले में कौन बाधक है। इस बीच, राज्य सरकार ने जस्टिस वीरेंद्र सिंह की नियुक्ति संबंधी फाइल अनुमोदन के लिए राज्यपाल को भेज दी। राज्यपाल की हरी झंडी मिलते ही सतर्कता विभाग जस्टिस वीरेंद्र को लोकायुक्त नियुक्त करने की अधिसूचना जारी करेगा।
चयन समिति में लोकायुक्त के लिए किसी नाम पर सहमति न बन पाने के लिए राज्यपाल ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि यह विडंबना है कि शीर्ष अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा। फिर कहा, समझदार के लिए इशारा काफी है।
'चीफ जस्टिस के पत्र के बारे में कुछ जानकारी नहीं'
यह पूछे जाने पर कि लोकायुक्त की नियुक्ति के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड़ ने क्या उन्हें कोई पत्र लिखा है?
राज्यपाल ने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि दोपहर बाद कानपुर से राजधानी लौटने के बाद राजभवन के सूत्रों ने राज्यपाल को मुख्य न्यायाधीश का पत्र मिलने की पुष्टि की।
शासन के उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार नए लोकायुक्त की नियुक्ति संबंधी फाइल मुख्यमंत्री के माध्यम से राज्यपाल को भेज दी गई है। राज्यपाल का अनुमोदन मिलने के बाद औपचारिक रूप से अधिसूचना जारी की जाएगी।
लोकायुक्त की शपथ की तिथि राज्यपाल के साथ परामर्श करके तय की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बृहस्पतिवार को पूरे दिन शासन स्तर पर गतिविधियां काफी तेज रहीं।
देर शाम मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव न्याय व विधि परामर्शी ने शासन के आला अधिकारियों के साथ इस मामले को लेकर काफी देर तक मंत्रणा की। मुख्य सचिव ने दिन भर चले घटनाक्रम की जानकारी रात में मुख्यमंत्री को दी।
अखिलेश बोले, सब जानते हैं, कौन बन रहा था बाधक
गोरखपुर के दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर कहा कि सब जानते हैं कि लोकायुक्त की नियुक्ति में कौन बाधक है।
इस मुद्दे पर बहस में पड़ने के बजाय सरकार का पूरा ध्यान सूबे के विकास पर है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का सम्मान करती है। इस मामले में किसी की शिकायत भी नहीं की जा सकती।