योगी सरकार ने अखिलेश के आरोपों का दिया जवाब, कहा- इंसेफेलाइटिस से मौतों में आई 65 प्रतिशत की कमी
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प्रदेश सरकार ने दावा किया कि योगी सरकार के आने के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं में काफी सुधार हुआ है। पूर्वांचल के इंसेफेलाइटिस प्रभावित जिलों में इस बीमारी का खतरा काफी कम हुआ है। पिछले दो सालों के परिणाम बताते हैं कि इंसेफेलाइटिस जनित बीमारियों के आंकड़े में भारी गिरावट आई है। इस रोग से होने वाली मौतों के आंकड़ों में करीब 65 प्रतिशत की कमी आई है।
दरअसल, अखिलेश यादव ने सोमवार को सपा कार्यालय पर प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि इंसेफेलाइटिस की बीमारी से मरने वालों की संख्या षड्यंत्र के तहत छिपाई जा रही है। उन्होंने पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम बनाकर कराने की मांग की थी।
सरकारी प्रवक्ता के मुताबिक पिछले चार दशक से पूर्वांचल के जिलों में मासूम बच्चों के लिए काल बनकर आने वाली इंसेफेलाइटिस पर काब पाने के लिए पहल का असर दिखने लगा है। पूर्वांचल के 38 जिलों में इंसेफेलाइटिस का प्रभाव काफी कम हुआ है।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू किए गए अभियान के तहत पूर्वांचल में 40 लाख बच्चों का टीकाकरण किया जा चुका है। चिकित्सकों की टीम ने घर-घर जाकर ‘दस्तक’ अभियान चलाकर बच्चों का टीकाकरण करके रोग पर काफी हद तक काबू पा लिया है।
वर्षवार दिया मौत का आंकड़ा
प्रवक्ता ने आंकड़ों का ब्योरा देते हुए बताया कि मौजूदा समय में इंसेफेलाइटस से होने वाली मौत की दर 3.73 प्रतिशत है। वर्ष 2016 में ‘एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम’ (एईएस) से पीड़ित 3911 मरीज भर्ती हुए थे, जिसमें से 641 की मौत हुई थी, जबकि 2017 में भर्ती 4724 मरीजों में 655 की मौत हुई थी।
प्रवक्ता ने दावा किया है कि सत्ता परिवर्तन के बाद से इंसेफेलाइटिस को नियंत्रित करने पर किए गए फोकस की वजह से आंकड़े काफी कम हुए हैं। वर्ष 2019 में 3077 मरीज भर्ती हुए, जिनमें से 248 लोगों की मौत हुई।
इसी तरह ‘जापानी इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम’ (जेईएस) के मरीजों की संख्या में भी काफी कमी है। वर्ष 2016 व 2017 में जहां इस रोग से 74 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2018 में यह आंकड़ा घटकर 30 पर आ गया है।