सरकार ने नहीं बढ़ाया गन्ने का एसएपी, पुराने मूल्य पर ही शासनादेश जारी
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प्रमुख सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग संजय आर भूसरेड्डी ने गन्ना मूल्य निर्धारण का शासनादेश जारी कर दिया है। पिछले साल की तरह गन्ना मूल्य अगेती प्रजाति के लिए 325 रुपये क्विंटल, सामान्य प्रजाति के लिए 315 और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए 310 रुपये क्विंटल निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार ने 29 नवंबर को पेराई सत्र 2018-19 के लिए कैबिनेट बाई सर्कुलेशन गन्ना मूल्य निर्धारण पर मुहर लगाई थी। प्रमुख सचिव गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग ने इसका शासनादेश जारी कर दिया है। पेराई सत्र 2017-18 के मुकाबले गन्ना मूल्य में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
चीनी मिलें किसानों को राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) का भुगतान एकमुश्त करेंगी। गन्ना मूल्य की तरह ढुलाई भाड़ा भी यथावत रहेगा। पेराई सत्र 2018-19 के लिए चीनी मिलों के बाहरी क्रय केंद्रों से गन्ने के परिवहन की ढुलाई कटौती 42 पैसे प्रति क्विंटल प्रति किलोमीटर रहेगी।
ढुलाई कटौती अधिकतम 8.35 रुपये प्रति क्विंटल होगी। यानी पिछले साल की तरह चीनी मिल के नजदीकी क्रय केंद्रों से कम ढुलाई कटौती की जाएगी। सुदूर केंद्रों से भी अधिकतम 8.35 रुपये क्विंटल भाड़ा कटौती ही की जाएगी।
8 रुपये क्विंटल बढ़ी लागत
राज्य सरकार ने भले ही गन्ना मूल्य नहीं बढ़ाया है लेकिन माना है कि गन्ना उत्पादन लागत में वृद्धि हुई है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद ने गन्ना उत्पादन लागत का आकलन 297 रुपये प्रति क्विंटल किया है। पिछले पेराई सत्र 2017-18 में उत्पादन लागत 289 रुपये प्रति क्विंटल थी।
गन्ना लागत में 8 रुपये क्विंटल की यह बढ़ोत्तरी डीजल, बिजली, खाद, कीटनाशक महंगे हो जाने के कारण हुई है। गौरतलब है कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गन्ना मूल्य निर्धारण समिति की बैठक में किसानों ने 350 से 400 रुपये क्विंटल गन्ना मूल्य तय करने की मांग की थी। इसके विपरीत यूपी शुगर मिल्स एसोसिएशन ने चीनी के दामों में मंदी को देखते हुए रेट नहीं बढ़ाने का आग्रह किया था।