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योगी सरकार के बजट में से सेहत के लिए क्या मिला
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
Updated Wed, 12 Jul 2017 03:17 PM IST
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योगी सरकार के पहले बजट में सेहत दुरुस्त रखने के लिए 64.43 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया। बजट में जहां पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं के लिए जरूरत के मुताबिक कम रकम दी गई वहीं, सिविल अस्पताल, केजीएमयू और एसजीपीजीआई को कम धनराशि मिली है।
सिविल अस्पताल के विस्तार को 19 करोड़ रुपये मिले
बजट में मिले 19 करोड़ से सिविल अस्पताल में सौ बेड की नई ओपीडी का निर्माण, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और संसाधनों की खरीद की जानी है। पुरानी ओपीडी की आधी बिल्डिंग को तोड़कर बनाया जाना है।
विशिष्ट सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। लगभग तीन मंजिला की एक इमारत में मरीजों को सारी सुविधाएं होंगी उपलब्ध। नई ओपीडी के विस्तार से हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। मरीजों को भटकना की जगह एक ही जगह इलाज मिलेगा।
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पिछली सरकार में 426 करोड़ की बनी थी योजना
सिविल अस्पताल के विस्तार के लिए पूर्ववर्ती सपा सरकार में एक हजार बेड की नई ओपीडी बनानेे की योजना थी। इसके लिए 426 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।
हालांकि बाद में बजट कम कर 150-200 करोड़ करने की योजना बनाई थी। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान सरकार के इस बजट से पुरानी भवनों को तोड़ने और उसका नक्शा ही तैयार कराया जा सकेगा। हालांकि आवास विकास से नक्शा पास हो चुका है। इसमें पुरानी ओपीडी के कमरा नंबरा एक से चौदह तक को तोड़ा जाएगा। इसके बाद यहां 14 कमरों की ओपीडी बनेगी।
केजीएमयू के निर्माण पर 9 करोड़ होंगे खर्च
महामारी आदि के नियंत्रण के लिए प्रयोशाला नेटवर्क की स्थापना के लिए 2.79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानव शक्ति की विकास योजनाओं के लिए पांच करोड़ रुपये और शेष वेतन के लिए दिए जाएंगे। इस योजना की शुरुआत के लिए खुद सरकार की ओर से बजट जारी किया गया है।
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सिविल अस्पताल के विस्तार को 19 करोड़ रुपये मिले
बजट में मिले 19 करोड़ से सिविल अस्पताल में सौ बेड की नई ओपीडी का निर्माण, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और संसाधनों की खरीद की जानी है। पुरानी ओपीडी की आधी बिल्डिंग को तोड़कर बनाया जाना है।
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विशिष्ट सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। लगभग तीन मंजिला की एक इमारत में मरीजों को सारी सुविधाएं होंगी उपलब्ध। नई ओपीडी के विस्तार से हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। मरीजों को भटकना की जगह एक ही जगह इलाज मिलेगा।
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पिछली सरकार में 426 करोड़ की बनी थी योजना
सिविल अस्पताल के विस्तार के लिए पूर्ववर्ती सपा सरकार में एक हजार बेड की नई ओपीडी बनानेे की योजना थी। इसके लिए 426 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।
हालांकि बाद में बजट कम कर 150-200 करोड़ करने की योजना बनाई थी। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान सरकार के इस बजट से पुरानी भवनों को तोड़ने और उसका नक्शा ही तैयार कराया जा सकेगा। हालांकि आवास विकास से नक्शा पास हो चुका है। इसमें पुरानी ओपीडी के कमरा नंबरा एक से चौदह तक को तोड़ा जाएगा। इसके बाद यहां 14 कमरों की ओपीडी बनेगी।
केजीएमयू के निर्माण पर 9 करोड़ होंगे खर्च
महामारी आदि के नियंत्रण के लिए प्रयोशाला नेटवर्क की स्थापना के लिए 2.79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानव शक्ति की विकास योजनाओं के लिए पांच करोड़ रुपये और शेष वेतन के लिए दिए जाएंगे। इस योजना की शुरुआत के लिए खुद सरकार की ओर से बजट जारी किया गया है।
मिला जरूरत की अपेक्षा काफी कम
डेमो
- फोटो : amar ujala
एसजीपीजीआई में ट्रॉमा सेंटर के संचालन को
25 करोड़ रुपये
क्या होना- ट्रॉमा सेंटर के विस्तार के लिए बजट में 12.5 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें भवन और वार्डों आदि का निर्माण कार्य शामिल है। इसके अतिरिक्त मशीनों, उपकरण और अन्य संसाधनों के लिए 12.5 करोड़ रुपये मिले हैं।
टर्शरी केयर कैंसर केंद्र की स्थापना
मिले- 11.43 करोड़ रुपये
क्या होना- ‘प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कॉर्डियोवैस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक’ योजना के अंतर्गत टर्शरी केयर कैंसर केंद्र की स्थापना होगी। इसमें चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और रिसर्च की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए संसाधन, उपकरण सहित अन्य संसाधनों की खरीद की जानी है।
जरूरत 120 करोड़ की, मिला 50 करोड़
210 बेड के ट्रॉमा सेंटर के लिए 120 करोड़ की जरूरत है लेकिन सरकार ने मात्र 50 करोड़ रुपये ही दिए हैं। यह जरूरत की अपेक्षा काफी कम हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस बजट से काम में निरंतरता बनी रहेगी। बजट मिलने के बाद मरीजों के लिए जो ज्यादा जरूरी होगा, उसे पहले पूरा किया जाएगा।
वहीं, टर्शरी केयर कैंसर केंद्र की स्थापना के लिए यूपी सरकार और केंद्र सरकार का 40:60 का अनुपात था। इस लिहाज से यूपी सरकार ने फिलहाल 40 फीसदी बजट तो दे दिया है, लेकिन अभी केंद्र से 60 फीसदी मिलना बाकी है। एसजीपीजीआई निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि अभी उन्हें बजट की जानकारी नहीं है। बजट के निर्धारण के अनुसार राज्य सरकार को 40 फीसदी देना था।
25 करोड़ रुपये
क्या होना- ट्रॉमा सेंटर के विस्तार के लिए बजट में 12.5 करोड़ रुपये मिले हैं। इसमें भवन और वार्डों आदि का निर्माण कार्य शामिल है। इसके अतिरिक्त मशीनों, उपकरण और अन्य संसाधनों के लिए 12.5 करोड़ रुपये मिले हैं।
टर्शरी केयर कैंसर केंद्र की स्थापना
मिले- 11.43 करोड़ रुपये
क्या होना- ‘प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ कैंसर, डायबिटीज, कॉर्डियोवैस्कुलर डिजीज एंड स्ट्रोक’ योजना के अंतर्गत टर्शरी केयर कैंसर केंद्र की स्थापना होगी। इसमें चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और रिसर्च की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए संसाधन, उपकरण सहित अन्य संसाधनों की खरीद की जानी है।
जरूरत 120 करोड़ की, मिला 50 करोड़
210 बेड के ट्रॉमा सेंटर के लिए 120 करोड़ की जरूरत है लेकिन सरकार ने मात्र 50 करोड़ रुपये ही दिए हैं। यह जरूरत की अपेक्षा काफी कम हैं। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस बजट से काम में निरंतरता बनी रहेगी। बजट मिलने के बाद मरीजों के लिए जो ज्यादा जरूरी होगा, उसे पहले पूरा किया जाएगा।
वहीं, टर्शरी केयर कैंसर केंद्र की स्थापना के लिए यूपी सरकार और केंद्र सरकार का 40:60 का अनुपात था। इस लिहाज से यूपी सरकार ने फिलहाल 40 फीसदी बजट तो दे दिया है, लेकिन अभी केंद्र से 60 फीसदी मिलना बाकी है। एसजीपीजीआई निदेशक डॉ. राकेश कपूर ने कहा कि अभी उन्हें बजट की जानकारी नहीं है। बजट के निर्धारण के अनुसार राज्य सरकार को 40 फीसदी देना था।