{"_id":"623aaf436656eb02dd02c895","slug":"up-government-attack-on-samajwadi-party-president-akhilesh-yadav","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पलटवार: सपा सरकार के कुशासन का सुबूत है 2015-16 की गरीबी सूचकांक रिपोर्ट, 2020-21 के सर्वे में यूपी ने हासिल कीं बड़ी उपलब्धियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पलटवार: सपा सरकार के कुशासन का सुबूत है 2015-16 की गरीबी सूचकांक रिपोर्ट, 2020-21 के सर्वे में यूपी ने हासिल कीं बड़ी उपलब्धियां
Wed, 23 Mar 2022 10:55 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 23 Mar 2022 10:55 AM IST
सार
सरकार का दावा है कि वह रिपोर्ट नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की वर्ष 2015-16 की संदर्भ अवधि पर आधारित है। अगर अखिलेश यादव रिपोर्ट का अध्ययन करते तो वह अनर्गल टिप्पणी करने के बजाय अपनी विफलता के लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगते।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
नीति आयोग की यूपी संबंधी गरीबी सूचकांक रिपोर्ट के आधार पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा की गई टिप्पणी पर राज्य सरकार ने पलटवार किया है। सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि अखिलेश यादव ने नीति आयोग की जिस गरीबी सूचकांक रिपोर्ट के आधार पर बयान दिया है, वह वास्तव में सपा सरकार के कुशासन का सुबूत है।
सरकार का दावा है कि वह रिपोर्ट नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की वर्ष 2015-16 की संदर्भ अवधि पर आधारित है। अगर अखिलेश यादव रिपोर्ट का अध्ययन करते तो वह अनर्गल टिप्पणी करने के बजाय अपनी विफलता के लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगते।
प्रवक्ता ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 के विपरीत 2020-21 के सर्वे में यूपी ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के कारण कन्या भ्रूण हत्या रोकने में सफल हुई है। 2015-16 में प्रदेश में लिंगानुपात 995 था, वह 2021 में बढ़कर 1017 हो गया है।
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2015-16 में प्रदेश भर में 32.7 फीसदी परिवार रसोई गैस का उपयोग करते थे, जो बढ़कर अब 49.5 प्रतिशत हो गए हैं। बेहतर सैनिटेशन सुविधा का इस्तेमाल करने वाले परिवारों का प्रतिशत भी 36.4 से बढ़कर 68.8 हो गया है।
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सरकार का दावा है कि वह रिपोर्ट नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की वर्ष 2015-16 की संदर्भ अवधि पर आधारित है। अगर अखिलेश यादव रिपोर्ट का अध्ययन करते तो वह अनर्गल टिप्पणी करने के बजाय अपनी विफलता के लिए प्रदेश की जनता से माफी मांगते।
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प्रवक्ता ने बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 2015-16 के विपरीत 2020-21 के सर्वे में यूपी ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के कारण कन्या भ्रूण हत्या रोकने में सफल हुई है। 2015-16 में प्रदेश में लिंगानुपात 995 था, वह 2021 में बढ़कर 1017 हो गया है।
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2015-16 में प्रदेश भर में 32.7 फीसदी परिवार रसोई गैस का उपयोग करते थे, जो बढ़कर अब 49.5 प्रतिशत हो गए हैं। बेहतर सैनिटेशन सुविधा का इस्तेमाल करने वाले परिवारों का प्रतिशत भी 36.4 से बढ़कर 68.8 हो गया है।
उन्होंने बताया कि 2015-16 में फर्टिलिटी रेट 2.7 था, जो 2020-21 में घटकर 2.4 हो गया है। संस्थागत प्रसव 67.8 से बढ़कर 83.4 प्रतिशत हो गया है। तो नवजात मृत्युदर 45.1 से घटकर 35.7 और शिशु मृत्युदर 63.5 से घटकर 50.4 प्रतिशत रह गई है। गर्भावस्था के दौरान एनीमिया प्रभावित महिलाओं की संख्या में भी 5.1 प्रतिशत की कमी आई है।
यह राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हुई 1.8 प्रतिशत की कमी से अधिक है। बच्चों की वृद्धि में अवरोध के मामलों में 6.6 प्रतिशत की कमी हुई है। कम वजन वाले बच्चों की संख्या भी 7.4 प्रतिशत कम हुई है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मार्च 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद प्रत्येक क्षेत्र में प्रदेश की छवि में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रदेश से बीमारू राज्य का धब्बा हट गया है। केंद्र सरकार की करीब 50 योजनाओं में यूपी पहले स्थान पर है। 2015-16 में यूपी की अर्थव्यवस्था देश में छठे स्थान पर थी, जो अब दूसरे स्थान पर आ गई है।
यह राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज हुई 1.8 प्रतिशत की कमी से अधिक है। बच्चों की वृद्धि में अवरोध के मामलों में 6.6 प्रतिशत की कमी हुई है। कम वजन वाले बच्चों की संख्या भी 7.4 प्रतिशत कम हुई है।
सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि मार्च 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद प्रत्येक क्षेत्र में प्रदेश की छवि में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रदेश से बीमारू राज्य का धब्बा हट गया है। केंद्र सरकार की करीब 50 योजनाओं में यूपी पहले स्थान पर है। 2015-16 में यूपी की अर्थव्यवस्था देश में छठे स्थान पर थी, जो अब दूसरे स्थान पर आ गई है।