यूपी: कनेक्शन लेने के बाद कभी भी बिजली बिल न जमा करने वालों के लिए खुशखबरी, सरकार ने जारी की योजना
Electricity bill in UP: यूपी में उन उपभोक्ताओं का विशेष राहत दी जाएगी जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद कभी भी बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया है।
विस्तार
प्रदेश में एक दिसंबर से बिजली बिल राहत योजना शुरू की गई है। इसमें घरेलू अधिकतम दो किलोवार भारत और वाणिज्यिक एक किलोवाट भार के उन उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है, जो कनेक्शन लेने के बाद कभी भी भुगतान (नेवर पेड) नहीं किए हैं। इसी तरह लंबे समय से भुगतान नहीं करने वाले (लांग अनपेड) को भी योजना में शामिल किया गया है।
इस बीच पता चला कि नेवर पेड श्रेणी में तमाम ऐसे उपभोक्ता हैं, जो एक किस्त जमा कर दिए हैं। ऐसे में किस्त जमा करने वाले उपभोक्ता इस श्रेणी से बाहर हो गए हैं। इन उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखते हुए पावर कार्पोरेशन ने राहत योजना में संशोधन किया है।
इसके तहत 31 मार्च तक नेवर पेड श्रेणी के जिन उपभोक्ताओं ने एक अप्रैल से 30 नवंबर 2025 के बीच पहली बार भुगतान कर दिया है, उन्हें भी योजना का लाभ दिया जाएगा। इन उपभोक्ताओं का पंजीयन 11 दिसंबर से शुरू होगा। इस संबध में पावर कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने आदेश जारी कर दिया है। उन्होंने सभी विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिया है कि 31 मार्च तक नेवर पेड रहने वाले और बाद में बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं के पंजीयन की व्यवस्था कराई जाए।
उपभोक्ता तय करेंगे स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना है या नहीं
स्मार्ट प्रीपेड लगवाना है अथवा नहीं, यह विकल्प उपभोक्ताओं के पास मौजूद है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट दिसंबर 2024 में दे चुका है। इस आदेश की प्रति लेकर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा सोमवार को नियामक आयोग पहुंचे। उन्होंने आयोग से स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की।
विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार व सदस्य संजय कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपते हुए राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर थोपना गलत है। उपभोक्ताओं के हित में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को अनिवार्य न मानते हुए विकल्प के रूप में स्पष्ट रूप से आदेश दिया जाए। ताकि राज्यभर के उपभोक्ताओं में व्याप्त भ्रम खत्म हो। उन्होंने कहा कि स्मार्ट/प्रीपेड मीटरों की अनिवार्यता से जुड़ी कई जनहित याचिकाएं विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित हैं। स्पष्ट कानूनी स्थिति न होने के कारण आयोग ने कोई टिप्पणी नहीं की थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि उपभोक्ताओं को विकल्प चुनने का अधिकार है। ऐसे में स्मार्ट प्रीपेड अथवा पोस्टपेड चुनने के विकल्प देकर उपभोक्ताओं को उनका अधिकार दिया जाए।
पंजाब के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दिया है आदेश
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग के अध्यक्ष को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति दिया। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील 4226/2020 माधव केआरजी बनाम पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में दिसम्बर 2024 में यह स्पष्ट कहा गया है कि— यदि कोई मौजूदा उपभोक्ता प्रीपेड मीटर को चुनता है, तो लाइसेंसी सुरक्षा जमा की समायोजन द्वारा वापसी करेगा। यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से बताती है कि प्रीपेड मीटर उपभोक्ता की इच्छा पर आधारित ‘विकल्प’ है। अनिवार्य नहीं है। ऐसे में नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करके उपभोक्ताओं से 6016 की वसूली करना गलत है। इस पर तत्काल रोक लगाई जाए।