सोकर उठने में जोड़ों में दर्द होता है, तो ये करें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सुबह-सुबह सो कर उठा तो जोड़ों में तेज दर्द। ऐसी शिकायतें अक्सर सुनने व देखने को मिलती हैं। महिलाएं इसकी ज्यादा शिकार हो रही हैं।
खास कर युवतियों में भी अब यह समस्या देखने को मिल रही है। ऐसा बैड रूमेटाइड आर्थराइटिस के कारण होता है।
यूपी एपिकॉन-2013 में शनिवार को मेजर जनरल डॉ. वेद चतुर्वेदी ने ‘लेबोरेटरी इवैल्यूएशन ऑफ कनेक्टिव टिश्यू’ के दौरान बैड रुमेटाइड आर्थराइटिस से जुड़े तमाम तथ्यों की जानकारी दी।
मेजर जनरल वेद चतुर्वेदी बताते हैं कि इस प्रकार की आर्थराइटिस के 90 फीसदी मामले युवतियों व महिलाओं में मिलते हैं।
कैसे करें बचाव
डॉ. चतुर्वेदी इस सवाल पर कहते हैं जब बीमारी का कारण ही नहीं पता तो बचाव के कारगर उपाय की भी बात नहीं की जा सकती। हां, यह जरूर है कि हेल्दी हैबिट व योगा से जरूर कुछ हद तक बचा जा सकता है।
क्या इसका उपचार संभव है?
इस सवाल पर डॉ. चतुर्वेदी कहते हैं नई-नई दवाइयों से मरीज का बेहतर उपचार किया जा सकता है। उसकी परेशानियां कम होती हैं। जॉइंट बहुत खराब हों तो ऑपरेशन किया जा सकता है। मरीज की जिंदगी को आसान बनाने के लिए घर में पश्चिमी शौचालय की व्यवस्था की जानी चाहिए।
आसान भाषा में इसे यूं समझें
बैड रुमेटाइड आर्थराइटिस यानी ऐसा गठिया रोग जो कम उम्र में होता है। यह आराम करने के दौरान परेशान करता है। तड़के अगर उठना हो तो जोड़ों की मांसपेशियों में अकड़न आ जाने से हाथ-पैर चलाना मुश्किल हो जाता है। इसे मेडिकल की भाषा में रेस्ट स्टिफनेस या अर्ली मॉर्निंग स्टिफनेस कहा जा सकता है। चलने-फिरने पर यह समस्या नहीं आती है।
आखिर यह बीमारी होती क्यों है?
डॉ. वेद इस सवाल पर कहते हैं कि इसे ऑटो इम्यून डिजीज कहा जाता है। यानी वह बीमारी जिसमें आपका सिस्टम ही आपके खिलाफ काम करने लगे।
हां, अब ऑटो इम्यून डिजीज क्यों होती है, इसका अभी तक कोई स्पष्ट कारण नहीं पता चल सका है। आनुवांशिक कारण भी हो सकते हैं। इंफेक्शन भी एक कारण हो सकता है मसलन चिकनगुनिया के केस में भी ऐसे मामले सामने आते हैं।