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यूपी: ऊर्जा मंत्री ने किया स्पष्ट, उपभोक्ताओं की अनुमति बिना बिजली कनेक्शन नहीं होंगे प्रीपेड; यह है विवाद
Thu, 02 Apr 2026 08:34 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 02 Apr 2026 08:34 PM IST
सार
Prepaid meters in UP: केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने लोकसभा में साफ किया है कि बिना उपभोक्ताओं की अनुमति लिए कनेक्शन को प्रीपेड मोड में नहीं बदला जा सकेगा।
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यूपी में प्रीपेड बिजली मीटर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने लोकसभा में साफ किया है कि बिना उपभोक्ताओं की अनुमति लिए कनेक्शन को प्रीपेड मोड में नहीं बदला जा सकेगा। इस बयान के बाद राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार और विद्युत नियामक आयोग से नियम का पालन कराने की मांग की है।
लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया है कि पूरे देश में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता की सहमति के बाद ही स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में लगाया जा सकता है। धारा 47(5) के अनुसार, यदि उपभोक्ता स्वयं प्रीपेड मीटर चाहता है, तो वितरण लाइसेंसी को उसे यह सुविधा प्रदान करनी होती है और इसके लिए किसी प्रकार की सुरक्षा राशि नहीं ली जाती। विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के तहत नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ दिए जाने का प्रावधान है, हालांकि अपवाद की स्थिति में राज्य विद्युत नियामक आयोग की अनुमति आवश्यक होती है?
निगमों में जबरन बदले जा रहे मीटर
सरकार की नीति उपभोक्ताओं को प्रीपेड स्मार्ट मीटर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की है, न कि इसे जबरन लागू करने की। लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री का बयान आने से राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसका शत प्रतिशत पालन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिषद लगातार मांग कर रहा है कि बिना उपभोक्ताओं की अनुमति लिए मीटर न बदला जाए। इसके बाद भी निगमों में जबरदस्ती मीटर बदले जा रहे हैं। प्रदेश में 70 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्रीपेड मोड में बिना उपभोक्ताओं की सहमति के लगाया गया है। ऐसे में जिनका बिना अनुमति के मीटर बदला गया है, उन्हें उपभोक्ताओं की इच्छा के अनुसार परिवर्तित किया जाए।
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लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने स्पष्ट किया है कि पूरे देश में विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता की सहमति के बाद ही स्मार्ट मीटर को प्रीपेड मोड में लगाया जा सकता है। धारा 47(5) के अनुसार, यदि उपभोक्ता स्वयं प्रीपेड मीटर चाहता है, तो वितरण लाइसेंसी को उसे यह सुविधा प्रदान करनी होती है और इसके लिए किसी प्रकार की सुरक्षा राशि नहीं ली जाती। विद्युत (उपभोक्ताओं के अधिकार) नियम, 2020 के तहत नए कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ दिए जाने का प्रावधान है, हालांकि अपवाद की स्थिति में राज्य विद्युत नियामक आयोग की अनुमति आवश्यक होती है?
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निगमों में जबरन बदले जा रहे मीटर
सरकार की नीति उपभोक्ताओं को प्रीपेड स्मार्ट मीटर अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की है, न कि इसे जबरन लागू करने की। लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री का बयान आने से राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इसका शत प्रतिशत पालन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि परिषद लगातार मांग कर रहा है कि बिना उपभोक्ताओं की अनुमति लिए मीटर न बदला जाए। इसके बाद भी निगमों में जबरदस्ती मीटर बदले जा रहे हैं। प्रदेश में 70 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के स्मार्ट प्रीपेड मीटर को प्रीपेड मोड में बिना उपभोक्ताओं की सहमति के लगाया गया है। ऐसे में जिनका बिना अनुमति के मीटर बदला गया है, उन्हें उपभोक्ताओं की इच्छा के अनुसार परिवर्तित किया जाए।
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