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UP: प्रदेश में इस महीने ज्यादा आएगा बिजली बिल, फ्यूल सरचार्ज 10% तक बढ़ेगा; जानें विभाग का नया फैसला

Sat, 30 May 2026 12:26 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Sat, 30 May 2026 12:26 PM IST
सार

Uttar Pradesh Power Corporation Limited ने जून 2026 के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत तक ईंधन और बिजली खरीद समायोजन अधिभार लगाने का फैसला किया है। मार्च में बिजली खरीद और ट्रांसमिशन पर बढ़ी लागत की भरपाई उपभोक्ताओं से की जाएगी। 

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UP: Electricity Bills to Rise This Month; Fuel Surcharge to Increase by Up to 10%—Know the Department's New De
बिजली बिल बढ़ेगा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं का बिल जून माह में 10 फीसदी अधिक आएगा। यह बढोतरी मार्च माह के ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) के रूप में होगी। प्रदेश में नए नियमों के तहत ईंधन अधिभार की दर घटती - बढ़ती रहती है। मार्च माह का फ्यूल सरचार्ज जून माह में वसूला जाएगा। 

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ऐसे में जून माह का बिजली बिल करीब 10 फीसदी अधिक आएगा। हालांकि पावर कार्पोरेशन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि यह सरचार्ज 20.61 फीसदी होता है, लेकिन अभी फिलहाल 10 फीसदी ही वसूला जाएगा। पावर कार्पोरेशन की ओर से जारी आदेश के बाद बिजली खरीद को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

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4.94 की जगह 5.86 रुपये प्रति यूनिट खरीद की हो जांच

ईंधन अधिभार में बढ़ोत्तरी के आदेश का राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विरोध किया है। परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। आरोप लगाया है कि पावर कार्पोरेशन पिछले दो साल के करीब 1400 करोड़ के पुराने बकाए को चुपचाप वसूलने की तैयारी की है। 

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विद्युत नियामक आयोग के टैरिफ आदेश में वास्तविक विद्युत खरीद लागत 4.94 रुपये प्रति यूनिट अनुमोदित की गई थी, जबकि पावर कॉरपोरेशन ने मार्च 2026 में लगभग 5.86 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद दर्शाते हुए उपभोक्ताओं पर लगभग 1610 करोड़ का अतिरिक्त भार डाला है। 


परिषद अध्यक्ष ने मांग की है कि मार्च 2026 में महंगी बिजली किन परिस्थितियों में और किन निजी बिजली उत्पादक कंपनियों से खरीदी गई, इसकी विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का लगभग 51 हजार करोड़ से अधिक का सरप्लस पहले से है। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार नहीं डाला जा सकता है।

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