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UP: चुनावी कदमताल से बदलाव का अहसास, एक देश-एक चुनाव के अभ्यास का बना अखाड़ा; यहां एक साथ MP-MLA चुनेंगे वोटर
Sun, 28 Apr 2024 09:01 AM IST
शाहरुख खान
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 28 Apr 2024 09:01 AM IST
सार
चुनावी कदमताल से सियासी बदलाव का अहसास हो रहा है। एक देश-एक चुनाव पर भले ही अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया हो, लेकिन इन दो जिले में संसदीय के साथ एक- एक विधानसभा के लिए भी चुनाव हैं।
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UP Election 2024 election
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
श्रावस्ती संसदीय चुनाव देश की सियासी मुहिम का हिस्सा बनने जा रहा है। एक देश एक चुनाव के मुद्दे के बीच यहां पर लोकसभा के साथ ही विधानसभा का चुनाव कदमताल कर रहा है। इससे देश की सियासत में बदलाव के मसौदे का एहसास जिले के मतदाता करेंगे।
यहीं नहीं 57 साल बाद लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ हो रहे हैं। अवध में श्रावस्ती के साथ ही लखनऊ लोकसभा में एक सीट पर साथ-साथ चुनाव हो रहे हैं। इसी के परिणाम से नई व्यवस्था के युग के आगाज की राह भी आसान होगी।
एक देश-एक चुनाव पर भले ही अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया हो, लेकिन जिले के गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता इस बार ऐसे ही अनुभव से रूबरू होंगे। उन्हें एक साथ सांसद और विधायक चुनने का मौका मिला है। लंबे समय बाद यह मौका है, जब यहां एक साथ दोनों पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं।
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बूथ पर पहुंचने वाले मतदाता एक ईवीएम में सांसद के लिए वोट डालेंगे तो दूसरे का बटन दबाकर अपना विधायक चुनेंगे। आजादी के बाद देश में 1952, 1957, 1962 और 1967 में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव हुए थे। मतदाता एक साथ दोनों पदों के लिए चोट देते थे।
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यहीं नहीं 57 साल बाद लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ हो रहे हैं। अवध में श्रावस्ती के साथ ही लखनऊ लोकसभा में एक सीट पर साथ-साथ चुनाव हो रहे हैं। इसी के परिणाम से नई व्यवस्था के युग के आगाज की राह भी आसान होगी।
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एक देश-एक चुनाव पर भले ही अभी कोई निर्णय नहीं हो पाया हो, लेकिन जिले के गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र के मतदाता इस बार ऐसे ही अनुभव से रूबरू होंगे। उन्हें एक साथ सांसद और विधायक चुनने का मौका मिला है। लंबे समय बाद यह मौका है, जब यहां एक साथ दोनों पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं।
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बूथ पर पहुंचने वाले मतदाता एक ईवीएम में सांसद के लिए वोट डालेंगे तो दूसरे का बटन दबाकर अपना विधायक चुनेंगे। आजादी के बाद देश में 1952, 1957, 1962 और 1967 में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव हुए थे। मतदाता एक साथ दोनों पदों के लिए चोट देते थे।
इसके चाद 1968-1969 के बीच राज्य की विधानसभा भंग होने से यह सिलसिला टूट गया था। कई बार ऐसे मौके भी आए, जब साल में दो-दो बार चुनाव के दौर से लोगों को गुजरना पड़ा था। वर्ष 1996 के बाद से दोनों चुनाव के बीच अंतर बढ़ गया था। इस साल अप्रैल से मई तक लोकसभा के लिए वोट पड़े थे तो सितंबर-अक्तूबर में विधानसभा के लिए मतदान हुआ था।
इसके बाद लोकसभा के लिए 1998 और 1999 में मतदान हुआ, जबकि विधानसभा का मतदान 2002 में हुआ था। इन चुनावों के बाद से हर पांच वर्ष के बाद मतदान का मौका मिलता आ रहा है। इस बार गैसड़ी विधानसभा सीट की स्थिति थोड़ी अलग है। वर्ष 2022 में यहां से निर्वाचित सपा विधायक डा. शिव प्रताप यादव की 26 जनवरी को निधन होने से यह सीट रिक्त हुई थी।
अब यहां उपचुनाव होने जा रहा है। 25 मई को यहां लोकसभा के साथ विधानसभा के लिए भी वोट पड़ेंगे। नामांकन की प्रक्रिया 29 अप्रैल से एक साथ होगी। लंबे समय बाद मत्तदाताओं के लिए ऐसा मौका आया है, जब वह बूथ पर पहुंचेंगे तो एक साथ सांसद और विधायक दोनों के लिए वोट देकर लौटेंगे।
यह मौका तब मिला है, जब देश में एक देश-एक चुनाव की सरगर्मी जोरों पर है। देवीपाटन मंडल में एक मात्र गैसड़ी विधानसभा क्षेत्र के लोग इस बार सबसे पहले एक साथ होने वाले चुनावों का अनुभव महसूस कर पाएंगे।
एक साथ चुनाव से दलों की बढ़ी है धड़कनें
एक साथ लोकसभा व विधानसभा चुनाव होने से दलों की धड़कनें बढ़ी हुई है। माना जा रहा है कि मतदाता दलों के साथ ही हो सकता प्रत्याशियों को अलग- अलग पसंद करते हों, तो ऐसे दौर में वोट की चूक हो सकती है। इसे लेकर पार्टियों का पूरा जोर गैसड़ी क्षेत्र में ज्यादा है। भाजपा व सपा की ओर लगातार बैठकों व सम्मेलनों का दौर भी चल रहा है।
एक साथ लोकसभा व विधानसभा चुनाव होने से दलों की धड़कनें बढ़ी हुई है। माना जा रहा है कि मतदाता दलों के साथ ही हो सकता प्रत्याशियों को अलग- अलग पसंद करते हों, तो ऐसे दौर में वोट की चूक हो सकती है। इसे लेकर पार्टियों का पूरा जोर गैसड़ी क्षेत्र में ज्यादा है। भाजपा व सपा की ओर लगातार बैठकों व सम्मेलनों का दौर भी चल रहा है।
जिससे मतदाताओं को साधे रखा जा सके। फिलहाल अब मतदाता जागरूक हैं और भटकने वाले नहीं है। इसके बाद भी दलों में सतर्कता बढ़ी है। वहीं निर्वाचन आयोग की निगाहें भी एक साथ चुनाव वाले क्षेत्रों पर टिकी है। यह अनुमान है कि जहां पर दोनों चुनाव हो रहे हैं, वहां मत प्रतिशत बढ़ सकता है।
एक साथ चुनाव होने से 1962 में हो चुकी है चूक
लोकसभा चुनाव 1962 में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे। इसमें मतदाताओं से चूक हुई थी। जिसका एहसास परिणाम आने के बाद हुआ। उस समय के परिणाम की चर्चा आज भी होती है, एक क्षेत्र विशेष के मतदाता अपने चहेते प्रत्याशी को मत देने में चूक गए थे।
लोकसभा चुनाव 1962 में लोकसभा व विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे। इसमें मतदाताओं से चूक हुई थी। जिसका एहसास परिणाम आने के बाद हुआ। उस समय के परिणाम की चर्चा आज भी होती है, एक क्षेत्र विशेष के मतदाता अपने चहेते प्रत्याशी को मत देने में चूक गए थे।
यह बात अलग है कि उन्हें एहसास हुआ तो 1967 में मतदाताओं ने अपनी ताकत दिखाई और हिसाब बराबर कर लिया था। फिलहाल गैसड़ी के ही राम दुलारे के कहते हैं कि उस समय जागरूकता का अभाव था। अब तो हर व्यक्ति राजनीति रूप से जागरूक ही नहीं सजग भी है।
एक साथ चुनाव के चौंकाने वाले होंगे परिणाम
श्रावस्ती सियासी गर्मी दिनोंदिन तेज हो रही है। दो जिलों में बंटी सियासत में उतार - चढ़ाव का दौर चल रहा है। गैसड़ी विधानसभा में पार्टियों में संघर्ष काफी रोचक रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम पर गौर करें तो गैसड़ी में बसपा को 80,337 व भाजपा को 73,036 मत मिले थे, भाजपा 7,303 मतों से पीछे रही थी। उस समय सपा मैदान में नहीं थी।
श्रावस्ती सियासी गर्मी दिनोंदिन तेज हो रही है। दो जिलों में बंटी सियासत में उतार - चढ़ाव का दौर चल रहा है। गैसड़ी विधानसभा में पार्टियों में संघर्ष काफी रोचक रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम पर गौर करें तो गैसड़ी में बसपा को 80,337 व भाजपा को 73,036 मत मिले थे, भाजपा 7,303 मतों से पीछे रही थी। उस समय सपा मैदान में नहीं थी।
इस बार का परिणाम चौंकाने वाला होगा। भाजपा ने विधानसभा में पूर्व विधायक शैलेश कुमार सिंह को तो सपा ने विधायक रहे डा. शिव प्रताप यादव के बेटे को ही प्रत्याशी बनाया है। वहीं बसपा ने मो. हारिस फिदा बाबा को उतारा है। इस तरह यहां के मुकाबले का असर लोकसभा में भी दिखेगा। परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।