UP: प्रदेश में समय से पहले हो सकते हैं चुनाव, इस महीने में हो सकती घोषणा; राजनीतिक दलों ने शुरू की तैयारियां
UP Assembly Elections: यूपी में समय से पहले विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। इसको लेकर सभी पार्टियों ने गुपचुप तैयारी शुरू कर दी है।
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उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में इसी साल नवंबर-दिसंबर में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। अगले साल फरवरी में प्रस्तावित जनगणना के दूसरे चरण में बाधा नहीं आने देने के लिए केंद्र सरकार इन राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 से पहले चुनाव कराने पर विचार कर रही है। भाजपा नेतृत्व ने सभी राज्य इकाइयों को आगाह करते हुए चुनावी तैयारियों को इसी महीने अंतिम रूप देने का निर्देश दे दिया है।
दरअसल, इन राज्यों में फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव प्रस्तावित हैं। इसी दौरान राष्ट्रीय जनगणना का दूसरा चरण शुरू होना है जो 9 से 28 फरवरी तक चलेगा। इस दौरान राज्य कर्मचारी सामाजिक और आर्थिक जानकारी जुटाएंगे। इसके लिए यूपी में कम से कम 5.5 लाख, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा में 50-50 हजार और पंजाब में दो लाख सरकारी कर्मियों की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में चुनावी ड्यूटी के लिए पर्याप्त कर्मी नहीं मिल पाएंगे।
तीन राज्य इकाइयों ने की पुष्टि
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पंजाब इकाई से जुड़े जुड़े सूत्रों ने बताया कि नेतृत्व ने जल्द चुनाव के लिए तैयार रहने और इसके लिए बूथ कमेटियों को अंतिम रूप देने, संगठन की नियुक्तियां पूरी करने समेत सभी चुनावी तैयारियों को जुलाई के पहले सप्ताह तक अंतिम रूप देने को कहा है। हालांकि, उत्तराखंड राज्य इकाई के सूत्र ने कहा कि पहाड़ी इलाकों में दूसरे चरण की जनगणना सितंबर 2026 में हो जाएगी। ऐसे में इस राज्य को जल्द चुनाव से छूट मिल सकती है।
विपक्ष में भी हलचल
जल्द चुनाव की संभावनाओं के मद्देनजर विपक्षी खेमे में भी हलचल है। बीते सोमवार को इंडिया ब्लॉक की बैठक में इन संभावनाओं पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के बीच बात हुई। आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को पंजाब में चुनाव नवंबर में कराने की जानकारी देते हुए राज्य इकाई को तैयारी करने का निर्देश दिया।
अंतिम मतदाता सूची बाधा नहीं
चुनाव आयोग के सूत्रों ने सरकार की ओर से इन राज्यों में जल्द चुनाव कराने की सूचना मिलने से इन्कार किया। हालांकि, सूत्र ने कहा कि अगर नवंबर में चुनाव होते हैं हैं तो तो म मतदाता सूची बाधा नहीं बनेगी। इन राज्यों में गहन पुनरीक्षण प्रकिया (एसआईआर) अंतिम चरण में है। जरूरत पड़ने पर जनवरी में तैयार होने वाली अंतिम मतदाता सूची को तीन महीने पहले ही अंतिम रूप दिया जा सकता है।