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यूपी : 600 रुपये बजट में वर्दी में ड्यूटी संभव नहीं, नर्सिंग की तरह पैरामेडिकल कर्मचारियों ने भी की वर्दी भता देने की मांग
Wed, 30 Jun 2021 10:31 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 30 Jun 2021 10:31 AM IST
सार
महेंद्र पांडेय का कहना है कि यह वर्षों पुरानी व्यवस्था है। 600 रुपये में दो पैंट और दो शर्ट वर्तमान में संभव नहीं है। इसलिए इस बजट को बढ़ाया जाए।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को निर्धारित यूनिफार्म में रहने के आदेश के बाद कर्मचारियों पर भारी पड़ रहा है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी वर्दी के लिए दिए गए बजट को बढ़ाने और भता देने की मांग कर रहे हैं। पैरामेडिकल कर्मचारी नर्सिंग संवर्ग की तरह वर्दी भता देने की मांग कर रहे हैं।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग के सभी अस्पतालों में सेवारत स्टाफ को निर्धारित वेशभूषा में रहने के निर्देश दिए थे। इसमें उनकी वर्दी पर नाम, पद नाम लिखने के भी निर्देश थे। मुख्यमंत्री की मंशा है कि सभी कर्मियों का नाम उनकी यूनिफार्म पर लिखा हो, जिससे मरीज और परिवारीजनों को उनकी पहचान में असुविधा न हो। मुख्यमंत्री के मौखिक निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग में इसको फैसले को लेकर समीक्षा शुरू हो गई है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सफेद वर्दी पहननी होती है। उन्हें इसके लिए 600 रुपये दिए जाते हैं। जिसमें दो पैंट और दो शर्ट लेनी होती है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय का कहना है कि चार साल में दो बार वर्दी देने का प्रावधान है। सर्दियों के लिए तीन साल में एक कोट एक पैंट दी जाती है। उसकी कीमत 1300 रुपये का बजट है। यह वर्षों पुरानी व्यवस्था है। 600 रुपये में दो पैंट और दो शर्ट वर्तमान में संभव नहीं है। इसलिए इस बजट को बढ़ाया जाए। साथ ही सफेद वर्दी के रखरखाव के लिए भता भी दिया जाए।
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महेंद्र पांडेय ने बताया कि सफाई कर्मियों को खाकी वर्दी दी जाती है। उनका बजट भी 600 रुपये ही है। लेकिन यह नाम मात्र का बजट भी समय पर नहीं दिया जाता है। ऐसे वर्दी में रहना काफी कठिन हो जाएगा। उन्होंने कहा कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को बाजार दर के अनुसार वर्दी के लिए बजट दिया जाए। साथ ही मेंटीनेंस भते के रूप में 100 रुपये वेतन में जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि संविदा के चतुर्थ श्रेणी और सफाई कर्मचारियों को सात-आठ हजार रुपये वेतन दिया जाता है। उन्हें इसी में अपनी कंपनी की निर्धारित वर्दी भी पहननी होती है। इसके लिए वह अपने वेतन से ही व्यवस्था करते हैं। संविदा कर्मचारियों को भी वर्दी के लिए अलग से बजट देने के निर्देश कंपनी को दिए जाएं।
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उधर अस्पतालों में तैनात पैरामेडिकल संवर्ग के कर्मचारियों को सफेद एप्रेन पहनना होता है। इसमें फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन व अन्य तकनीकी संवर्ग शामिल है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के उपाध्यक्ष व फार्मासिस्ट फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव का कहना है कि सभी पैरामेडिकल अपनी निर्धारित वर्दी में रहते हैं। लेकिन उन्हें वर्दी भता नहीं दिया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से वर्दी भता देने की मांग की है। सुनील का कहना है कि नर्सिंग संवर्ग को वर्दी भता देने का प्रावधान है। यह इसलिए सभी पैरामेडिकल को भी एपे्रेन के लिए वर्दी भता दिया जाए। लैब टेक्रीशियन संघ के प्रवक्ता सुनील कुमार का ने बताया कि सभी लैब टेक्रीशियन सफेद एप्रेन पहननते हैं। अब मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार सभी अपने एप्रेन पर नाम और पदनाम भी लिखेंगे।