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यूपी: इंजीनियरिंग की पढ़ाई में बढ़ा बेटियों का दबदबा, पांच साल में संख्या हुई दोगुनी, घटी लड़कों की संख्या

Tue, 08 Oct 2024 07:30 AM IST
रोहित मिश्र अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ
अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 08 Oct 2024 07:30 AM IST
सार

Engineering colleges in up: प्रदेश में इंजीनियरिंग कॉलेजों में लड़कियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीते पांच सालों में यह संख्या दोगुनी हो गई है। लड़कों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। 

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UP: Dominance of girls increased in engineering studies, number doubled in five years, number of boys decrease
यूपी के इंजीनियरिंग कॉलेज। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई में साल दर साल बेटियों का दबदबा बढ़ रहा है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त आरक्षण के। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) से संबद्ध 750 से अधिक संस्थानों में पिछले पांच साल में दाखिला लेने वाले बेटियों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है।

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आमतौर पर लड़कियां इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने में हिचकती थीं। हालांकि कुछ साल से यह मिथक टूट रहा है। जॉब के बेहतर अवसर और बेटियों को आगे बढ़ाने के प्रयासों के बाद एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों में उनकी संख्या में इजाफा हुआ है। वर्ष 2020-21 में जहां 17 हजार छात्राओं ने प्रवेश लिया था, वहीं 2024-25 में लगभग 31 हजार दाखिले हुए हैं। जबकि अभी फार्मेसी में दाखिला होना बाकी है।
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हालांकि छात्रों के भी प्रवेश बढ़े हैं, लेकिन बेटियों की अपेक्षा कम। एकेटीयू से संबद्ध संस्थानों में जहां 2020-21 में जहां 57,734 लड़कों ने प्रवेश लिया था। वहीं 2021-22 में 69337, 2022-23 में 79346, 2023-24 में 81613 और 2024-25 में अब तक 80398 लड़कों के प्रवेश हुए हैं। यानी लड़कों की संख्या डेढ़ गुणा से भी कम बढ़ी है। दूसरी तरफ सीटें भी पिछले पांच साल में 1.36 लाख से बढ़कर 1.51 लाख हुई हैं।
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साल दर साल बढ़ी छात्राओंं की संख्या
एकेटीयू व संबद्ध संस्थानों में वर्ष 2020-21 में 16999 छात्राओं तो 57,734 छात्रों ने प्रवेश लिए। इसी तरह 2021-22 में 19503 छात्राओं व 69337 छात्रों, 2022-23 में 23289 छात्राओं व 79346 छात्रों, 2023-24 में 25513 छात्राओं व 81613 छात्रों, 2024-25 में 30967 छात्राओं व 80398 छात्रों ने प्रवेश लिए हैं। जबकि चालू सत्र में अभी फार्मेसी कोर्स में प्रवेश होने बाकी हैं। इसके बाद छात्राओं की संख्या चार-पांच हजार और बढ़ने की उम्मीद है।

किसी भी क्षेत्र में जाने में हिचक नहीं रहीं बेटियां
एकेटीयू के फैकेल्टी ऑफ ऑर्किटेक्चर एंड प्लानिंग की डीन प्रो. वंदना सहगल ने कहा कि अब बेटियां बाहर कहीं भी जॉब करने के लिए तैयार हैं। अभिभावक उन पर भरोसा कर रहे हैं। जबकि पूर्व में कहा जाता था कि बेटी को बीएड करके शिक्षक बनना चाहिए। कुछ और बेहतर किया तो विवि-कॉलेज में शिक्षक बनती थीं। अब ऐसा नहीं है। अब बेटियां इंजीनियर व डॉक्टर ही नहीं सैनिक और पायलट बनने में भी नहीं हिचक रही हैं।


मिल रहा है सुरक्षित माहौल
समाज में जागरूकता बढ़ने का असर है कि बेटियां इंजीनियरिंग के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही हैं। कार्यस्थल पर सुरक्षित माहौल मिल रहा है। जॉब की संभावनाएं बढ़ी हैं और अभिभावकों में भी स्वीकार्यता बढ़ी है। बेटियां पायलट बनकर हवाई जहाज उड़ा रही हैं तो बार्डर पर महिला बटालियन में तैनात हो रही हैं। यह बदलाव का ही असर है।-प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति, एकेटीयू

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