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यूपी: फर्जी दस्तावेजों पर 255.75 करोड़ के ठेके, सीएजी ने यूपीसीडा की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

Thu, 19 Feb 2026 11:11 PM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Thu, 19 Feb 2026 11:11 PM IST
सार

विधानमंडल में पेश सीएजी रिपोर्ट में यूपीसीडा के कामकाज में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ। जाली दस्तावेजों पर 255.75 करोड़ के ठेके दिए गए। कई निविदाएं बिना पात्रता जांच के स्वीकृत हुईं। भूमि आवंटन और क्षतिपूर्ति वसूली में भी गड़बड़ियां मिलीं। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई।

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UP: Contracts worth Rs 155 crore awarded to builders on forged documents, CAG makes major revelation on UPCDA
यूपीसीडा। - फोटो : upsida की वेबसाइट से

विस्तार

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। विधानमंडल के दोनों सदनों में गुरुवार को पेश की गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो बिल्डर कंपनियों को 255.75 करोड़ रुपये के औद्योगिक विकास कार्यों के ठेके आवंटित कर दिए गए थे।

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सीएजी की यह रिपोर्ट वर्ष 2017-18 से 2021-22 की अवधि से संबंधित है। रिपोर्ट में औद्योगिक भूखंडों के आवंटन, भूमि अधिग्रहण, बोली दस्तावेजों के मूल्यांकन, भूमि विकास कार्यों, सार्वजनिक उपक्रमों को असुरक्षित ऋण देने तथा आयकर छूट का लाभ न लेने जैसे कई मामलों में अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है।
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रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2015-16 में मेसर्स बालाजी बिल्डर को अनुभव प्रमाण पत्र का सत्यापन किए बिना ही औद्योगिक क्षेत्रों के दो चयनित निर्माण खंडों के विकास के लिए 143.22 करोड़ रुपये के 13 अनुबंध प्रदान कर दिए गए। 
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बाद में जांच में अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए और वर्ष 2017 में अनुबंध निरस्त करने पड़े। इसी तरह मेसर्स आकाश इंजीनियरिंग एंड बिल्डर्स को अनुभव प्रमाण पत्र और एफडी के सत्यापन के बिना 112.53 करोड़ रुपये के दो अनुबंध दे दिए गए। वर्ष 2018 में प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर ये अनुबंध भी निरस्त किए गए।

प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज कराई गई

इस प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज कराई गई, लेकिन दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसका उल्लेख रिपोर्ट में नहीं है। 12.65 करोड़ रुपये की देय राशि में से केवल 1.39 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके। सीएजी ने स्पष्ट अनुशंसा की है कि ऐसे मामलों में उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि विकास कार्यों से जुड़े ठेकों की बोली प्रक्रिया से पहले ठेकेदारों की तकनीकी और वित्तीय क्षमता का समुचित आकलन नहीं किया गया। 1.01 करोड़ रुपये से 63.41 करोड़ रुपये के बीच की 27 बोलियां ऐसे ठेकेदारों ने लगाईं जो पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इसके बावजूद उन्हें 27 कार्य आवंटित कर दिए गए। परिणामस्वरूप 11 कार्य 61 से 2612 दिन की देरी से और 14 कार्य 2678 दिन बाद भी पूर्ण नहीं हो सके।

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सीएजी ने 16 मामलों में 13.71 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति

सीएजी ने 16 मामलों में 13.71 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति और 34 कार्यों में 1.63 करोड़ रुपये के गुणवत्ता परीक्षण शुल्क की वसूली न किए जाने को भी गंभीर वित्तीय अनियमितता माना है। रिपोर्ट में कम क्षमता वाले ठेकेदारों को उच्च क्षमता के कार्य सौंपे जाने का भी उल्लेख है।

भूमि आवंटन में भी नियमों की अनदेखी सामने आई है। मथुरा औद्योगिक क्षेत्र-बी में 3929 वर्गमीटर भूखंड का 93.08 लाख रुपये में आवंटन आवेदन और साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी किए बिना कर दिया गया।  वहीं कानपुर देहात के जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में 5018.65 वर्गमीटर का भूखंड अपात्र आवेदक मेसर्स जय भगवती ट्रेडर्स को 1.10 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिया गया, जबकि मूल्यांकन के आधार पर यह भूखंड आईआरसीटीसी को दिया जाना चाहिए था। सीएजी की रिपोर्ट ने यूपीसीडा की आंतरिक निगरानी और जवाबदेही प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

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