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यूपी: कोयले की कमी और बारिश से गहराया बिजली संकट, गांवों में आठ घंटे ही मिल पा रही है बिजली; उठे बड़े सवाल

Sun, 13 Sep 2026 09:43 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sun, 13 Sep 2026 09:43 PM IST
सार

Power crisis in UP: यूपी में बिजली संकट बना हुआ है। बारिश की वजह से होने वाली ट्रिपिंग और कोयले की कमी ने कटौती के घंटे बढ़ गए हैं। 

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UP: Coal shortage and rain deepen power crisis, villages only get electricity for eight hours
यूपी में बिजली कटौती। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश में बिजली कटौती ने ग्रामीण उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में 18 घंटे के रोस्टर के मुकाबले 16.41 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया जा रहा है, लेकिन गांवों में हकीकत इससे अलग है। कई इलाकों में उपभोक्ताओं को छह से आठ घंटे ही बिजली मिल पा रही है। रात के समय होने वाली कटौती ने परेशानी और बढ़ा दी है। बिजली पर निर्भर लघु एवं कुटीर उद्योगों पर भी इसका सीधा असर पड़ा है।

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यूपीएसएलडीसी की रिपोर्ट के अनुसार, 13 सितंबर को प्रदेश में बिजली की मांग 28834 मेगावाट रही जबकि उपलब्धता 25,184 मेगावाट थी। मांग और उपलब्धता के बीच 3650 मेगावाट का अंतर रहा। इसकी भरपाई के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में आपात कटौती की गई। वहीं, 10 सितंबर को अलग-अलग कारणों से 10 उत्पादन इकाइयां बंद हुई थीं। कुछ इकाइयों में उत्पादन शुरू हो गया है, लेकिन करीब आधा दर्जन इकाइयां अब भी बंद हैं।
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कारोबार पर पड़ रहा असर
बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ा है, जिनकी आजीविका बिजली से चलने वाले छोटे कारोबार पर निर्भर है। चित्रकूट के खोह निवासी संजय पटेल ने बताया कि बिजली की कटौती के कारण आटा चक्की और स्पेलर बंद हैं। यही उनकी आय का मुख्य साधन हैं। जौनपुर के मनोज यादव, विजय सिंह और असफाक खां ने बताया कि उनके इलाके में आठ घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। रात में कटौती अधिक होने से घरेलू उपभोक्ताओं को भी परेशानी हो रही है। सीतापुर के बिसौली निवासी दयाशंकर सिंह के अनुसार, उनके क्षेत्र में छह से आठ घंटे बिजली मिलने से लघु एवं कुटीर उद्योग प्रभावित हैं। इससे कारोबार का कामकाज प्रभावित होने के साथ लोगों की आय पर भी असर पड़ रहा है।

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उपभोक्ता परिषद ने उठाए सवाल

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि यूपीएसएलडीसी 16.41 घंटे आपूर्ति का दावा कर रहा है जबकि लगातार ब्रेकडाउन और कटौती से उपभोक्ताओं को करीब आठ घंटे ही बिजली मिल रही है। उन्होंने कहा कि 3650 मेगावाट की आपात कटौती बिजली व्यवस्था की स्थिति को बताती है। सरकार और पॉवर कॉर्पोरेशन को स्पष्ट करना चाहिए कि 18 घंटे के रोस्टर के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में इतनी कम आपूर्ति क्यों हो रही है।

गीले कोयले से भी उत्पादन प्रभावित
पॉवर कॉरपोरेशन के प्रवक्ता के अनुसार, भारी बारिश और जलभराव से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात समेत कई राज्यों में कोयले की कमी हुई है। यूपी में भी गीले कोयले के कारण उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। कुछ इकाइयां तकनीकी कारणों से बंद हैं। पीक समय में ग्रामीण क्षेत्रों, बुंदेलखंड, तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में सीमित रात्रिकालीन रोस्टरिंग की जा रही है। कोयले और बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कोल इंडिया लिमिटेड समेत संबंधित एजेंसियों से लगातार समन्वय किया जा रहा है। प्रबंधन का दावा है कि मई के बाद यूपी ने 74 दिन सर्वाधिक बिजली आपूर्ति की है।

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