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यूपी: पीठासीन सम्मेलन में बोले सीएम योगी- पीठ द्वारा विपक्ष को ज्यादा मौका देने पर नाराज नहीं होती सरकार

Wed, 21 Jan 2026 08:06 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Wed, 21 Jan 2026 08:06 PM IST
सार

Yogi Adityanath: लखनऊ में चल रहा अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन बुधवार को खत्म हो गया। इस मौके पर सीएम योगी ने भी अपना संबोधन दिया। 

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UP: CM Yogi said in the presiding conference that the government does not get angry if the bench gives more o
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी दिया संबोधन। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा मंडप में बुधवार को तीन दिवसीय 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर सीएम योगी ने कहा कि पीठ और सरकार की सोच प्रोएक्टिव (सक्रिय पहल की) होती है, रिएक्टिव (प्रतिक्रियावादी) नहीं होता। पीठ ने विपक्ष को अधिक मौका दे दिया तो सरकार रिएक्टिव नहीं होती।

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योगी ने कहा कि पीठ पक्ष-विपक्ष में संतुलन बनाती है। सीएम ने यूपी के विधानसभा अध्यक्ष व विधान परिषद के सभापति के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जहां भी ऐसे सम्मेलन होते हैं, दोनों लोग जाते हैं। वे केवल सदन की कार्यवाही तक सीमित नहीं रहते। सीएम ने ऐसे सम्मेलनों को सीखो-सिखाओ का मंच बताया। योगी ने कहा कि विधायिका लोकतंत्र की आधारभूत इकाई है। संविधान संरक्षक के रूप में यह अपनी भूमिका का निर्वहन करते हुए देश में न केवल विधायी कार्यों के लिए रूपरेखा तैयार करती है, बल्कि यह समग्र विकास की कार्ययोजना का मंच भी होती है।
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न्याय, समता, बंधुता लोकतंत्र की आत्मा
उन्होंने कहा कि संविधान के तीन शब्द (न्याय, समता और बंधुता) भारत के लोकतंत्र की आत्मा के रूप में काम करते हैं। न्याय कैसे प्राप्त होना है, इसका कानून विधायिका के मंच पर तैयार होता है। समतामूलक समाज की स्थापना में सरकार की योजनाएं योगदान दे सकें, उसकी कार्ययोजना का स्थल भी विधायिका है। विधायिका बंधुता का उदाहरण प्रस्तुत करती है, जहां सहमति व असहमति के बीच भी संवाद के माध्यम से समन्वय होता है।

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संसद हम सबके लिए प्रेरणा

पांच बार लोकसभा सदस्य रहे योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संसद में रहकर सीखा कि सामान्य जीवन में सरकार की गतिविधियों, आपसी व्यवहार और नियम के अंतर्गत इन कार्यक्रमों को कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है। विधान सभा व विधान परिषद, संसद के नियमों-परिनियमों की जानकारी ले लें तो सदन संचालन में काफी आसानी होगी।

सीएम ने कहा, सतीश महाना ने 2022 में विधानसभा अध्यक्ष का दायित्व संभाला तो मैंने उनसे कहा कि प्रश्नकाल में 20 तारांकित प्रश्न सूचीबद्ध होते हैं, लेकिन सवा घंटे के प्रश्नकाल में केवल दो-तीन सदस्य ही बोल पाते हैं। क्या हम भी इसे संसद की तर्ज पर आगे बढ़ा सकते हैं। इस पर उन्होंने तत्काल नियमावली में परिवर्तन किया। अब सवा घंटे में 20 तारांकित प्रश्न और हर प्रश्न के साथ दो-तीन अनुपूरक प्रश्न भी पूछ लिए जाते हैं। प्रश्न करने वाले और उत्तर देने वाले मंत्रीगण, दोनों पूरी तैयारी के साथ आते हैं। संसद हमारे लिए प्रेरणा बनी। संसद के प्रति श्रद्धा हर भारतवासी का दायित्व है। संसद को आदर्श के रूप में बढ़ाएंगे तो विधायिका और मजबूत-सशक्त होगी।

विधानमंडल की न्यूनतम 30 बैठकों के प्रस्ताव को बताया सराहनीय

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पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन को संबोधित करते सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

सीएम ने कहा कि हम विजन 2047-विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के संकल्प के साथ हम आगे बढ़े हैं। सीएम ने यूपी में सदन की कार्यवाही की प्रशंसा की। कहा, यहां कार्यवाही अत्यंत सुगमता से चलती है। सीएम ने वर्ष में कम से कम 30 बैठकों का प्रस्ताव पारित किए जाने को भी सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि यह संसद और विधानसभा के लिए ही नहीं, बल्कि नगर निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों के लिए भी प्रेरणा है। जब सरकार के सामने यह बात आई कि ई-विधान होना है तो हमने कहा कि तत्काल इसे लागू कीजिए।

स्थाई विकास लक्ष्यों के लिए आए सुझावों को दे रहे आकार
सीएम ने कहा कि यूपी विधानसभा ज्वलंत मुद्दों पर लगातार चर्चा-परिचर्चा चलाती है। स्थाई विकास लक्ष्यों (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स) पर भी यहां लगातार 37-38 घंटे चर्चा हुई। विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश की चर्चा करते हुए सीएम ने कहा कि हमने विजन डॉक्यूमेंट में जनता से सुझाव लिए। पोर्टल पर 98 लाख लोगों के सुझाव आए। एआई टूल के माध्यम से आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर हम उसे फाइनल रूप दे रहे हैं।

सदन में नियोजित व्यवधान लोकतंत्र के लिए घातक : ओम बिरला

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समापन समारोह को संबोधित करते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला। - फोटो : amar ujala

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य विधानमंडलों में प्रति वर्ष कम से कम 30 बैठकें अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही सार्थक चर्चा होगी और लोकतंत्र मजबूत होगा। नियोजित तरीके से सदन में बाधा डालना एक गलत परंपरा है, जिससे सबसे अधिक नुकसान आम नागरिक का होता है, जिसकी समस्याओं पर चर्चा होनी होती है।

लोकसभा अध्यक्ष 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के समापन के बाद पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विरोध लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विरोध का सबसे उचित मंच सदन है, जहां शब्दों और तर्कों के माध्यम से अपनी बात रखी जानी चाहिए। इससे जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास बना रहता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रयास होना चाहिए कि सदन एक घंटे के लिए भी बाधित न हो, क्योंकि जनप्रतिनिधि हर क्षण जनता के प्रति जवाबदेह हैं।

ओम बिरला ने जानकारी दी कि यह सम्मेलन छह महत्वपूर्ण संकल्पों के साथ संपन्न हुआ। उन्होंने बताया कि लोकसभा को इस वर्ष आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल्स से लैस किया जा रहा है और भविष्य में सभी राज्यों की विधानसभाओं में भी इसे लागू किया जाएगा। हालांकि, इसके लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी विधानसभाओं को मानक तय करने होंगे। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही सभी राज्यों की विधानसभा की कार्यवाही एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी। लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी घोषणा की कि विधायिका को अधिक प्रभावी, जनोपयोगी और उत्तरदायी बनाने के उद्देश्य से एक ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (नेशनल लेजिसलेटिव इंडेक्स) तैयार किया जाएगा। इससे विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, संवाद की गुणवत्ता और कार्यकुशलता में वृद्धि होगी। इसके मानक तय करने के लिए एक सप्ताह के भीतर समिति गठित की जाएगी।

बनेंगे माडल यूनीफॉर्म रूल
उन्होंने कहा कि राज्य विधानमंडल स्वायत्त होते हैं और नियम सदन द्वारा ही तय किए जाते हैं, लेकिन लोकसभा इस वर्ष ‘मॉडल यूनिफॉर्म रूल्स’ तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिसे राज्यों की विधानसभाओं से अनुमोदित कराना होगा। कार्यपालिका की जवाबदेही पर उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि नियमों और तथ्यों से परिचित हों तो वे कार्यपालिका को प्रभावी ढंग से जवाबदेह बना सकते हैं। इस दिशा में स्थायी समितियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। कुछ अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों से फोन पर हुई बातचीत को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने पर उन्होंने इसे अनुचित परंपरा बताया और कहा कि इसके लिए सदनों में विशेषाधिकार का प्रावधान है, जिसमें दंड का भी प्रावधान है।

ये संकल्प हुए पारित

वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य हेतु पीठासीन अधिकारियों की पूर्ण प्रतिबद्धता।
राज्य विधानमंडलों की प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित करना।
प्रौद्योगिकी के उपयोग से जनता और विधायिका के बीच संवाद को सशक्त बनाना।
लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने हेतु सभी संस्थाओं में आदर्श नेतृत्व को बढ़ावा।
सांसदों और विधायकों की डिजिटल क्षमता वृद्धि तथा शोध-अनुसंधान सहयोग को मजबूत करना।
विधायी कार्यों के आकलन हेतु ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ का निर्माण।
 
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