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यूपी: कम छात्र संख्या वाले स्कूलों के बच्चे दूसरे स्कूलों में होंगे शिफ्ट,संगठन बोले- विद्यालय हो जाएंगे बंद

Tue, 17 Jun 2025 08:24 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 17 Jun 2025 08:24 PM IST
सार

Primary schools in UP:यूपी के प्राइमरी स्कूलों में उन स्कूलों के बच्चों को पास वाले स्कूलों में शिफ्ट किया जा रहा है जहां पर छात्र संख्या कम है। इसी अनुसार अध्यापकों का भी बदलाव हो रहा है। 

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UP: Children of schools with low student numbers will be shifted to other schools, organizations said - a tric
कम छात्र संख्या वाले स्कूल हो जाएंगे बंद? - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 शासन ने कम नामांकन वाले परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को पास के स्कूल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है। इस आदेश का शिक्षक संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। शिक्षकों का कहना है कि शासन विद्यालयों की पेयरिंग के नाम परिषदीय विद्यालयों को बंद कर रहा है। यह न सिर्फ शिक्षा के अधिकार अधिनियम (आरटीई) की मूल भावना का अतिक्रमण है, बल्कि ग्रामीण बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय भी।

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उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि आरटीई के तहत गांवों और मजरों में स्कूल खोले गए थे, ताकि हर बच्चे को उसके घर के पास शिक्षा मिल सके। उन्होंने इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की। कहा, यदि ऐसा नहीं हुआ तो संघ आंदोलन करेगा। संघ के लखनऊ जिलाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि राजधानी के 445 विद्यालयों की प्रस्तावित पेयरिंग आदेश को तत्काल स्थगित किया जाए। जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ लखनऊ के मनोज कुमार मौर्य ने कहा कि पहले परिषदीय स्कूलों में प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त कर दिए गए। अब स्कूलों को मर्ज करके शिक्षकों के पद भी समाप्त करने की साजिश हो रही है। इसका हर स्तर पर विरोध होगा।
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अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने विद्यालयों के विलय का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि सरकार सीधे-सीधे स्कूलों के निजीकरण की ओर बढ़ रही है। सरकार नहीं चाह रही है कि गरीब, किसान, रिक्शा, ठेले वाले, मजदूरों के बच्चे शिक्षा पाकर उच्च पदों पर पहुंच सके। उन्होंने कहा कि स्कूल मर्ज करने का विरोध किया जाएगा। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि संगठन इस निर्णय का पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने सीएम से इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। मांग पूरी न होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।

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