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UP: बिना किसी कारण राइड कैसिंल करना चालक को पड़ेगा महंगा, जानिए टैक्सी-डिलीवरी सेवाओं के नए नियम

Fri, 13 Mar 2026 10:08 PM IST
Akash Dwivedi अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Fri, 13 Mar 2026 10:08 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए नई नियमावली का प्रस्ताव जारी किया गया है। इसके तहत बिना कारण राइड रद्द करने पर चालक के किराये से कटौती होगी। कंपनियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा और यात्रियों व चालकों के लिए बीमा व सुरक्षा संबंधी प्रावधान भी लागू किए जाएंगे।

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UP: Canceling a Ride Without Justification Will Cost Drivers Dearly—Learn About the New Rules for Taxi and Del
प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

प्रदेश में एप आधारित टैक्सी और डिलीवरी सेवाओं को नियंत्रित करने के लिए परिवहन विभाग ने उत्तर प्रदेश मोटर यान (समूहक और वितरण सेवा प्रदाता) नियमावली, 2026 का प्रस्ताव जारी किया है। प्रस्ताव के मुताबिक अगर कोई चालक राइड बुक करने के बाद बिना किसी वैध कारण के राइड कैंसिल करता है तो उससे दस फीसदी की कटौती कुल किराये में से की जाएगी।

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दूसरी तरफ राइड बुक करने वाले यात्री को अगली बुकिंग में कुछ रियायत दी जाएगी। वहीं अगर राइड बुक करने के बाद यात्री उसको रद करता है है तो उससे किराये का दस प्रतिशत या अधिकतर सौ रुपये तक वसूली अगली बुकिंग में की जाएगी। इसी तरह के तमाम प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं। विभाग ने इस पर आम जनता और संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।

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लाइसेंस अनिवार्य, पांच लाख शुल्क

प्रस्तावित नियमावली के मुताबिक, राज्य में संचालित सभी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म, डिलीवरी सेवा प्रदाता और ई-कॉमर्स से जुड़ी परिवहन सेवाओं को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। इसके लिए कंपनियों को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ 25 हजार रुपये आवेदन शुल्क और पांच लाख रुपये लाइसेंस शुल्क देना होगा। इसके अलावा वाहनों की संख्या के आधार पर 10 लाख से 50 लाख रुपये तक की सुरक्षा जमा राशि भी जमा करनी पड़ेगी। लाइसेंस की वैधता पांच वर्ष प्रस्तावित है।

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दस लाख का दुर्घटना बीमा कवर

नियमावली में यात्रियों और चालकों की सुरक्षा को भी अनिवार्य प्रावधानों में शामिल किया गया है। कंपनियों को यात्रियों के लिए कम से कम पांच लाख रुपये का बीमा कवर देना होगा। वहीं ड्राइवरों के लिए पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और दस लाख रुपये का दुर्घटना बीमा कवर सुनिश्चित करना होगा। वहीं ड्राइवरों के चयन के लिए आधार सत्यापन, पुलिस चरित्र सत्यापन और न्यूनतम दो वर्ष का ड्राइविंग अनुभव अनिवार्य किया गया है। साथ ही प्लेटफॉर्म से जोड़ने से पहले 40 घंटे का प्रशिक्षण भी देना होगा।

ये भी प्रावधान

नियमों के अनुसार प्लेटफॉर्म पर शामिल वाहनों के लिए वैध पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, प्रदूषण प्रमाणपत्र और जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था अनिवार्य होगी। 12 वर्ष से अधिक पुराने वाहनों को प्लेटफॉर्म पर शामिल करने की अनुमति नहीं होगी। परिवहन विभाग का कहना है कि नई नियमावली से सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और यात्रियों की सुरक्षा मजबूत होगी।
 

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