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UP Cabinet: नई तबादला नीति मंजूरी, 50 हजार मानदेय मिलेगा, ये फिल्में हुईं टैक्स फ्री; पढ़ें 29 अहम फैसले

Mon, 04 May 2026 07:02 PM IST
Akash Dwivedi डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: Akash Dwivedi Updated Mon, 04 May 2026 07:02 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 29 प्रस्ताव मंजूर हुए। नई तबादला नीति लागू होगी, सोलर प्लांट स्थापित किया जाएगा और सीएम फेलोशिप शुरू होगी। पढ़े 29 अहम फैसले...

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UP Cabinet New Transfer Policy Approved; 'One District, One Scheme' Cleared; Honorarium Set at ₹50,000 — Read
योगी कैबिनेट के फैसले। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

लखनऊ में सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई। इसमें कुल 29 प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें रोजगार, शिक्षा, उद्योग और पर्यावरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले शामिल हैं। अब 16 लाख कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादले 5 से 31 मई तक किए जाएंगे।

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योगी कैबिनेट ने सोमवार को 2026-27 के लिए तबादला नीति को मंजूरी दी। एक जनपद, एक व्यंजन योजना को स्वीकृति मिल गई। इसके अलावा जालौन में 500 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित होगा। दो-दो सीएम फैलो तैनात होंगे। एक आर्थिक क्षेत्र और दूसरा डेटा एनालिसिस में जानकार होगा। 50 हजार मानदेय, 10 हजार आवास भत्ता और लैपटाप दिया जाएगा। विस्तार से पढ़ें कैबिनेट के 29 फैसले...

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दो फिल्में टैक्स फ्री घोषित

कैबिनेट ने आरएसएस से संबंधित फिल्म ‘शतक-राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के 100 वर्ष’ और ‘गोदान’ को टैक्स फ्री करने से संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इन दोनों फिल्मों को दर्शकों द्वारा प्रवेश के लिए देय जीएसटी के समतुल्य धनराशि की प्रतिपूर्ति की जाएगी।

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योगी कैबिनेट की बैठक में फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

फिरोजाबाद में अमरदीप विश्वविद्यालय की स्थापना को हरी झंडी

प्रदेश सरकार ने एक और निजी विश्वविद्यालय की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत कैबिनेट ने फिरोजाबाद में अमरदीप मेमोरियल ट्रस्ट को स्थापना के लिए आशय पत्र जारी करने पर सहमति दी है। फिरोजाबाद के पचवान गांव में 20.08 एकड़ भूमि पर विश्वविद्यालय की स्थापना होगी।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कैबिनेट निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार का लक्ष्य उच्च शिक्षा को अंतिम पायदान तक सरल, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाना है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हर जिले में उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार हो, जिससे विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में बेहतर शैक्षणिक अवसर प्राप्त हो सकें।

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 व उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना) नियमावली 2021 के तहत प्राप्त प्रस्तावों का मूल्यांकन उच्च स्तरीय समिति ने करके आशय पत्र जारी करने का निर्णय लिया है। समिति की संस्तुति के बाद सरकार द्वारा आशय पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है। इससे विश्वविद्यालय स्थापना की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।

किसानों को मिलेगा टावर और विद्युत लाइन का मुआवजा

ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया, प्रदेश में किसानों के खेतों से 765, 490, 220 और 132 केवी की हाईटेंशन लाइनें बिछाई जाती हैं। बड़े-बड़े विद्युत टावर भी लगाए जाते हैं। 2018 से पहले खेतों से होकर निकलने वाली विद्युत लाइनों और टावरों के लिए मुआवजा का प्रावधान नहीं था।

लेकिन 2018 में इसका प्रावधान किया गया, लेकिन उस प्रावधान में मुआवजा राशि बहुत कम होने से किसान संतुष्ट नहीं थे। इसके चलते खेतों में विद्युत लाइन निकालने और टावर लगाने में परेशानी आती थी।
सरकार ने अब मुआवजा राशि बढ़ाने का प्रावधान किया है।

खेत में जिस स्थान पर विद्युत टॉवर लगाया जाएगा, उसके एक मीटर की परिधि में स्थित जमीन का किसान को सर्किल रेट से दोगुना मुआवजा दिया जाएगा। खेत से होकर विद्युत लाइन बिछाने पर भूमि की कीमत का 30 फीसदी तक मुआवजा दिया जाएगा।

अब यूपी के स्वाद की होगी अंतर्राष्ट्रीय ब्रांडिंग, 75 जिलों के पारंपरिक पकवानों को मिलेगा वैश्विक बाजार

प्रदेश सरकार अब प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को संगठित पहचान और बड़ा बाजार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ओडीओपी) की तर्ज पर ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना लागू की जा रही है, जिसके तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के विशिष्ट व्यंजनों को चिन्हित कर उन्हें ब्रांड, पैकेजिंग और गुणवत्ता के मानकों के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाएगा। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी।

कैबिनेट मंजूरी के बाद एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि हर जिले की सांस्कृतिक पहचान बने इन व्यंजनों को संरक्षित करने के साथ उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने, पैकेजिंग को आधुनिक बनाने और उत्पादन को मानकीकृत करने पर फोकस रहेगा। योजना का मकसद स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों, लघु उद्यमियों और महिला समूहों को सीधा लाभ पहुंचाते हुए उनकी आय में वृद्धि करना है।

 

पारंपरिक स्वाद को मिलेगा नया आयाम

प्रदेश के अलग-अलग जिलों के व्यंजन पहले से ही अपनी अलग पहचान रखते हैं। आगरा का पेठा, मथुरा का पेड़ा, मेरठ की गजक, जौनपुर की इमरती, गोरखपुर का लिट्टी-चोखा और वाराणसी की कचौड़ी जैसे व्यंजन दशकों से लोगों की पसंद बने हुए हैं। योजना के तहत इन व्यंजनों को न सिर्फ संरक्षित किया जाएगा, बल्कि डिजाइन, तकनीक, गुणवत्ता, ब्रांडिंग और पैकेजिंग में व्यापक सुधार कर इन्हें बड़े बाजार से जोड़ा जाएगा।

मंडलवार और जनपदवार व्यंजनों की विस्तृत सूची

आगरा मंडल: पेठा, नमकीन दालमोट, गजक, आगरा का पराठा
अलीगढ़ मंडल: कलाकंद, खुरचन, सोहन पापड़ी अयोध्या मंडल: चंद्रकला, पेड़ा, खीर, बालूशाही

आजमगढ़ मंडल: तहरी, सत्तू आधारित उत्पाद, लिट्टी-चोखा
बरेली मंडल: बर्फी, सेवइयां, खुरचन, चाट

बस्ती मंडल: ठेकुआ, पूरी-सब्जी, खीर
चित्रकूट मंडल: सोहन हलवा, बालूशाही

इसी तरह मिर्जापुर में लाल पेड़ा और गुलाब जामुन, मुरादाबाद में दाल और हब्शी हलवा, प्रयागराज में बेदमी पूरी और कचौड़ी, वाराणसी में तिरंगा बर्फी, बनारसी पान और कचौड़ी, सहारनपुर मंडल में गुड़ व शहद आधारित उत्पादों को प्रमुखता दी गई है।


 

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कैबिनेट बैठक में - फोटो : amar ujala

ब्रांडिंग से लेकर बाजार तक पूरी चेन पर काम

राकेश सचान ने बताया कि योजना के तहत चयनित व्यंजनों के लिए अलग-अलग ‘लोगो’ विकसित किए जाएंगे, जिससे उनकी ब्रांड पहचान बने। साथ ही आधुनिक पैकेजिंग और लेबलिंग गुणवत्ता का मानकीकरण, शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उपाय, फूड सेफ्टी मानकों का पालन जैसे

पहलुओं पर विशेषज्ञ संस्थाओं की मदद से काम किया जाएगा। योजना के जरिए कारीगरों और छोटे उद्यमियों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे आधुनिक उत्पादन तकनीकों को अपनाकर प्रतिस्पर्धी बन सकें। इसके अलावा वित्त पोषण, आसान ऋण सुविधा और विपणन सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को भी इससे जोड़ा जाएगा।

 

मेले-प्रदर्शनियों में मिलेगा बड़ा मंच

इन व्यंजनों को राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फूड फेस्टिवल, एक्सपो और प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया जाएगा। इससे न सिर्फ उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि यूपी के पारंपरिक व्यंजन ‘ब्रांड यूपी’ के रूप में स्थापित हों।

ईमेल, मोबाइल, मैसेजिंग एप के जरिए भेजे जा सकेंगे समन

कैबिनेट ने तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत तीन नियमों की गाइडलाइन को मंजूरी दी। भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ई-साक्ष्य, ई-समन और सामुदायिक सेवा से संबंधित मॉडल नियम (गाइडलाइन) इलाहाबाद हाईकोर्ट की सहमति से तैयार की गई है। इन नियमों के प्रभावी होने से समन ईमेल, मोबाइल और मैसेजिंग एप के जरिए भेजे जा सकेंगे।

उत्तर प्रदेश ई-साक्ष्य प्रबंधन नियम 2026 के जरिये डिजिटल साक्ष्यों के संकलन, संरक्षण और न्यायालय में प्रस्तुत करने की एक वैज्ञानिक एवं मानकीकरण व्यवस्था स्थापित की गई है। इससे साक्ष्यों की अखंडता (एंटिग्रिटी) और चेन ऑफ कस्टडी सुनिश्चित की जा सकेगी। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रानिक आदेशिका (ई-समन) नियम, 2026 के तहत समन एवं वारंट इलेक्ट्रानिक तरीके से जारी हो सकेंगे। ईमेल, मोबाइल और मैसेजिंग एप के जरिए उनका तामीला कराया जा सकेगा। 

इससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। इसमें महिलाओं और बच्चों से संबंधित मामलों में पीड़ित की पहचान गोपनीय रखने का विशेष प्रावधान भी किया गया है। वहीं उत्तर प्रदेश सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस, 2026 के अंतर्गत छोटे अपराधों के लिए कारावास के विकल्प के रूप में 'सामुदायिक सेवा' को सुधारात्मक दंड के रूप में लागू किया गया है। इससे अपराधियों के पुनर्वास को प्रोत्साहन मिलेगा तथा कारागारों के भार में कमी आएगी। इसके अंतर्गत स्वच्छता, पौधरोपण, गौ-सेवा, यातायात प्रबंधन आदि सार्वजनिक कार्यों में सहभागिता का प्रावधान किया गया है।
 

यूपी में 31 मई तक होंगे सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों के तबादले

उत्तर प्रदेश में सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादले 31 मई तक किए जाएंगे। इसके लिए सोमवार को सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई। जिले में 3 साल और मंडल में 7 साल पूरे कर चुके अधिकारी और कर्मचारी स्थानांतरित किए जाएंगे।

कैबिनेट से पास प्रस्ताव में कहा गया है कि यह स्थानांतरण नीति वर्ष 2026-27 के लिए है। समूह क व ख के ऐसे अधिकारी जो अपने सेवाकाल में किसी जिले में 3 वर्ष पूरे कर चुके हैं, उनका तबादला किया जाएगा। मंडल में तैनाती की यह अवधि 7 वर्ष की होगी। विभागाध्यक्ष और मंडलीय कार्यालयों में की गई तैनाती की अवधि को इस समयसीमा में नहीं गिना जाएगा।

मंडलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम सीमा तीन वर्ष होगी और इसके लिए सर्वाधिक समय से कार्यरत अधिकारियों के स्थानांतरण प्राथमिकता के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गई है। समूह क व ख के स्थानांतरण संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत और समूह ग व घ के कार्मिकों के स्थानांतरण संवर्गवार कुल कार्यरत कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10 प्रतिशत सीमा तक किए जा सकेंगे।

समूह ग के लिए पटल परिवर्तन व क्षेत्र परिवर्तन के संबंध में 13 मई 2022 के शासनादेश के अनुसार व्यवस्था इस बार भी लागू रहेगी। समूह ख व ग के कार्मिकों के स्थानांतरण यथासंभव मेरिट आधारित ट्रांसफर सिस्टम के आधार पर किए जाने की व्यवस्था की गई है।

दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को प्राथमिकता

मंदित बच्चों व चलने-फिरने में असमर्थ दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती विकल्प प्राप्त करके ऐसे स्थान पर किए जाने की व्यवस्था की गई है, जहां उसकी उचित देखभाल व चिकित्सा की समुचित व्यवस्था हो। केंद्र सरकार से घोषित 8 आकांक्षी जिलों और 34 जिलों के 100 आकांक्षी विकास खंडों में में तैनाती संतृप्त किए जाने की व्यवस्था की गई है।

स्थानांतरण सत्र के बाद सीएम की अनुमति अनिवार्य

स्थानांतरण सत्र के बाद समूह क व ख के तबादले विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री के अनुमोदन से ही हो सकेंगे।


 

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वित्त मंत्री सुरेश खन्ना - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

चार कताई मिलों की जमीन पर विकसित होंगे संत कबीर टेक्सटाइल पार्क

संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना के तहत प्रदेश में 10 टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी में टेक्सटाइल पार्क की का काम शुरू हो चुका है। इसके अलावा अमरोहा, बहेड़ी (बरेली), मगहर ( संत कबीर नगर) और नगीना (बिजनौर) में टेक्सटाइल पार्क विकसित होंगे। इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।

इस संबंध में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि प्रस्ताव के माध्यम से चार कताई मिलों की कुल 251.80 एकड़ जमीन पर टेक्सटाइल पार्क विकसित होंगे। इसमें सहकारी कताई मिल्स अमरोहा की 79.82 एकड़ जमीन, बहेड़ी (बरेली) की 79.58 एकड़ जमीन, मगहर (संत कबीर नगर) की 39.49 एकड़ और नगीना (बिजनौर) की 52.91 एकड़ जमीन पर टेक्सटाइल पार्क का विकास किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ये जमीनें बंधमुक्त और विवाद रहित हैं। इन पर किसी का कोई अतिक्रमण नहीं है। सभी कर्मचारियों को भी अधिकतम देयों का भुगतान किया जा चुका है। ये टेक्सटाइल पार्क पीपीपी मोड पर विकसित किए जाएंगे। इसे लेकर मास्टर डेवलपर्स के चयन के लिए एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट (ईओआई) निकाला गया था, जिसमें 10 निवेशकों द्वारा पार्क विकसित करने की रुचि दिखाई गई थी।

इन जमीनों के सापेक्ष टेक्सटाइल क्षेत्र के निवेशकों की रुचि का भी अध्ययन किया गया था। नगीना में 76 निवेशकों ने 49 एकड़ जमीन की मांग की है। इसी प्रकार अमरोहा, बहेड़ी, मगहर में भी निवेशकों ने जमीन मांगी है।


 

माध्यमिक के छात्र एआई, रोबोटिक्स, डिजाइन में होंगे दक्ष

प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा नौ से 12 के छात्र डिजाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैनुफेक्चरिंग, एआई, ई-व्हीकल आदि क्षेत्रों से जुड़ी न सिर्फ पढ़ाई करेंगे। बल्कि इस क्षेत्र का अत्याधुनिक लैब के माध्यम से प्रशिक्षण भी लेंगे। इसके लिए टाटा के नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट लिमिटेड (टाटा) की ओर से प्रदेश के 150 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में ड्रीम स्किल लैब स्थापित की जाएगी।

प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग व नेल्को नेटवर्क के बीच मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट (एमओए) करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति दी। योजना के तहत पहले चरण में प्रदेश के 18 राजकीय माध्यमिक विद्यालय एक हब के रूप में विकसित किए जाएंगे। यहां पर नेल्को नेटवर्क की ओर से अत्याधुनिक क्षेत्र से जुड़ी मशीनें लगाई जाएंगी। साथ ही प्रशिक्षक भी तैनात किए जाएंगे।

इन प्रत्येक विद्यालय से तीन-तीन विद्यालय स्पोक मॉडल में जुड़ेंगे। इस तरह पहले चरण में 75 और दूसरे चरण में 75 कुल 150 विद्यालय में यह अत्याधुनिक लैब स्थापित की जाएगी। इसमें लगभग 12 हजार छात्र लाभांवित होंगे। योजना पर कुल 14 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसमें 68 फीसदी खर्च नेल्को नेटवर्क व 32 फीसदी प्रदेश सरकार वहन करेगी। इतना ही नहीं नेल्को द्वारा पांच साल तक प्रशिक्षकों को भी मानदेय खुद ही दिया जाएगा।

ड्रीम स्किल लैब में छात्रों को वर्तमान व भविष्य की तकनीकी व औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल व व्यक्तित्व विकास किया जाएगा। साथ ही अत्याधुनिक मशीनों के माध्यम से प्रशिक्षण भी प्राप्त करेंगे। इससे उनको सरकारी व निजी क्षेत्र की कंपनियों में बेहतर प्लेसमेंट, सेवायोजन व रोजगार के अवसर मिलेंगे। बता दें कि विभाग ने इस सत्र से पाठ्यक्रम में व्यावसायिक शिक्षा को भी शामिल किया है।



 

भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रथम अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी

प्रदेश में सांस्कृतिक शिक्षा को अब और रफ्तार मिलेगी। प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रथम अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी है। इससे प्रदेश में कला, संगीत और संस्कृति से जुड़ी शिक्षा और शोध को व्यवस्थित करने में और सहयोग मिलेगा।

इसका उद्देश्य प्रदेश में सांस्कृतिक शिक्षा के लिए एक सशक्त और संगठित ढांचा तैयार करना है। जब तक विश्वविद्यालय के स्थायी नियम लागू नहीं हो जाते, तब तक यह अध्यादेश उसके कामकाज को सुचारू रूप से संचालित करने में मदद करेगा। अध्यादेश लागू होने के बाद विश्वविद्यालय को शैक्षणिक और प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण अधिकार मिलेंगे।

इसमें छात्रों के प्रवेश, पाठ्यक्रम निर्धारण, परीक्षाओं का संचालन, डिग्री और डिप्लोमा देने की प्रक्रिया, छात्रवृत्ति और अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा सकेगा। इससे छात्रों को बेहतर और पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।

पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि सरकार की योजना इस विश्वविद्यालय को एक प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान के रूप में विकसित करने की है। यह संस्थान न केवल शास्त्रीय संगीत और प्रदर्शन कलाओं में प्रशिक्षण देगा, बल्कि शोध के माध्यम से प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने का कार्य भी करेगा। इससे प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को नया मंच और पहचान मिलने की उम्मीद है।
 

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