{"_id":"5d11c8038ebc3e130a160e59","slug":"up-cabinet-approves-six-decisions","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कैबिनेट ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए बैंक से लोन लेने को दी मंजूरी, छह फैसलों पर लगाई मुहर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैबिनेट ने पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए बैंक से लोन लेने को दी मंजूरी, छह फैसलों पर लगाई मुहर
Tue, 25 Jun 2019 10:17 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 25 Jun 2019 10:17 PM IST
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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : amar ujala
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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए कार्पोरेशन बैंक से ऋण लेने सहित कुल छह फैसलों को मंजूरी दी गई। बैठक में पीएम आवास योजना-ग्रामीण की तरह मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण की धनराशि सीधे राज्य स्तर से लाभार्थियों के खाते में भेजने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई।
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मुख्यमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को अब जल्दी मिलेगा पैसा
योगी कैबिनेट ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की तरह मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की रकम पीएफ एमएस लिंक्ड स्टेट नोडल अकाउंट से सीधे लाभार्थी के खाते में भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इससे लाभार्थियों को जल्दी पैसा मिल सकेगा और आवास निर्माण के काम में तेजी आएगी।
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राज्य सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि इसके लिए कैबिनेट ने योजना के वर्तमान वित्तीय प्रबंधन प्रावधान में संशोधन किया है। संशोधन से लाभार्थियों के खाते में धन भेजने में होने वाली प्रक्रियात्मक देरी से बचा जा सकेगा और लाभार्थियों को जल्दी पैसा मिल सकेगा। इससे आवासों का निर्माण समय से पूर्ण हो सकेगा। अब तक राज्य से जिले के खाते में रकम जाती थी और जिले स्तर से लाभार्थी के खाते में भेजा जाता था। लाभार्थियों की सूची बीडीओ व लेखाकार के माध्यम से तैयार की जाएगी।
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पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के लिए कॉर्पोरेशन बैंक से मिला 1000 करोड़ का ऋण
प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना को रफ्तार देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसमें कॉर्पोरेशन बैंक को पीएनबी कंसोर्टियम में शामिल करने व उसके द्वारा दिए गए 1000 करोड़ रुपये ऋण का अनुमोदन भी शामिल है। अब कंसोर्टियम में नए बैंक को शामिल करने के लिए कैबिनेट नहीं जाना होगा। इसके लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया गया है।
यूपी एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेने के लिए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का एक कंसोर्टियम बनाया था। इससे 12 हजार करोड़ रुपये तक ऋण लिया जा सकता है। लेकिन कंसोर्टियम में नए बैंक को शामिल करने के लिए वर्तमान में कैबिनेट की मंजूरी जरूरी थी। कैबिनेट ने अब भविष्य में कंसोर्टियम में 12,000 करोड़ रुपए की ऋण सीमा तक किसी भी नए पब्लिक सेक्टर बैंक को शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया। मुख्यमंत्री वित्त विभाग के परामर्श से अनुपूरक गारंटी भी स्वीकृत कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया में देरी नहीं होगी।
यूपी एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे परियोजना के लिए वित्तीय संस्थाओं से ऋण लेने के लिए पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का एक कंसोर्टियम बनाया था। इससे 12 हजार करोड़ रुपये तक ऋण लिया जा सकता है। लेकिन कंसोर्टियम में नए बैंक को शामिल करने के लिए वर्तमान में कैबिनेट की मंजूरी जरूरी थी। कैबिनेट ने अब भविष्य में कंसोर्टियम में 12,000 करोड़ रुपए की ऋण सीमा तक किसी भी नए पब्लिक सेक्टर बैंक को शामिल करने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया। मुख्यमंत्री वित्त विभाग के परामर्श से अनुपूरक गारंटी भी स्वीकृत कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया में देरी नहीं होगी।
सरकारी प्रचार सामग्री की प्राइवेट प्रिंटर्स से भी छपाई का रास्ता खुला
प्रदेश सरकार जनहित की योजनाओं, विकास कार्यक्रमों, निर्णयों व उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए प्रचार सामग्री की छपाई सरकारी प्रेस के साथ ही प्राइवेट प्रेस से भी करा सकेगी। प्रदेश कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
सूचना विभाग समय-समय पर पुस्तिकाएं, फ ोल्डर, बुकलेट, ब्रोशर, हैंडबिल, एलबम, कैलेंडर व अन्य प्रचार सामग्री का प्रकाशन कराता है। सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में क्षमता कम व अधिक कार्य से कई बार समय पर छपाई नहीं हो पाती है। 10 मार्च 1988 के शासनादेश से छपाई के लिए निजी प्रेसों को भी अधिकृत किया गया था, लेकिन मई 2002 में शासनादेश से यह व्यवस्था खत्म कर दी गई।
सरकारी प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रचार-प्रसार की आवश्यकता, कार्य की तात्कालिकता, मुद्रण तकनीक में आए बदलाव के मद्देनजर विभागीय प्रकाशनों की छपाई के लिए निजी प्रेसों के पंजीकरण संबंधी 2 मई 2002 व 31 मई 2002 के शासनादेश में संशोधन कर कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब ई-टेंडरिंग से सूचना विभाग में प्राइवेट प्रिंटर्स का श्रेणीवार पंजीकरण होगा।
पंजीकरण के लिए पिछले वित्तीय वर्ष का टर्नओवर तय किया गया है। श्रेणी-क के प्रिंटर्स के लिए न्यूनतम टर्नओवर दो करोड़, श्रेणी- ख के लिए एक करोड़ व श्रेणी-ग के लिए न्यूनतम टर्नओवर पचास लाख रुपये निर्धारित किया गया है। हालांकि प्रिंटिंग कार्य में सरकारी प्रेसों को प्राथमिकता दी जाएगी। पंजीकरण के लिए मुद्रक का ईएसआई, ईपीएफ तथा फैक्ट्री एक्ट व जीएसटी में पंजीकरण होना जरूरी है। कैबिनेट ने इस व्यवस्था में भविष्य में किसी भी प्रकार के संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया है।
सूचना विभाग समय-समय पर पुस्तिकाएं, फ ोल्डर, बुकलेट, ब्रोशर, हैंडबिल, एलबम, कैलेंडर व अन्य प्रचार सामग्री का प्रकाशन कराता है। सरकारी प्रिंटिंग प्रेस में क्षमता कम व अधिक कार्य से कई बार समय पर छपाई नहीं हो पाती है। 10 मार्च 1988 के शासनादेश से छपाई के लिए निजी प्रेसों को भी अधिकृत किया गया था, लेकिन मई 2002 में शासनादेश से यह व्यवस्था खत्म कर दी गई।
सरकारी प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रचार-प्रसार की आवश्यकता, कार्य की तात्कालिकता, मुद्रण तकनीक में आए बदलाव के मद्देनजर विभागीय प्रकाशनों की छपाई के लिए निजी प्रेसों के पंजीकरण संबंधी 2 मई 2002 व 31 मई 2002 के शासनादेश में संशोधन कर कुछ नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब ई-टेंडरिंग से सूचना विभाग में प्राइवेट प्रिंटर्स का श्रेणीवार पंजीकरण होगा।
पंजीकरण के लिए पिछले वित्तीय वर्ष का टर्नओवर तय किया गया है। श्रेणी-क के प्रिंटर्स के लिए न्यूनतम टर्नओवर दो करोड़, श्रेणी- ख के लिए एक करोड़ व श्रेणी-ग के लिए न्यूनतम टर्नओवर पचास लाख रुपये निर्धारित किया गया है। हालांकि प्रिंटिंग कार्य में सरकारी प्रेसों को प्राथमिकता दी जाएगी। पंजीकरण के लिए मुद्रक का ईएसआई, ईपीएफ तथा फैक्ट्री एक्ट व जीएसटी में पंजीकरण होना जरूरी है। कैबिनेट ने इस व्यवस्था में भविष्य में किसी भी प्रकार के संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में मल्टीलेवल पार्किंग व एडवोकेट चैंबर्स का होगा निर्माण
प्रदेश कैबिनेट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में मल्टी लेवल पार्किंग व एडवोकेट चैंबर के निर्माण व उसमें उच्च विशिष्टियों के प्रयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये काम हाईकोर्ट में दाखिल पीआईएल पर बीती 10 मई को दिए गए आदेश के मद्देनजर कराए जाएंगे।
प्रदेश सरकार ने मल्टी लेवल पार्किंग, एडवोकेट चैंबर व रिकॉर्ड रूम के निर्माण की विशिष्टियों के लिए पीडब्ल्यूडी को कार्यदायी संस्था नामित किया है। जिस भूमि पर मल्टीलेवल पार्किंग व एडवोकेट चैंबर का निर्माण प्रस्तावित है, वह विवाद रहित है। निर्माण कार्य ईपीसी मोड पर होगा।
व्यय वित्त समिति ने 13 जून की बैठक में इसके लिए प्रस्तावित लागत 536.06 करोड़ रुपये की तुलना में 530.07 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। इसमें उच्च विशिष्टियों के तहत फ ाल्स सीलिंग (897.98 लाख रुपये) स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग (159.70 लाख रुपये), ग्रेनाइट फेसिया इन लिफ्ट एरिया (16.53 लाख रुपये) का प्रयोग होगा। कैबिनेट ने इस परियोजना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन या संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
कॉन्फ्रेंस हॉल, वीआईपी सुइट्स और म्यूजियम भी बनेगा
कैबिनेट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए थार्नहिल रोड प्रयागराज में कॉन्फ्रेंस हॉल, दो वीआईपी सुइट्स व एक म्यूजियम के निर्माण व इसमें उच्च विशिष्टियों के प्रयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये कार्य भी पीआईएल में पारित 10 मई के आदेश के मद्देनजर होंगे। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इन कार्यों के लिए सीएंडडीएस जल निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। व्यय वित्त समिति ने 53.91 लाख रुपये की प्रस्तावित इस परियोजना के लिए 45 करोड़ 99 लाख 88 हजार रुपये क़ी मंजूरी दी है। कैबिनेट ने परियोजना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन पर निर्णय के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
प्रदेश सरकार ने मल्टी लेवल पार्किंग, एडवोकेट चैंबर व रिकॉर्ड रूम के निर्माण की विशिष्टियों के लिए पीडब्ल्यूडी को कार्यदायी संस्था नामित किया है। जिस भूमि पर मल्टीलेवल पार्किंग व एडवोकेट चैंबर का निर्माण प्रस्तावित है, वह विवाद रहित है। निर्माण कार्य ईपीसी मोड पर होगा।
व्यय वित्त समिति ने 13 जून की बैठक में इसके लिए प्रस्तावित लागत 536.06 करोड़ रुपये की तुलना में 530.07 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। कैबिनेट ने इसे मंजूरी दे दी है। इसमें उच्च विशिष्टियों के तहत फ ाल्स सीलिंग (897.98 लाख रुपये) स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग (159.70 लाख रुपये), ग्रेनाइट फेसिया इन लिफ्ट एरिया (16.53 लाख रुपये) का प्रयोग होगा। कैबिनेट ने इस परियोजना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन या संशोधन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
कॉन्फ्रेंस हॉल, वीआईपी सुइट्स और म्यूजियम भी बनेगा
कैबिनेट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लिए थार्नहिल रोड प्रयागराज में कॉन्फ्रेंस हॉल, दो वीआईपी सुइट्स व एक म्यूजियम के निर्माण व इसमें उच्च विशिष्टियों के प्रयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये कार्य भी पीआईएल में पारित 10 मई के आदेश के मद्देनजर होंगे। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इन कार्यों के लिए सीएंडडीएस जल निगम को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। व्यय वित्त समिति ने 53.91 लाख रुपये की प्रस्तावित इस परियोजना के लिए 45 करोड़ 99 लाख 88 हजार रुपये क़ी मंजूरी दी है। कैबिनेट ने परियोजना में किसी भी प्रकार के परिवर्तन पर निर्णय के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।
50 हजार तक की अपील, 25 लाख तक के रिवीजन जिला न्यायालय में ही होंगे
राज्य सरकार ने मुकदमों के तेज निस्तारण व सुलह-समझौते से वाद समाधान की व्यवस्था को गति देने के लिए सिविल विधि (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2019 के मसौदे को मंजूरी दे दी। अब 50 हजार तक की मालियत की अपील और 25 लाख रुपये से कम की मालियत वाले मामलों में रिवीजन जिला न्यायाधीश कोर्ट में ही हो सकेगी। इसके अलावा मध्यस्थता से जुड़े मामलों की सुनवाई जिला जज के साथ अपर जिला न्यायाधीश भी करेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सिविल विधि (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2019 के माध्यम से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 102 व 115 में तथा माध्यस्थम और सुलह अधिनियम-1996 की धारा-2(ङ) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा-102 के अंतर्गत वर्तमान में 25 हजार रुपये तक की मालियत वाले मामलों में द्वितीय अपील (उच्च न्यायालय में) नहीं की जा सकती है। अब 50 हजार रुपये तक की अपील उच्च न्यायालय में नहीं की जा सकेगी। प्रथम अपील जिला जज के न्यायालय में होती है।
अब 50 हजार रुपये तक की अपील जिला जज ही सुन सकेंगे। इसी तरह संहिता की धारा-115 के अनुसार उच्च न्यायालय वर्तमान में पांच लाख रुपये या इससे अधिक मालियत वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई कर सकता है। अब यह सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी जाएगी। संशोधन के बाद हाईकोर्ट 25 लाख रुपये की सीमा से प्रारंभ होने वाले मामलों में रिवीजन की सुनवाई कर सकेगा। यानी 25 लाख रुपये से कम सीमा वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई जिला जज ही कर लेंगे।
इससे बड़ी संख्या में हाईकोर्ट में लंबित वादों की सुनवाई अब जिला न्यायालय में हो सकेगी। इससे 25 लाख रुपये तक के रिवीजन के लिए लोगों को हाईकोर्ट नहीं जाना पडे़गा। जिला न्यायालय में ही सुनवाई से खर्च बचेगा और जल्दी न्याय मिल सकेगा। इससे वादों के निस्तारण में तेजी आएगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सिविल विधि (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक-2019 के माध्यम से सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 102 व 115 में तथा माध्यस्थम और सुलह अधिनियम-1996 की धारा-2(ङ) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा-102 के अंतर्गत वर्तमान में 25 हजार रुपये तक की मालियत वाले मामलों में द्वितीय अपील (उच्च न्यायालय में) नहीं की जा सकती है। अब 50 हजार रुपये तक की अपील उच्च न्यायालय में नहीं की जा सकेगी। प्रथम अपील जिला जज के न्यायालय में होती है।
अब 50 हजार रुपये तक की अपील जिला जज ही सुन सकेंगे। इसी तरह संहिता की धारा-115 के अनुसार उच्च न्यायालय वर्तमान में पांच लाख रुपये या इससे अधिक मालियत वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई कर सकता है। अब यह सीमा बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी जाएगी। संशोधन के बाद हाईकोर्ट 25 लाख रुपये की सीमा से प्रारंभ होने वाले मामलों में रिवीजन की सुनवाई कर सकेगा। यानी 25 लाख रुपये से कम सीमा वाले मामलों के रिवीजन की सुनवाई जिला जज ही कर लेंगे।
इससे बड़ी संख्या में हाईकोर्ट में लंबित वादों की सुनवाई अब जिला न्यायालय में हो सकेगी। इससे 25 लाख रुपये तक के रिवीजन के लिए लोगों को हाईकोर्ट नहीं जाना पडे़गा। जिला न्यायालय में ही सुनवाई से खर्च बचेगा और जल्दी न्याय मिल सकेगा। इससे वादों के निस्तारण में तेजी आएगी।