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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP by-election: Big test for allies hidden in Yogi's challenge, hence Chief Minister does not want to make eve

यूपी उपचुनाव: योगी की चुनौती में छिपी सहयोगियों की बड़ी परीक्षा, इसलिए रत्तीभर चूक नहीं करना चाहते हैं सीएम

Mon, 19 Aug 2024 07:51 AM IST
रोहित मिश्र सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Mon, 19 Aug 2024 07:51 AM IST
सार

UP by-election: मिल्कीपुर और कटेहरी उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। वह इन सीटों पर रत्तीभर चूक नहीं करना चाहते हैं। 

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UP by-election: Big test for allies hidden in Yogi's challenge, hence Chief Minister does not want to make eve
सीएम के साथ दोनों डिप्टी सीएम की परीक्षा। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हर सप्ताह अयोध्या का दौरा। दौरे में संतों के साथ बातचीत में लोकसभा चुनाव में फैजाबाद (अयोध्या) सीट पर भाजपा की पराजय के उलाहना देना बताता है कि यहां विधानसभा की मिल्कीपुर सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री रत्तीभर भी चूक नहीं करना चाहते हैं। एक तरह से उन्होंने मिल्कीपुर और अंबेडकरनगर की कटेहरी सीट पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दिया है। गहराई से नजर डालें तो इन सीटों पर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने की चुनौती को लेकर मुख्यमंत्री ने खुद से ज्यादा अपने दो सहयोगी उप मुख्यमंत्रियों की कड़ी परीक्षा की चौसर सजा दी है।

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वैसे तो विधानसभा की 10 सीटों पर होने वाले उपचुनाव की औपचारिक घोषणा अभी तक नहीं हुई है। पर, इनमें सपा विधायक अवधेश प्रसाद के फैजाबाद (अयोध्या) के सांसद चुने जाने से खाली हुई मिल्कीपुर और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के सांसद चुने जाने से रिक्त हुई मैनपुरी की करहल सीट पर चुनाव जीतना भाजपा के लिए खास मायने रखता है। सत्तारूढ़ दल भाजपा की कोशिश है कि मिल्कीपुर और करहल में सपा को पराजित कर न सिर्फ इंडी गठबंधन की मनोवैज्ञानिक बढ़त पर विराम लगाया जाए बल्कि अयोध्या सीट पर हार के बहाने पूरे देश में विपक्ष की तरफ से हिंदुत्व के एजेंडा के फेल होने के प्रचार का भी जवाब दिया जाए।
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वैसे तो मुख्यमंत्री ने लगभग एक महीने पहले ही इन सभी दस सीटों के चुनाव के लिए 30 मंत्रियों की फौज उतारकर यह संदेश दे दिया था कि उपचुनाव के अखाड़े में वह विपक्ष को काफी कड़ी टक्कर देने का निश्चय कर चुके हैं। पर, उन्होंने जिस तरह मिल्कीपुर और कटेहरी सीट पर भाजपा की जीत के लिए जिम्मेदारी ली है और दूसरी प्रतिष्ठापूर्ण सीटों करहल तथा फूलपुर में जीत के लिए अपने दोनों उप मुख्यमंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी वह गूढ़ निहितार्थ की ओर इशारा करते हैं। 
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ऐसा करके उन्होंने जहां पिछले दिनों सरकार में इन दोनों सहयोगियों से चल रही खटपट की खबरों पर विराम लगाने की कोशिश की है, वहीं कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी उत्साह भरने का प्रयास किया है। यह संदेश देने का भी प्रयास किया है कि लोकसभा चुनाव में अपेक्षित सीटें न मिलने से हताश और निराश होने की जरूरत नहीं है। वह और उनके सहयोगी एकजुट होकर भाजपा की पुरानी प्रतिष्ठा बहाली के लिए संकल्पबद्ध हैं। यही नहीं, ऐसा करके उन्होंने विपक्ष पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है कि लोकसभा चुनाव में भले ही उसे (विपक्ष) बढ़त मिल गई हो, लेकिन उपचुनाव में भाजपा आसानी से उसे सीटें जीतने नहीं देना चाहती है।


परिणाम के बाद तय होंगी नई भूमिकाएं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री ने खुद को दांव पर लगाकर उपचुनाव के नतीजों के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की सियासत में बड़े उलटफेर की पृष्ठभूमि तैयार कर दी है। विश्लेषकों का यह भी अनुमान है कि नतीजों के आधार पर स्वाभाविक रूप से प्रदेश सरकार में शामिल सभी चेहरों की पकड़, पहुंच, लोकप्रियता की समीक्षा होगी। उसी आधार पर नए सिरे से भूमिकाएं भी तय होंगी। इसमें मंत्रिमंडल के पुनर्गठन से लेकर संगठन के ढांचे में बड़े बदलाव तक शामिल है। जाहिर है कि इस कसौटी पर मुख्यमंत्री के साथ दोनों उपमुख्यमंत्रियों के कद और पद भी कसे जाएंगे। जिनके चलते भविष्य के संभावित बड़े बदलाव की संभावनाओं से इन्कार नहीं किया जा सकता।

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