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यूपी का बजट: खर्चों में कंजूसी और कमाई पर फोकस करेगी सरकार, राजकोषीय घाटे में वृद्धि का अनुमान
Wed, 31 Jan 2024 08:07 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Wed, 31 Jan 2024 08:07 PM IST
सार
लोकसभा चुनाव के साल में योगी सरकार-2.0 का दूसरा बजट खर्चों में कटौती और कमाई पर ज्यादा केंद्रित होगा। ऐसा अनुमान जताया जा रहा है।
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यूपी सरकार का बजट। फाइल फोटो
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
योगी सरकार-2.0 का दूसरा बजट खर्चों में कटौती और कमाई पर ज्यादा केंद्रित होगा। राजकोषीय घाटा और उधारी का बोझ घटाया जाएगा। इसके बावजूद राजकोषीय घाटे में भारी वृद्धि का अनुमान है। वित्त वर्ष 23-24 में राजकोषीय घाटा 174 फीसदी का अनुमान है जो नए वित्त वर्ष 24-25 में बढ़कर 186 फीसदी तक हो सकता है।
प्रदेश के बजट में आय और खर्च का संतुलनशौर बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। आगामी वित्त वर्ष में राज्य का स्वयं का कर राजस्व 10.8 फीसदी रहने का अनुमान है तो करेत्तर राजस्व 0.9 फीसदी रहेगा। बचत पर जोर देते हुए राजस्व बचत वर्तमान वित्त वर्ष की तुलना में आगामी वित्त वर्ष में ज्यादा होगा। इसे 2.8 फीसदी से बढ़ाकर 3 फीसदी करने का अनुमान है। वहीं राजकोषीय घाटे में कमी का लक्ष्य रखा गया है। इसे 3.24 फीसदी पर लाने का जोर रहेगा।
उधारी और अन्य दायित्व पर होने वाले खर्च में भी नियंत्रण किया जाएगा। आय का 31 फीसदी हिस्सा इस पर खर्च किया जा सकता है जो वर्तमान वित्त वर्ष की तुलना में करीब एक फीसदी कम होगा। वेतन, पेंशन, ब्याज खर्च में भी कटौती होगी। वर्तमान वित्त वर्ष 52.3 फीसदी की तुलना में आगामी वित्त वर्ष में 51.3 फीसदी रहेगा। राजकोषीय घाटा जरूर 10 फीसदी बढ़ेगा। राजस्व बचत में फोकस किया गया है। जो वर्तमान के 12 फीसदी की तुलना में 12.9 फीसदी हो सकता है।
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प्रदेश के बजट में आय और खर्च का संतुलनशौर बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। आगामी वित्त वर्ष में राज्य का स्वयं का कर राजस्व 10.8 फीसदी रहने का अनुमान है तो करेत्तर राजस्व 0.9 फीसदी रहेगा। बचत पर जोर देते हुए राजस्व बचत वर्तमान वित्त वर्ष की तुलना में आगामी वित्त वर्ष में ज्यादा होगा। इसे 2.8 फीसदी से बढ़ाकर 3 फीसदी करने का अनुमान है। वहीं राजकोषीय घाटे में कमी का लक्ष्य रखा गया है। इसे 3.24 फीसदी पर लाने का जोर रहेगा।
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उधारी और अन्य दायित्व पर होने वाले खर्च में भी नियंत्रण किया जाएगा। आय का 31 फीसदी हिस्सा इस पर खर्च किया जा सकता है जो वर्तमान वित्त वर्ष की तुलना में करीब एक फीसदी कम होगा। वेतन, पेंशन, ब्याज खर्च में भी कटौती होगी। वर्तमान वित्त वर्ष 52.3 फीसदी की तुलना में आगामी वित्त वर्ष में 51.3 फीसदी रहेगा। राजकोषीय घाटा जरूर 10 फीसदी बढ़ेगा। राजस्व बचत में फोकस किया गया है। जो वर्तमान के 12 फीसदी की तुलना में 12.9 फीसदी हो सकता है।
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