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यूपी में अब भी खौफजदा हैं भाजपाई सूरमा

Mon, 12 Jan 2015 12:40 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 12 Jan 2015 12:40 AM IST
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UP BJP is in dilemma over some issue.

तीन साल हो गए हैं। कुशवाहा का परिवार सपा का दामन थाम चुका है। खुद कुशवाहा जेल में है। पर, उनका खौफ भाजपा को अब भी सता रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों को भाजपा में शामिल होने वालों की लंबी सूची में किसी बाबू सिंह के छिपे होने की आशंका सता रही है। रणनीतिकार दुविधा में हैं।

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एक तरफ संगठन का जनाधार बढ़ाने की चुनौती है तो दूसरी तरफ पार्टी का चेहरा साफ सुथरा रखने की चिंता। इसीलिए तय हुआ है कि पार्टी में शामिल होने वालों की पूरी कुंडली बांचकर उसे लेने या न लेने पर फैसला किया जाएगा। यह कुंडली तीन स्तरों पर बांची जाएगी।
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लोकसभा चुनाव के बाद दूसरे दलों के लोगों में भाजपा के प्रति आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। उन्हें दिख रहा है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का सहारा लेकर विधायक बनना ज्यादा आसान है।
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कोई अपनी पार्टी छोड़ भाजपा से जुड़कर अपना भविष्य संवारना चाहता है तो कोई राजनीति की पारी ही भगवा दल के साथ शुरू करने की इच्छा पाले है। कुछ ऐसे भी भाजपा में जाने का सपना देख रहे हैं जिनके चेहरे समाज की नजर में दागदार माने जा रहे हैं। शायद इसीलिए रणनीतिकारों को पार्टी में इंट्री पर पहरा लगाना पड़ा है।

केंद्रीय नेतृत्व से हरी झंडी के बाद फैसला

UP BJP is in dilemma over some issue.

पिछले दिनों बहराइच में सपा के पूर्व विधायक और दागी छवि के माने जाने वाले दिलीप वर्मा ने एक दिन अचानक भाजपा में शामिल हो जाने की घोषणा कर दी। उससे पहले पश्चिम से बसपा के विधायक रहे एक सज्जन के भाजपा में शामिल होने के ऐलान ने स्थानीय कार्यकर्ताओं को सन्नाटे में डाल दिया।

इसी तरह बसपा के राज्यसभा सदस्य जुगुल किशोर के भाजपा में आने की खबरों ने लखीमपुर के कार्यकर्ताओं को परेशान कर दिया है तो दारा सिंह चौहान जैसे लोगों के भाजपा नेताओं के संपर्क में होने की खबरें भी पूर्वांचल के पार्टी कार्यकर्ताओं को चिंता में डाल रही है।

माना जा रहा है कि इसी सब के चलते भाजपा ने बिना सोचे-समझे लोगों को पार्टी में शामिल नहीं करने का फैसला किया है।

पार्टी के एक प्रमुख पदाधिकारी कहते हैं कि जिस तरह आने वालों की लाइन लगी है, उसमें कोई बाबू सिंह कुशवाहा फिर पार्टी की सारी मेहनत पर पानी फेर सकता है। इसीलिए तय किया गया है कि ऑनलाइन सदस्यता में कोई अगर स्वत: सदस्य बनता है तो बात अलग है लेकिन भाजपा का कोई नेता फिलहाल किसी को पार्टी में शामिल नहीं करेगा।

बड़े जनाधार वालों के लिए ये होगी भाजपा की प्लानिंग

UP BJP is in dilemma over some issue.

भले ही भाजपा में आने की इच्छा रखने वाला कितना भी चर्चित व जनाधार वाला हो। ऐसे लोगों के बारे में प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व ही फैसला करेगा।

उसी के बाद तय होगा कि उसे पार्टी में लेना है या नहीं। कोई व्यक्ति अगर ऑनलाइन सदस्यता अभियान में पार्टी से जुड़ गया है तो भी उसे पार्टी में रखने या न रखने का फैसला पड़ताल के बाद ही होगा।

यह तय किया गया है कि स्थानीय स्तर पर अगर कोई चर्चित व्यक्ति या दूसरे दल का बड़ा नेता भाजपा में शामिल होने के लिए पार्टी के किसी व्यक्ति से संपर्क करता है तो उसके बारे में पूरा ब्यौरा देते हुए प्रदेश के लोगों को बताया जाए।

प्रदेश का नेतृत्व भी अपने स्तर से उसके बारे में पूरी पड़ताल कर ले। स्थानीय स्तर पर पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ताओं से भी सलाह-मशविरा कर ले। देख ले कि संबंधित व्यक्ति के आने से पार्टी का कितना लाभ होगा। किसी पुराने कार्यकर्ता की प्रतिष्ठा या भावनाओं को बहुत ठेस तो नहीं लगेगी।

तब नहीं होगा शामिल करने का फैसला

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दागी व आपराधिक छवि वालों को पार्टी में नहीं लिया जाएगा। किसी ऐसे को भी भाजपा में इंट्री मिलना मुश्किल होगी जिसके आने से पार्टी को नहीं बल्कि शामिल होने वाले का लाभ होना है।

अगर कोई पहले भाजपा छोड़कर गया है तो उसके बारे में भी उस समय की स्थितियों का विश्लेषण करते हुए फैसला होगा। ऐसे लोगों की भी भाजपा में आने की राह मुश्किल होगी, जिनके खिलाफ भाजपा के ही किसी कार्यकर्ता के उत्पीड़न को लेकर आपराधिक मामला है।

इस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि सदस्यता अभियान चलने तक कहीं भी किसी को पार्टी में शामिल करने का काम नहीं होगा। अगर कहीं कोई विशेष स्थिति होगी तो प्रदेश व केंद्रीय नेतृत्व परामर्श करके फैसला करेगा।

पार्टी साफ-सुथरी राजनीति के प्रति प्रतिबद्ध है। इसलिए किसी दागी छवि वाले को पार्टी में लेने का सवाल ही नहीं उठता। जो ऑनलाइन सदस्य बनेंगे उनकी भी बाद में पड़ताल होगी। इसके बाद ही उसके भविष्य का फैसला होगा।

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