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UP BJP District President: नहीं चली सासंद-विधायकों की पैरवी, चौंकाने वाले रहे कई नाम; चुनौतियां अब भी बाकी

Tue, 18 Mar 2025 07:27 AM IST
रोहित मिश्र सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, अमर उजाला, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Tue, 18 Mar 2025 07:27 AM IST
सार

UP BJP Jila Adhyaksh list: पार्टी नेतृत्व ने इस बार संगठन चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए कई मानक तय किए थे। उसका असर भी इस बार चुनावों में दिख रहा है। 

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UP BJP District President: The lobbying of MPs and MLAs did not work, many names were surprising; challenges r
सीएम योगी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

UP BJP Jiladhyaksh News Highlights: लंबे चिंतन-मनन के बाद भाजपा के जिलाध्यक्षों की सूची जारी की गई है। इसका फायदा यह हुआ कि इनके चयन को लेकर सार्वजनिक तौर पर होने वाली तकरार रोकने में तो भाजपा सफल रही है, लेकिन चुनौतियां अब भी बरकार हैं। तमाम जिलों में चयन को लेकर दावेदारों के बीच पनपे असंतोष से पार पाना बड़ी चुनौती है। माना जा रहा है कि यह चुनौती सिर्फ पार्टी नेतृत्व के सामने नहीं आएगी, बल्कि नए जिलाध्यक्षों के सामने भी असंतुष्ट दावेदारों के साथ समन्वय बनाकर काम करना बड़ा टास्क होगा।

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पार्टी नेतृत्व ने इस बार संगठन चुनाव को पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से कराने के लिए कई मानक तय किए थे। यह भी तय किया गया था कि किसी भा सांसद, विधायक या पार्टी के बड़े नेताओं की सिफारिश के बजाय कर्मठता और पार्टी के प्रति समर्पित कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाएगी। पार्टी के संगठनकर्ताओं ने इस फाॅर्मूले पर कुछ हद तक अमल करने की कोशिश भी की है, फिर भी तमाम जिलों में जिलाध्यक्षों का चयन चौंकाने वाला है। कई जिलों में ऐसे तमाम पुराने और कॉडर के लोगों ने दावेदारी कर रखी थी, जो विगत कई वर्षों से पार्टी का झंडा ढो रहे हैं और दरी बिछाते रहे हैं।
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पार्टी सूत्रों का तो यह भी कहना है कि कई जिलों में तो बहुत ही कर्मठ और प्रभावशाली कार्यकर्ताओं ने भी दावेदारी कर रखी थी, लेकिन उनकी न तो किसी ने सिफारिश की और न ही यह बात चयनकर्ताओं तक ही पहुंच पाई। सूत्र बताते हैं कि कुछ नाम तो ऐसे भी थे, जो जिले के पैनल में सबसे ऊपर थे, लेकिन संगठनकर्ताओं के सामने गलत फीडबैक देकर उनके स्थान पर सिफारिशी लोगों की ताजपोशी करी दी गई है।
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ऐसी स्थिति तमाम जिलों में है। लिहाजा कई जिलों में पार्टी के लिए दशकों से मेहनत करने वाले दावेदारों में भीतर ही भीतर आक्रोश बढ़ने की बात कही जा रही है। हालांकि अभी तक किसी भी जिले में विरोध के स्वर सार्वजनिक नहीं हुए हैं, लेकिन भीतर ही भीतर असंतोष की आग धधक रही है।

यह भी माना जा रहा है कि आगे आने वाले समय में पार्टी के सामने पंचायत चुनाव और इसके बाद 2027 में विधानसभा चुनाव जीतना टास्क है, इसलिए स्थानीय संगठन की मजबूती जरूरी है, लेकिन इससे पहले तमाम जिलों में दावेदारों के बीच उठ रही असंतोष की आग को शांत करना बड़ी चुनौती होगी।
 

यह भी पढ़ेंः- यूपी: इसी महीने के अंत तक भाजपा को मिल जाएगा नया प्रदेश अध्यक्ष, जिलाध्यक्ष चुनने के बाद रास्ता हुआ साफ

विवाद सुलझाने में लगे दो महीने

हालांकि पार्टी नेतृत्व किसी भी जिले में नाराजगी की बात को नकारता आ रहा है, लेकिन जिलाध्यक्षों के चयन में करीब दो महीने तक चले मंथन के पीछे पैनल में शामिल नाम को लेकर तमाम जिलों में समन्वय नहीं बन पाना था। यही कारण है कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कई दौर की बैठकों के बाद भी पार्टी 98 में से 70 जिला इकाइयों के अध्यक्षों की सूची जारी कर सका है। 28 जिलों के लिए तय नाम को लेकर अभी भी सहमति नहीं बन पा रही है। इसलिए सूची रोकनी पड़ी है।

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