फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   UP: Big change in the report of missing children, now the case will automatically reach AHT police stations af

यूपी: गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट में बड़ा बदलाव, अब चार महीने बाद स्वतः एएचटी थानों में पहुंच जाएगा मामला

Sat, 22 Mar 2025 07:52 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: रोहित मिश्र Updated Sat, 22 Mar 2025 07:52 PM IST
सार

Missing children in UP:प्रदेश में गुमशुदा बच्चों को तलाशने के लिए प्रदेश में  नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इस व्यवस्था के बाद गायब हुए बच्चों को खोजने में तेजी आएगी। 
 

विज्ञापन
UP: Big change in the report of missing children, now the case will automatically reach AHT police stations af
यूपी में गायब हुए बच्चों पर बदले जाएंगे नियम। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश में बच्चों की तस्करी रोकने और गुमशुदा बच्चों की तलाश में तेजी लाने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है। अब प्रदेश में कहीं भी गुमशुदा बच्चों की रिपोर्ट दर्ज होने के चार महीने बाद स्वतः ही संबंधित एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) थाना को भेज दी जाएगी। यहां साइबर तकनीक और डिजिटल फॉरेंसिक की मदद से जांच की जाएगी, जिससे बच्चों को तलाशने में तेजी आएगी। प्रदेश के सभी एएचटी थानों को अब सीधे मामले दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अभी तक प्रदेश के केवल चार-पांच एएचटी थानों में ही मामले दर्ज किए जाते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया हर जिले में लागू की जाएगी।

विज्ञापन


अवध शिल्प ग्राम में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला में शनिवार को एएचटी थानों और संबंधित अधिकारियों को साइबर तकनीक और डिजिटल फॉरेंसिक की उन्नत विधियों पर प्रशिक्षण दिया गया। साइबर क्राइम विशेषज्ञ संजय मिश्रा ने सोशल मीडिया एनालिटिक्स और विभिन्न मोबाइल ऐप के जरिए गुमशुदा बच्चों को ट्रेस करने के तरीके बताए।
विज्ञापन


इस दौरान दिल्ली पुलिस की एएसआई सीमा ढाका, एएसआई ज्योति और एएसआई गुरप्रीत ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि सही रणनीति, मजबूत इच्छाशक्ति, निरंतर प्रयास और डिजिटल टूल्स के उपयोग से अब तक 300 से अधिक गुमशुदा बच्चों को तलाशा गया है। उनके इस सराहनीय कार्य के लिए दिल्ली पुलिस ने उन्हें आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


अवैध रूप से बच्चों को गोद लेना अपराध
महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने कार्यशाला के दौरान बताया कि केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के अलावा किसी अन्य माध्यम से बच्चों को गोद लेना गैरकानूनी है। किसी भी पुलिसकर्मी, सुरक्षाकर्मी या महिला एवं बाल कल्याण समिति को सीधे बच्चों को गोद देने का अधिकार नहीं है। यदि कोई इस प्रक्रिया के अलावा किसी अन्य तरीके से बच्चों को गोद लेता है, तो इसकी जानकारी पुलिस को देनी होगी।


सरकार की नई पहल से मिलेगी राहत
प्रदेश में गुमशुदा बच्चों की खोज और तस्करी रोकने के लिए सरकार की यह नई पहल बेहद कारगर साबित हो सकती है। एएचटी थानों में मजबूत नेटवर्क, संसाधन और डिजिटल टूल्स की मदद से गुमशुदा बच्चों को जल्द से जल्द खोजने में सहायता मिलेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed