{"_id":"6aed43ea9e7bb7cd310a2936","slug":"up-avoid-refilling-form-6-csc-operators-to-receive-training-2026-11-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी: फार्म-6 दोबारा भरने से बचें, सीएससी संचालकों को मिलेगा प्रशिक्षण, निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूपी: फार्म-6 दोबारा भरने से बचें, सीएससी संचालकों को मिलेगा प्रशिक्षण, निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश जारी
Fri, 06 Nov 2026 08:35 AM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Fri, 06 Nov 2026 08:35 AM IST
सार
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 का अंतिम सबमिशन ई-साइन के बाद ही होता है। आधार नंबर देने पर उससे जुड़े मोबाइल पर ओटीपी आता है। इसे दर्ज करने के बाद ई-साइन पूरा होता है और रेफरेंस नंबर जनरेट होता है। यह नंबर फार्म में दर्ज मोबाइल पर भेजा जाता है।
विज्ञापन
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फार्म-6 बार-बार भरने से होने वाली बहुप्रविष्टियों पर रोक लगाने के लिए जन सुविधा केंद्र (सीएससी) संचालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि फार्म-6 भरते समय आवेदक का वास्तविक और सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज किया जाए। आवेदन जमा होने के बाद आवेदक को रेफरेंस नंबर उपलब्ध कराना भी सुनिश्चित किया जाए। नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार मोबाइल पर रेफरेंस नंबर का संदेश नहीं पहुंचता। ऐसे में आवेदक दोबारा फार्म भर देते हैं, जिससे मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की कई प्रविष्टियां हो जाती हैं।
विज्ञापन
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फार्म-6 का अंतिम सबमिशन ई-साइन के बाद ही होता है। आधार नंबर देने पर उससे जुड़े मोबाइल पर ओटीपी आता है। इसे दर्ज करने के बाद ई-साइन पूरा होता है और रेफरेंस नंबर जनरेट होता है। यह नंबर फार्म में दर्ज मोबाइल पर भेजा जाता है।
विज्ञापन
यदि संदेश नहीं पहुंचता है तो ई-साइन के बाद स्क्रीन पर दिखने वाले रेफरेंस नंबर का स्क्रीनशॉट लेकर आवेदक को दें या उसे नोट कर साझा करें। इससे दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
उन्होंने फार्म में पूरा पता और सही पिन कोड दर्ज करने पर भी जोर दिया। ईपीआईसी स्पीड पोस्ट से भेजा जाता है। गलत पते के कारण पहचान पत्र वापस हो सकता है। बहुप्रविष्टियां रोकने के लिए ईआरओ, एईआरओ और बीएलओ के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
मोबाइल नंबर दर्ज कराने के ये होंगे फायदे
- आवेदन जमा होने की पुष्टि और रेफरेंस नंबर मोबाइल पर मिलेगा।
- रेफरेंस नंबर से आवेदन की स्थिति ट्रैक कर सकेंगे।
- पता, फोटो, आयु प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेजों की कमी होने पर सूचना मिलेगी।
- रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से ई-ईपीआईसी डाउनलोड कर सकेंगे।
- मतदाता पहचान पत्र संख्या याद न होने पर भी वोटर पोर्टल या ईसीआईनेट मोबाइल एप से अपना विवरण प्राप्त कर सकेंगे।