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Lucknow News: कम उम्र में गुर्दे कर रहा खराब गर्भावस्था का उच्च रक्तचाप

Sat, 07 Nov 2026 03:00 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 07 Nov 2026 03:00 AM IST
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Pregnancy-related high blood pressure causing kidney damage at a young age
लखनऊ। कभी बुढ़ापे की बीमारी मानी जाने वाली किडनी (गुर्दे) की बीमारी अब 20 से 35 वर्ष की महिलाओं में तेजी से बढ़ रही है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में रोज ऐसे मामले आ रहे हैं।
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विभाग की डॉ. नम्रता बताती हैं कि अगर 100 केस आते हैं तो उनमें से 35 मामले महिलाओं के होते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या गर्भवती और 20 से 35 वर्ष की महिलाओं की होती है। कुछ मामले डायलिसिस की स्थिति में होते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है गर्भावस्था के दौरान होने वाला उच्च रक्तचाप जो गुर्दे को खराब कर रहा है। यह बेहद चिंताजनक है।
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केजीएमयू के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग क्वीन मेरी की प्रो. रेखा सचान बताती हैं कि अस्पताल में रोज सात से आठ हाई ब्लड प्रेशर वाले मरीज भर्ती होते हैं। इनमें पांच से छह गंभीर और दो से तीन अति गंभीर श्रेणी के होते हैं। इनमें किडनी फेल होने और ब्रेन हेमरेज तक का खतरा रहता है। जिन महिलाओं को गर्भावस्था में गंभीर प्री-एकैम्प्सिया, यानी उच्च रक्तचाप होता है उनमें डिलीवरी के बाद क्रोनिक किडनी बीमारी का खतरा सामान्य महिलाओं के मुकाबले चार से पांच गुना बढ़ जाता है। यह समस्या 20 से 35 वर्ष की महिलाओं में सबसे अधिक देखने को मिल रही।
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इसलिए प्रभावित होती है किडनी
गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी के कारण किडनी के भीतर मौजूद बेहद संवेदनशील रक्त वाहिकाएं सिकुड़ या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। किडनी शरीर के जहरीले और एक्स्ट्रा फ्लूइड को फिल्टर नहीं कर पाती। इससे शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ने लगता है, जो किडनी को खराब करता है।


इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
0 सुबह उठने पर हाथ-पैर, चेहरे या आंखों के आसपास सूजन।
0 पेशाब में झाग आना और पेशाब की मात्रा में कमी आना।
0 लगातार सिरदर्द और धुंधला दिखना।
0 अत्यधिक थकान और उल्टी महसूस होना।


बचाव के लिए इन बातों का रखें ध्यान
0 गर्भावस्था के दौरान हर विजिट में बीपी और यूरिन का रूटीन टेस्ट कराएं। इससे प्री-एकैम्प्सिया को शुरुआती स्टेज में पकड़ा जा सकता है।
0 प्रसव के छह सप्ताह तक घर पर नियमित अंतराल पर बीपी मॉनिटर करें। डिलीवरी के बाद भी कुछ हफ्तों तक बीपी बढ़ने का खतरा रहता है।
0 प्रसव के छह महीने बाद सीरम क्रिएटिनिन और केएफटी टेस्ट कराएं। इससे पता चलेगा कि किडनी सामान्य रूप से काम कर रही है या नहीं।
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