यूपी विधानसभा: पारित हुए छह विधेयक, जौहर विवि पर हुआ अहम फैसला; मोटर यान कराधान में हुआ संशोधन
UP Assembly: यूपी विधानसभा में मंगलवार को कई अहम फैसले हुए। इसमें उत्तर प्रदेश मोटर यान कराधान (संशोधन) विधेयक भी पारित हो गया। इसके तहत प्रदेश में सभी वाहनों पर एकमुश्त कर जमा करने की व्यवस्था लागू होगी।
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विधानसभा में मंगलवार को छह विधेयक पारित हो गए। इनमें उप्र. माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2025, उप्र. निरसन विधेयक 2025, उप्र. निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2025। इसके अलावा उप्र. निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) विधेयक 2025, उप्र. मोटर यान कराधान (संशोधन) विधेयक और उप्र. लोक अभिलेख विधेयक 2025 शामिल हैं।
बता दें कि माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक के तहत धारा 129 के तहत अर्थदंड के प्रकरणों में प्रथम एवं अधिकरण के समक्ष अपील किए जाने से पहले जमा की जाने वाली धनराशि की सीमा अर्थदंड का 25 प्रतिशत से घटाते हुए 10 प्रतिशत करने का प्रावधान किया गया है। साथ ही अन्य धाराओं में आरोपित अर्थदंड के तहत अपील करने के प्रावधान को भी शामिल किया है। इनपुट सेवा वितरक के रूप में पंजीकृत करदाताओं को सुविधा देते हुए आयातित माल पर दिए गए कर से बने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के वितरण की सुविधा दी गई है।
वहीं उप्र निरसन विधेयक में रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय से संबंधित दो विधेयक समेत 35 विधेयकों को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही 72 वर्ष पुराने विश्वविद्यालयों के पुराने कानून भी समाप्त कर दिए गए हैं। अयोध्या में नया निजी विश्वविद्यालय महर्षि महेश योगी रामायण विश्वविद्यालय से जुड़े उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी गई है। इसी तरह गाजियाबाद के मोदीनगर स्थित डॉ. केएन मोदी विश्वविद्यालय से जुड़े उप्र निजी विश्वविद्यालय (द्वितीय संशोधन) को मंजूरी दी गई है।
वहीं उत्तर प्रदेश मोटर यान कराधान (संशोधन) विधेयक भी पारित हो गया। इसके तहत प्रदेश में सभी वाहनों पर एकमुश्त कर जमा करने की व्यवस्था लागू होगी। इससे वाहन मालिकों को बार- बार कर जमा नहीं करना पड़ेगा। परिवहन विभाग को कर जमा करने के लिए वाहनों की जांच नहीं करनी होगी। बता दें कि उत्तर प्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम, 1997 की धारा 4 में गैर-परिवहन एवं परिवहन दोनों प्रकार के वाहनों पर कर वसूला जाता है। इसमें एकमुश्त के साथ ही मासिक, त्रैमासिक और वार्षिक कर लगाने की व्यवस्था है।
बिना अनुमति लोक अभिलेख प्रदेश से बाहर ले जाने पर सजा
विधानसभा में उत्तर प्रदेश लोक अभिलेख विधेयक 2025 पारित हो गया। इसके बाद राज्य सरकार की अनुमति के बिना कोई भी अभिलेख प्रदेश से बाहर ले जाने पर 5 साल की सजा अथवा 50 हजार रुपये जुर्माना या दोनों से दंडित करने का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह किसी शासकीय कार्य से ले जाने पर अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होगी। बिना अनुमति के किसी अभिलेख को नष्ट भी नहीं किया जा सकेगा। विधेयक में सभी विभागों में अभिलेख अधिकारी की नियुक्ति करने का प्रावधान भी किया गया है, जो सामयिक महत्व के अभिलेखों की समीक्षा करके बताएगा कि उन्हें लंबे समय तक संरक्षित करने की आवश्यकता है कि नहीं। इस बाबत निदेशक अभिलेखागार से सलाह लेनी आवश्यक होगी। इसके अलावा प्रदेश सरकार अभिलेखागार सलाहकार बोर्ड का गठन भी कर सकेगी, जो लोक अभिलेखों के प्रशासन, प्रबंध, परिरक्षण और उपभोग से संबंधित मामलों में राज्य सरकार को सलाह देगा। साथ ही, प्रशिक्षण आदि के मार्गदर्शक सिद्धांत भी तय करेगा।