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UP: निवेशकों को धोखा देने के लिए निदेशक बदलता रहा अंसल ग्रुप, सीबीआई जांच कई पूर्व निदेशक राडार पर
Tue, 19 May 2026 10:01 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Ishwar Ashish Bhartiya
Updated Tue, 19 May 2026 10:01 PM IST
सार
अंसल ग्रुप ने सिंगापुर निवासी एक एनआरआई को भी कंपनी का निदेशक बनाया था। उसने कंपनी को बुरे हालात से उबारने के लिए 100 करोड़ रुपये का निवेश भी किया, हालांकि अंसल के संचालकों की करतूतें उस पर भारी पड़ने लगी। इसके बाद उसने भी कंपनी से दूरी बना ली।
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- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले अंसल ग्रुप के संचालकों ने खुद को बचाने के लिए बीते दो दशक के दौरान अपनी कंपनियों के दर्जनों निदेशकों को बदल डाला। अंसल ग्रुप के खिलाफ शुरू हुई सीबीआई जांच में अब कंपनी के पूर्व निदेशकों और प्रमोटर्स का पता लगाया जा रहा है। इनमें से कई कंपनी के कर्मचारी थे, जिन्हें संचालकों ने झांसा देकर निदेशक बनाया था। हालांकि, उन पर तमाम एफआईआर दर्ज होने का सिलसिला शुरू हुआ तो उन्होंने कंपनी छोड़ने में ही भलाई समझी।
सीबीआई ने रीयल एस्टेट कंपनी अंसल और तुलसियानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। खासकर अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर में बीते 23 साल के दौरान रहे निदेशकों और प्रमोटर्स का पता लगाया जा रहा है ताकि उनसे पूछताछ की जा सके। इनमें से तमाम निदेशक पुलिस की जांच का भी सामना कर रहे हैं। करीब 10 वर्ष पूर्व अंसल ग्रुप ने सिंगापुर निवासी एक एनआरआई को भी कंपनी का निदेशक बनाया था। उसने कंपनी को बुरे हालात से उबारने के लिए 100 करोड़ रुपये का निवेश भी किया, हालांकि अंसल के संचालकों की करतूतें उस पर भारी पड़ने लगी और कंपनी के खिलाफ दर्ज होने वाली एफआईआर में वह भी नामजद हो गया। इसके बाद उसने भी कंपनी से दूरी बना ली।
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आयकर विभाग ने मारा था छापा
अंसल ग्रुप के ठिकानों पर बीते दिनों आयकर विभाग भी छापा मार चुका है। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई, लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच भी सरकारी संपत्तियों को हथियाने के प्रकरण की जांच कर चुकी है। इन कवायदों के बावजूद अंसल ग्रुप के निवेशकों को अभी तक कोई राहत नहीं मिल सकी है।
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सीबीआई ने रीयल एस्टेट कंपनी अंसल और तुलसियानी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। खासकर अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर में बीते 23 साल के दौरान रहे निदेशकों और प्रमोटर्स का पता लगाया जा रहा है ताकि उनसे पूछताछ की जा सके। इनमें से तमाम निदेशक पुलिस की जांच का भी सामना कर रहे हैं। करीब 10 वर्ष पूर्व अंसल ग्रुप ने सिंगापुर निवासी एक एनआरआई को भी कंपनी का निदेशक बनाया था। उसने कंपनी को बुरे हालात से उबारने के लिए 100 करोड़ रुपये का निवेश भी किया, हालांकि अंसल के संचालकों की करतूतें उस पर भारी पड़ने लगी और कंपनी के खिलाफ दर्ज होने वाली एफआईआर में वह भी नामजद हो गया। इसके बाद उसने भी कंपनी से दूरी बना ली।
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आयकर विभाग ने मारा था छापा
अंसल ग्रुप के ठिकानों पर बीते दिनों आयकर विभाग भी छापा मार चुका है। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई, लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच भी सरकारी संपत्तियों को हथियाने के प्रकरण की जांच कर चुकी है। इन कवायदों के बावजूद अंसल ग्रुप के निवेशकों को अभी तक कोई राहत नहीं मिल सकी है।