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यूपी : वैट से जुड़े लंबित वाद निस्तारण की कार्ययोजना तैयार, प्रदेश में लंबित है वैट के 3.15 लाख से अधिक वाद
Thu, 11 Nov 2021 06:26 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 11 Nov 2021 06:26 PM IST
सार
वाणिज्यकर आयुक्त ने लंबित वादों के निस्तारण के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति का गठन किया था। इसी समिति की सिफारिश पर यह तय किया गया है कि जितने भी वाद लंबित रह गए हैं उसे सभी अधिकारियों के बीच समान संख्या में बांट दिया जाए।
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जीएसटी
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
जीएसटी लागू होने के बाद लंबित रह गए वैट से संबंधित वाद का तेजी से निस्तारण के लिए वाणिज्यकर विभाग ने नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत हर जोन के अधिकारियों को बराबर-बराबर संख्या मामले सौंपे जाएंगे। ताकि ऐसे मामलों को जल्द से जल्द निस्तारित किया जा सके। वैट प्रणाली केसमय के कर निर्धारण से संबंधित कुल 3.15 लाख 262 वाद अभी भी अनिस्तारित हैं। इसके लिए वाणिज्य कर कमिश्नर के स्तर से एक समाधान समिति का भी गठन किया गया है, जो यह ऐसे वाद के निस्तारण की निगरानी करेगी।
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एक जुलाई 2017 से देशभर में जीएसटी प्रणाली लागू कर दिये जाने के बाद वैट की तुलना में पंजीकृत प्रदेश में डीलर बेस व्यापारियों की संख्या में करीब दोगुना वृद्धि हुई है। जीएसटी लागू होने से पूर्व लागू वैट प्रणाली के अर्न्तगत लंबित वादों का निस्तारण होना था, लेकिन जीएसटी लागू होने की वजह से अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ गया है। इस वजह से वित्तीय वर्ष 2015-16, 2016-17 व 2017-18 केदौरान के कर निर्धारण से संबंधित वादों का निस्तारण होना बाकी रह गया था। हालांकि बाद के दो वित्तीय वर्ष से संबंधित वादों का निस्तारण तो हो चुका है, लेकिन 2015-16 के समय के 3.15 लाख वादों का निस्तारण होना शेष रह गया है। इनमें से बीते 31 अक्तूबर तक सिर्फ 56102 वादों के ही निस्तारण हो पाए हैं।
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लंबित वादों की संख्या किसी जोन में अधिक है तो किसी जोन में कम है। यानि किसी जोन के पास कम वाद लंबित थे तो किसी अधिकारी के पास अधिक बोझ था। काम की अधिकता की वजह से कई अधिकारियों के जोन में लंबित वादों का निस्तारण तेजी नहीं नहीं हो पा रहा है। इसलिए अब यह तय किया है कि लंबित वादों का विभाजन सभी जोन के अधिकारियों में समान रूप से कर दिया जाए, ताकि इसका निस्तारण त्वरित गति से हो सके।
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वरिष्ठ अधिकारियों की समिति ने की थी सिफारिश
वाणिज्यकर आयुक्त ने लंबित वादों के निस्तारण के लिए विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति का गठन किया था। इसी समिति की सिफारिश पर यह तय किया गया है कि जितने भी वाद लंबित रह गए हैं उसे सभी अधिकारियों के बीच समान संख्या में बांट दिया जाए। इसी कड़ी में लंबित वादों का आवंटन कर दिया गया है।