यूपी: प्रदेश में जीएसटी चोरी का नया खेल, दूसरे राज्यों के नाम पर ई-वे बिल बनाकर यूपी में ही उतार रहे माल
उत्तर प्रदेश में फर्जी कारोबारी दूसरे राज्यों के नाम पर ई-वे बिल बनाकर माल की वास्तविक सप्लाई प्रदेश में ही कर रहे हैं। इससे जीएसटी चोरी के मामले बढ़ रहे हैं। लोहे, स्क्रैप, कपड़े और प्लास्टिक कारोबार में गड़बड़ी सामने आई है। विभाग ने नई फर्मों की निगरानी बढ़ाने का सुझाव दिया है।
विस्तार
जीएसटी में माल की निर्बाध आवाजाही के लिए ई वे बिल और वाहनों की जांच के नियमों में बदलाव का फायदा फर्जी कारोबारी उठा रहे हैं। दूसरे राज्यों के नाम पर ई वे बिल बनाकर माल की वास्तविक सप्लाई यूपी में ही की जा रही है। इससे राज्य कर विभाग के सामने टैक्स चोरी रोकने और वास्तविक कारोबारियों तक पहुंचने की चुनौती बढ़ गई है।
जीएसटी परिषद की आठ अक्तूबर को हुई 57वीं बैठक में वाहनों की जांच को तर्कसंगत बनाने की सिफारिश की गई थी। इसके तहत सामान्य या रैंडम जांच के बजाय विशेष खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त आयुक्त या उससे ऊपर के अधिकारी की अनुमति से वाहन रोका जा सकेगा।
जिस राज्य में माल भेजने वाला और पाने वाला दोनों पंजीकृत नहीं हैं, वहां के अधिकारी वाहन की जांच या माल जब्त नहीं कर सकेंगे। उन्हें गड़बड़ी की सूचना संबंधित राज्य को देनी होगी। हालांकि, ई वे बिल या माल के स्रोत और दस्तावेज नहीं होने पर ट्रांजिट राज्य कार्रवाई कर सकेगा।
ऐसे होता है खेल
फर्जी फर्में दूसरे राज्यों के जिलों में माल की सप्लाई दिखाती हैं, जबकि वास्तविक खरीदार यूपी में होता है। ई वे बिल और अन्य दस्तावेज बाहरी राज्यों की फर्मों के नाम पर बनाए जाते हैं, लेकिन माल यूपी में ही उतार दिया जाता है। ऐसे मामलों में यूपी के अधिकारियों के लिए जांच करना मुश्किल हो जाता है।
इन कारोबारों में बढ़ी गड़बड़ी
विभागीय जांच में लोहे और एल्यूमीनियम स्क्रैप, स्टील, गैर-ब्रांडेड कपड़े, रेडीमेड गारमेंट, प्लास्टिक दाना, कागज और पैकेजिंग सामग्री में फर्जी इनवॉइस व ई वे बिल के मामले बढ़े हैं। प्लास्टिक कारोबार में फर्जी बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट का खेल भी बढ़ा है।
नई फर्मों पर निगरानी का सुझाव
अधिकारियों के मुताबिक, नई फर्म दो महीने में एक हजार ई वे बिल जारी कर सकती हैं। प्रत्येक बिल में 10 से 30 लाख रुपये का माल दिखाने पर कागजों में 100 से 300 करोड़ रुपये का कारोबार बन जाता है। बाद में फर्म बंद होने पर वसूली मुश्किल होती है।
विभाग ने नई और जोखिम वाली फर्मों को शुरुआत में सीमित ई वे बिल जारी करने और पहले 10 बिलों का विवरण देने के बाद अगले 25 व फिर 100 बिल जारी करने जैसी चरणबद्ध व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया है। इससे टैक्स चोरी पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।