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यूपी : कोरोना के गंभीर मरीजों में 98 फीसदी बिना टीका वाले
Fri, 18 Jun 2021 09:37 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 18 Jun 2021 09:37 AM IST
सार
प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में भर्ती कोरोना के गंभीर मरीजों में 98 फीसदी बिना टीके वाले हैं। जो लोग टीका लगवाने के बाद कोविड की चपेट में आए और अस्पताल में भर्ती कराए गए, वे जल्दी ठीक हो गए।
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
प्रदेश के विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में भर्ती कोरोना के गंभीर मरीजों में 98 फीसदी बिना टीके वाले हैं। जो लोग टीका लगवाने के बाद कोविड की चपेट में आए और अस्पताल में भर्ती कराए गए, वे जल्दी ठीक हो गए। फिलहाल इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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वर्तमान में एक्टिव केस की संख्या घटकर 6,019 हो गई है। इनमें से करीब पांच सौ मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। लखनऊ के पीजीआई में 30, केजीएमयू में 50 और लोहिया संस्थान में 10 मरीज भर्ती हैं। इनमें से ज्यादातर अति गंभीर हैं। पर, खास बात यह है कि इनमें से 98 फीसदी मरीज बिना टीका वाले हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीजों में दी फीसदी टीका वाले हैं, लेकिन उनमें दूसरी कई गंभीर बीमारियां हैं।
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वहीं, एसजीपीजीआई के निदेशक डॉ. आरके धीमान कहते हैं कि टीका लगवाने वाले भी वायरस की चपेट में आ सकते हैं, लेकिन अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती है। ऐसे ज्यादातर लोग होम आइसोलेशन में ठीक हुए हैं। कोरोना की तीसरी लहर से बचने के लिए हर व्यक्ति को जल्द टीका लगवाना चाहिए।
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केजीएमयू के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. डी हिमांशु ने बताया कि इन दिनों भर्ती मरीजों में ज्यादातर बिना टीके वाले हैं। पहले भी जो मरीज भर्ती हुए थे अथवा जिनकी मौत हुई थी, उनमें भी 95 फीसदी बिना टीके वाले थे। इससे साफ है कि जिन्होंने टीका लगवाया था, उन पर वायरस का असर कम हुआ है। पहला टीका लगवाने के बाद कुछ लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं, लेकिन वे जल्दी ठीक हो गए हैं।
टीकाकरण से कम होता है कोविड का असर
वर्तमान में आईसीयू में 10 मरीज भर्ती हैं। ये सभी बिना टीके वाले हैं। दोनों टीका लगवाने के बाद अस्पताल में एक या दो मरीज आए हैं। इनमें मधुमेह समेत कई दूसरी बीमारियां भी थीं। इससे साफ है कि टीकाकरण कराने से कोविड का असर असर कम होता है।
-डॉ. श्रीकेश सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, कोविड हास्पिटल