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UP: 2400 छात्रों को किया गलत ढंग से 3.5 करोड़ का अधिक भुगतान, समाज कल्याण निदेशक ने मांगी रिपोर्ट
Mon, 02 Feb 2026 11:11 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 02 Feb 2026 11:11 PM IST
सार
मामले में अधिकारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। समाज कल्याण निदेशक ने एनआईसी और योजना अधिकारी से रिपोर्ट मांगी है।
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- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
उत्तर प्रदेश में सामान्य वर्ग के 2400 छात्रों को करीब 3.5 करोड़ रुपये का गलत ढंग से अधिक भुगतान कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि सॉफ्टवेयर में कैपिंग (भुगतान की अधिकतम सीमा) न लगाने से ऐसा हुआ है। कैपिंग न लगने के लिए कौन जिम्मेदार है इसके लिए अधिकारी एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं।
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छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में बीटेक व एमबीए आदि पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये, नर्सिंग व पैरा मेडिकल आदि पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम 30 हजार रुपये और आईटीआई-पालिटेक्निक आदि के लिए अधिकतम 10 हजार रुपये भुगतान हो सकता है। वर्ष 2024-25 में योजना का लाभ न पाने वाले पात्र छात्रों को चालू वित्त वर्ष में विशेष अनुमति के तहत भुगतान के आदेश दिए गए हैं।
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5638 छात्रों के एक बिल में कैपिंग नहीं लगाई गई। इसके चलते 2400 छात्रों को अधिक भुगतान कर दिया गया। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कैपिंग लगाने का काम एनआईसी का। अब यहां सवाल यह उठता है कि अधिक भुगतान की जिम्मेदारी से समाज कल्याण के अधिकारी कैसे बच सकते हैं। वहीं, कुछ विभागीय अधिकारी इसमें जानबूझकर गड़बड़ की आशंका भी जता रहे हैं।
समाज कल्याण के निदेशक संजीव सिंह का कहना है कि एनआईसी और विभाग के संबंधित योजना अधिकारी से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही तय किया जाएगा कि यह चूक थी या जानबूझकर किया गया कृत्य। जिन छात्रों को अधिक भुगतान किया गया है उनसे रिकवरी के लिए निर्देश दे दिए गए हैं।