यूपी: अजय राय ने सीएम योगी के खिलाफ दाखिल किया मानहानि परिवाद, 25 सितंबर को होगी पहली सुनवाई
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया है। आरोप है कि रायबरेली की सभा में मुख्यमंत्री ने अजय राय पर अपमानजनक टिप्पणी की। परिवाद में सामाजिक और राजनीतिक छवि खराब करने का दावा किया गया है। मामले की पहली सुनवाई 25 सितंबर को होगी।
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उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा की अदालत में दाखिल परिवाद में मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई है। मामले में पहली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।
अजय राय के अधिवक्ता संजीव पांडेय ने अदालत में परिवाद दाखिल करते हुए आरोप लगाया कि 23 अगस्त को अयोध्या में कांग्रेस नेता राम निहाल निषाद की ओर से निषाद समाज का कार्यक्रम और जनसभा आयोजित की गई थी। इसमें अजय राय को संबोधित करने के लिए बुलाया गया था।
कार्यक्रम के बाद निषाद समाज की परंपरा के अनुसार मत्स्य भोज का आयोजन हुआ था। परिवाद के मुताबिक, कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के दौरान अजय राय की तस्वीरें मीडिया में प्रसारित हुईं। इसके बाद निषाद समाज के लोगों के मछली खाते हुए फोटो भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित हुए।
रायबरेली की सभा के बयान को बनाया मानहानि का आधार
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि इन्हीं तस्वीरों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 अगस्त को रायबरेली में आयोजित जनसभा में अजय राय के खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणी की। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हनुमानगढ़ी में दर्शन करने जाते हैं।
बाहर जाकर मछली की दावत उड़ाते हैं तथा राम-राम और बजरंगबली के सामने दंडवत होने का ढोंग करते हैं। परिवाद में यह भी कहा गया है कि जनसभा का वीडियो 24 अगस्त को मुख्यमंत्री के आधिकारिक/व्यक्तिगत एक्स अकाउंट से पोस्ट किया गया, जिसे करीब 2.75 लाख लोगों ने देखा और साझा किया।
अजय ने लगाए ये आरोप
अजय राय की ओर से दाखिल परिवाद में कहा गया है कि वह सनातन धर्म में आस्था रखने वाले व्यक्ति हैं और उनका मांस-मछली से कभी कोई संबंध नहीं रहा है। आरोप लगाया गया कि बिना किसी प्रत्यक्षदर्शी साक्ष्य और केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर उनकी सामाजिक, पारिवारिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाया गया।
परिवाद में दावा किया गया है कि बयान समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया के जरिए बड़े स्तर पर प्रसारित होने से लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंचा। इससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई और समाज में उनके बहिष्कार तक की बातें कही जाने लगीं। अजय राय ने इससे मानसिक और सामाजिक आघात पहुंचने का भी आरोप लगाया है। अदालत से मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का मुकदमा चलाने की मांग की गई है।