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प्रिंसिपल ने दिया इस्तीफा, बच्चों ने संभाली बागडोर
अशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Fri, 06 Sep 2013 03:13 AM IST
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केंद्रीय विद्यालय आईआईएम की सुबह आज कुछ बदली हुई सी थी।
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मार्निंग असेंबली में प्रिंसिपल आरके भारती की जगह कक्षा 12 के छात्र अभिषेक ने ले ली।
वहीं, 12वीं कक्षा की ही सुप्रिया यादव वाइस प्रिंसिपल के स्थान पर नजर आईं।
थोड़ी ही देर में प्रिंसिपल साहब असेंबली में पहुंचे। मंच पर आकर छात्र अभिषेक को आधिकारिक तौर पर चार्ज सौंपा।
केंद्रीय विद्यालय आईआईएम की तरह ही राजधानी के सभी दूसरे केंद्रीय विद्यालयों में प्रिंसिपल भी स्कूल की बागडोर छात्रों को सौंपकर चले गए। हैरान न हो। ये मात्र एक परंपरा है, जिसे शिक्षकों को सम्मान देने के लिए सालों से राजधानी समेत सभी केंद्रीय विद्यालयों में हर साल दोहराया जाता है।
ये परंपरा इतनी पुरानी है कि मौजूदा शिक्षकों और केंद्रीय विद्यालय संगठन के अधिकारियों को भी याद नहीं है कि इसकी शुरुआत कब की गई। 2012 में सेवानिवृत्त हुए लखनऊ संभाग के उपायुक्त एके बाजपेयी कहते हैं कि उन्होंने 1978 में संगठन ज्वाइन किया था।
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तब भी ये परंपरा निभाई जाती थी। केवी आईआईएम के प्रिंसिपल आरके भारती कहते हैं कि यह छात्रों द्वारा शिक्षकों को सम्मान देने की एक परंपरा है। इससे छात्रों को शिक्षक के करीब आने का अवसर प्राप्त होता है।
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उधर, राजधानी के राजाजीपुरम स्थित सेंट जोजफ कॉलेज में भी शिक्षकों को सम्मान देने की इस परंपरा का निर्वाहन किया गया। एक दिन के लिये विद्यालय के निदेशक अनिल अग्रवाल तथा प्रधानाचार्या ने अपना इस्तीफा देकर 12वीं की छात्रा कोमल को प्रधानाचार्या और इसी क्लास के छात्र शशांक गुप्ता को विद्यालय का निदेशक बना दिया था। सभी शिक्षक छात्र-छात्रा बने।
बच्चों ने ली दूसरे बच्चों की क्लास
विद्यार्थियों ने बाकायदा सभी विषयों की कक्षाएं भी ली। जिसमें गलती होने पर छात्रों को कक्षा से बाहर भी निकाला गया तथा मुर्गा भी बनना पड़ा। बाद में इन्हीं बच्चों ने अपने शिक्षकों के सम्मान में अनेक रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए।