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मुजफ्फरनगर दंगा रिपोर्ट: वो सवाल नहीं मिले जिनके जवाब

Tue, 08 Mar 2016 04:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 08 Mar 2016 04:38 PM IST
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Unanswered Questions of Muzaffarnagar Riot Report.
दंगों में हजारों लोग हुए थे बेघर - फोटो : getty images

जस्टिस विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट आने के बाद यह सवाल और तीखा हो गया है कि मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान जानसठ के सीओ जगत राम जोशी ने सचिन और गौरव की हत्या के संदेह में पकड़े गए लोगों को किसके कहने पर छुड़वाया?

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शाहनवाज की हत्या में सचिन और गौरव के परिवार के सदस्यों की गलत नामजदगी किसके इशारे पर और क्यों की गई? संदिग्धों की गिरफ्तारी और गलत नामजदगी हटाने की मांग मानने से प्रशासन क्यों इन्कार करता रहा?
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आयोग की रिपोर्ट से साफ हो गया है कि वहां तैनात अफसर अपना काम निष्पक्षता से नहीं कर रहे थे। एक-एक कर की गई उनकी गलतियों से माहौल बिगड़ता गया और आखिरकार इस दंगे में 65 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, हजारों लोग बेघर हो गए।
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मुजफ्फरनगर के कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को पहले शाहनवाज और बाद में सचिन एवं गौरव की हत्या के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था।

रिपोर्ट में दंगे के कारणों की विस्तार से चर्चा की

Unanswered Questions of Muzaffarnagar Riot Report.
राहत कैंपों में बैठे दंगों से विस्‍थापित हुए लोग - फोटो : getty images
इसके बाद पंचायतों का दौर चला और 7 सितंबर की शाम तथा 8 सितंबर को दिन में मुजफ्फरनगर व शामली के कई गांवों में सांप्रदायिक दंगे हुए। हालात की गंभीरता को देखते हुए 8 सितंबर को सेना बुलानी पड़ी।

जस्टिस सहाय ने अपनी रिपोर्ट में दंगे के कारणों की विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने स्थिति को संभालने में अधिकारियों की भूमिका और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई सुझाव भी दिए हैं। इसके बावजूद कई सवालों के जवाब नहीं मिल सके हैं।

तिहरे हत्याकांड के बाद क्यों हटाए डीएम, एसएसपी
आयोग ने कहा है कि 27 अगस्त 2013 को कवाल में शाहनवाज और गौरव व सचिन की हत्या के बाद रात में मुजफ्फरनगर के डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी के तबादले से हिंदू समाज (विशेषकर जाट समुदाय) में सरकार के खिलाफ आक्रोश व्याप्त हो गया जो दंगों का मुख्य कारण बना।

इन अधिकारियों के आदेश पर ही सचिन व गौरव की हत्या में 8 व्यक्तियों को हिरासत में लिया गया था। आयोग ने रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों का शासनादेश के अनुरूप तबादला किए जाने का उल्लेख तो किया है लेकिन सांप्रदायिक तनाव की घटना के समय जिले के दोनों शीर्ष अफसरों को अचानक क्यों हटा दिया गया? इस पर कुछ नहीं कहा गया है।

हत्या के संदिग्धों को किसके आदेश पर छोड़ा गया

Unanswered Questions of Muzaffarnagar Riot Report.
दंगा पीड़ित एक महिला व आसपास खड़े लोग - फोटो : getty images
डीएम, एसपी के तबादले के बाद उनके आदेश पर सचिन एवं गौरव की हत्या के 8 संदिग्धों को छोड़ा गया। आयोग ने इनकी संख्या 14 बताई है। ये एफआईआर में नामजद नहीं थे।

आयोग ने कहा है कि इससे संदेश गया कि प्र्रशासन एवं सरकार मुस्लिमों की पक्षधर है और उनके प्रभाव में काम कर रही है।

तत्कालीन सीओ जानसठ ने इंस्पेक्टर को टेलीफोन करके बंद लोगों को छोड़ने के लिए कहा। सीओ ने किसके कहने पर टेलीफोन किया, क्या प्रशासन पर कोई राजनीतिक दबाव था, इस बारे में रिपोर्ट में कुछ नहीं कहा गया है।

किसके दबाव में था प्रशासन
आयोग ने कहा है कि प्रशासन द्वारा हत्या के संदिग्धों की गिरफ्तारी और सचिन-गौरव के परिवारीजनों की गलत नामजदगी हटाने की मांग को मानने से इन्कार करना भी दंगा भड़कने का एक कारण था।

सवाल यह है कि गलत नामजदगी क्यों हुई? यदि हो भी गई तो इतने जनदबाव के बावजूद प्र्रशासन गलत नामजदगी हटाने को क्यों तैयार नहीं था? निष्पक्ष कार्रवाई के दायित्व से प्रशासन क्यों बच रहा था? रिपोर्ट में इसका जवाब नहीं मिला कि प्रशासन क्यों और किसके दबाव में था।

क्यों नहीं रिकॉर्ड हुए भड़काऊ भाषण

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जांच के लिए प्रदर्शन भी हुए - फोटो : getty images
एक अहम सवाल यह भी है कि जब 30 अगस्त को मुजफ्फरनगर में सभी दलों के प्रमुख मुस्लिम नेताओं की मौजूदगी में हुई बड़ी पंचायत में भड़काऊ भाषणों की रिकॉर्डिंग हुई तो 7 सितंबर को नंगला मंडौर में इससे बड़ी और बहुचर्चित पंचायत की रिकॉर्डिंग क्यों नहीं की गई।

इस पंचायत में भाजपा सांसदों, विधायकों समेत कई दलों के प्रमुख नेता मौजूद थे। यदि रिकॉर्डिंग हुई तो आयोग को क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई। आयोग ने इस संबंध में तत्कालीन डीएम से स्पष्टीकरण मांगने के लिए कहा है।

क्या पूर्व नियोजित थे हमले
आयोग ने कहा है कि 7 सितंबर 2013 को नंगला मंडौर की पंचायत में आते हुए लोगों पर बांसी कलां में हमला किया गया। एक-दो जगह और हमले की सूचनाएं थीं। क्या उकसावे के लिए हमले पूर्व नियोजित थे?

क्या पंचायत में आए कुछ लोगों ने भी सुनियोजित तरीके से हिंसक घटनाओं की शुरुआत की? क्या जौली में पंचायत से लौटते लोगों पर हमला सुनियोजित था? इन सवालों के जवाब भी नहीं मिल सके हैं।
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