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पार्क-स्मारक बदहाल, पूरा बजट भी नहीं होता इस्तेमाल
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राजधानी की खूबसूरती बढ़ाने वाले अंबेडकर पार्क, ईको पार्क जैसे स्मारक और पार्क खुद बदहाली झेल रहे हैं। ये हालत तब हैं जब अंबेडकर पार्क स्मारक समिति के पास 144 करोड़ रुपये का सरप्लस बजट है। इसके अलावा प्रदेश सरकार से मिलने वाले औसतन 20 करोड़ रुपये सालाना में से भी 70 फीसदी तक बजट उपयोग नहीं होने से वापस चला जाता है। लालफीताशाही और समिति के प्रबंधकों की लापरवाही इसका कारण है।
स्मारक समिति के वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ और नोएडा के स्मारक व पार्कों के रखरखाव के लिए 161 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया था। इसके ब्याज को खर्च कर नियमित रखरखाव के काम कराए जाने थे। इसके लिए एक प्रबंधक अनुरक्षण की तैनाती भी समिति में की गई। इसके बाद भी रखरखाव का नियमित काम नहीं होता। लापरवाही का आलम यह है कि जेल रोड स्थित कांशीराम स्मारक के मुख्य गुंबद में पिछले तीन साल से लकेज है। इसे लेकर कई बार अधिकारियों ने पत्राचार भी किए, राजकीय निर्माण निगम को भी पत्र भेजकर निरीक्षण करा लिया गया। इसके बाद भी काम नहीं हुआ। यही हाल रमाबाई अंबेडकर मैदान में डोरमेट्री की छतों के लीकेज का भी है। इन भवन का उपयोग निर्वाचन आयोग भी अपनी ईवीएम रखने के लिए करता है। आयोग ने भी इस पर आपत्ति की हुई है।
अंबेडकर और ईको पार्क में भी पत्थरों की टूटफूट ऐसे ही छोड़ दी जाती है। वहीं जनसुविधा परिसरों में टोटियां तक गायब हैं। यह हाल कमोबेश सभी जनसुविधा परिसर का है जोकि स्मारक व पार्कों के बाह्य क्षेत्र और आंतरिक परिसर में बनाए गए हैं। अंबेडकर पार्क की वाटर बॉडी को ठीक करने का काम चार साल से लंबित है। यहां आने वाले पर्यटकों के बीच यह वाटर बॉडी भीम गंगा के रूप में प्रसिद्ध रही है।
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दो साल से नहीं चल पाया म्यूजिकल फाउंटेन
अंबेडकर पार्क के बाह्य क्षेत्र में लगा म्यूजिकल फाउंटेन देखेने लोग टिकट लेकर पहुंचते थे। करीब दो साल से यह बंद पड़ा है। इसको रखरखाव की जरूरत है। अधिकारियों का दावा है कि इसे जल्दी ही शुरू करा दिया जाएगा।
यहां मेंटेनेंस की जरूरत :
- सभी पार्क, स्मारकों में पत्थर की टूटफूट के सुधार के काम।
- अंबेडकर पार्क में वाटर बॉडी, मूर्तियों के सुधार कार्य।
- ईको पार्क, कांशीराम स्मारक में लैंडस्केपिंग के सुधार कार्य।
- कांशीराम स्मारक में मुख्य गुंबद में लीकेज का काम।
- रमाबाई अंबेडकर पार्क में छतों में लीकेज, टूटफूट के काम।
- सुरक्षा वाहिनी के जर्जर आवासों की मरम्मत के काम।
सीएम ने मांगी रिपोर्ट
स्मारकों की बदहाली को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सीएम को पत्र लिखा है। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एलडीए अधिकारियों से जवाब मांगा है। मंगलवार को अधिकारी दिनभर जवाब तैयार करने में जुटे रहे। सूत्रों के मुताबिक पिछले महीनों में कराए गए छिटपुट कामों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने की तैयारी है।
जहां भी रखरखाव की जरूरत होती है उसे तुरंत कराया जाता है। म्यूजिकल फाउंटेन को शुरू कराने के लिए कार्यवाही शुरू कराई है। पत्थरों के काम भी शुरू कराए जा रहे हैं। जनसुविधा के कामों को भी नियमित रूप से कराया जाता है। कांशीराम स्मारक के गुंबद के लीकेज को लेकर भी राजकीय निर्माण निगम से बजट की मांग की गई है।
- हिमांशु सिंह, प्रबंधक अनुरक्षण, स्मारक समिति
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स्मारक समिति के वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक लखनऊ और नोएडा के स्मारक व पार्कों के रखरखाव के लिए 161 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड बनाया गया था। इसके ब्याज को खर्च कर नियमित रखरखाव के काम कराए जाने थे। इसके लिए एक प्रबंधक अनुरक्षण की तैनाती भी समिति में की गई। इसके बाद भी रखरखाव का नियमित काम नहीं होता। लापरवाही का आलम यह है कि जेल रोड स्थित कांशीराम स्मारक के मुख्य गुंबद में पिछले तीन साल से लकेज है। इसे लेकर कई बार अधिकारियों ने पत्राचार भी किए, राजकीय निर्माण निगम को भी पत्र भेजकर निरीक्षण करा लिया गया। इसके बाद भी काम नहीं हुआ। यही हाल रमाबाई अंबेडकर मैदान में डोरमेट्री की छतों के लीकेज का भी है। इन भवन का उपयोग निर्वाचन आयोग भी अपनी ईवीएम रखने के लिए करता है। आयोग ने भी इस पर आपत्ति की हुई है।
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अंबेडकर और ईको पार्क में भी पत्थरों की टूटफूट ऐसे ही छोड़ दी जाती है। वहीं जनसुविधा परिसरों में टोटियां तक गायब हैं। यह हाल कमोबेश सभी जनसुविधा परिसर का है जोकि स्मारक व पार्कों के बाह्य क्षेत्र और आंतरिक परिसर में बनाए गए हैं। अंबेडकर पार्क की वाटर बॉडी को ठीक करने का काम चार साल से लंबित है। यहां आने वाले पर्यटकों के बीच यह वाटर बॉडी भीम गंगा के रूप में प्रसिद्ध रही है।
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दो साल से नहीं चल पाया म्यूजिकल फाउंटेन
अंबेडकर पार्क के बाह्य क्षेत्र में लगा म्यूजिकल फाउंटेन देखेने लोग टिकट लेकर पहुंचते थे। करीब दो साल से यह बंद पड़ा है। इसको रखरखाव की जरूरत है। अधिकारियों का दावा है कि इसे जल्दी ही शुरू करा दिया जाएगा।
यहां मेंटेनेंस की जरूरत :
- सभी पार्क, स्मारकों में पत्थर की टूटफूट के सुधार के काम।
- अंबेडकर पार्क में वाटर बॉडी, मूर्तियों के सुधार कार्य।
- ईको पार्क, कांशीराम स्मारक में लैंडस्केपिंग के सुधार कार्य।
- कांशीराम स्मारक में मुख्य गुंबद में लीकेज का काम।
- रमाबाई अंबेडकर पार्क में छतों में लीकेज, टूटफूट के काम।
- सुरक्षा वाहिनी के जर्जर आवासों की मरम्मत के काम।
सीएम ने मांगी रिपोर्ट
स्मारकों की बदहाली को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सीएम को पत्र लिखा है। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एलडीए अधिकारियों से जवाब मांगा है। मंगलवार को अधिकारी दिनभर जवाब तैयार करने में जुटे रहे। सूत्रों के मुताबिक पिछले महीनों में कराए गए छिटपुट कामों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने की तैयारी है।
जहां भी रखरखाव की जरूरत होती है उसे तुरंत कराया जाता है। म्यूजिकल फाउंटेन को शुरू कराने के लिए कार्यवाही शुरू कराई है। पत्थरों के काम भी शुरू कराए जा रहे हैं। जनसुविधा के कामों को भी नियमित रूप से कराया जाता है। कांशीराम स्मारक के गुंबद के लीकेज को लेकर भी राजकीय निर्माण निगम से बजट की मांग की गई है।
- हिमांशु सिंह, प्रबंधक अनुरक्षण, स्मारक समिति