उमा भारती ही बनीं कल्याण की उत्तराधिकारी
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नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में उमा भारती के शामिल होने से साबित हो गया कि कल्याण सिंह की असली उत्तराधिकारी वहीं हैं।
पश्चिमी यूपी में लोध राजपूतों का दबदबा होने के कारण अबकी मंत्रिमंडल में उमा भारती या राजू भैया में से किसी एक को वजीर बनना तय था। इसमें उमा का पलड़ा भारी रहा।
दरअसल, उमा भारती सार्वजनिक मंचों से लगातार दावा करतीं रही हैं कि कल्याण सिंह की असली उत्तराधिकारी वहीं हैं। यानि लोध राजपूतों में कल्याण सिंह के बाद उनका नंबर आता था।
नहीं मिला कल्याण को पद
नरेंद्र मोदी की सरकार में शुरू से ही कयास लगाए जा रहे थे कि कल्याण सिंह को राज्यपाल बनाया जाएगा और राजू भैया को मंत्री पद देकर लोध समुदाय को संतुष्ट किया जाएगा।
कल्याण सिंह ने खुद लोकसभा का चुनाव लड़ने से इनकार कर राजू भैया को खुद की सीट एटा से चुनाव लड़ाया।
इससे पहले विधानसभा के चुनाव में भी कल्याण ने राजू भैया का कल्याण कर अपनी सीट डिबाई से चुनाव लड़ाया था।
कल्याण सिंह की हर संभव कोशिश रही है कि किसी तरह राजू भैया राजनीति में उनके उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित हो जाएं।
अब भी है संभावना
सुबह तक कल्याण सिंह खेमे में राजू भैया के मंत्री बनने को लेकर खुशी का माहौल था, लेकिन दोपहर बाद जैसे ही मंत्रियों की सूची सार्वजनिक हुई राजू का नाम गायब था। इसको लेकर राजू भैया खेमे में अब मायूसी है।
हालांकि अब भाजपा का एक वर्ग कह रहा है कि मोदी जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तर करेंगे उसमें राजू को जगह मिलना तय है।
खुद राजू भैया का कहना है कि पार्टी के लिए काम करना है चाहे वह किसी भी रूप में हो। पार्टी जिस काम पर लगाएगी उसे पूरा करना उनका लक्ष्य होगा।