खुले में शौच मुक्ति से गंदे देश का कलंक मिटा, अब ओडीएफ प्लस से गंदगी हटाएंगे: उमा भारती
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केंद्रीय पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने कहा कि दुनिया भर में स्वच्छता को लेकर भारत की छवि बदलने के लिए खुले में शौच के कलंक को मिटाना जरूरी था। उन्होंने यूपी के अफसरों से कहा, प्रस्ताव बनाकर भेजिए केंद्र सरकार अक्टूबर तक पूरे प्रदेश को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) करने का लक्ष्य पूरा करने के लिए एकमुश्त धनराशि देगी।
उमा भारती बृहस्पतविार को कांशीराम स्मृति उपवन में पंचायती राज विभाग की ओर से आयोजित स्वच्छ शक्ति-2018 सम्मेलन में महिला ग्राम प्रधानों को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले से अपने संबोधन में देश को खुले में शौच से मुक्त कराने का आह्वान किया था। जिसके बाद से हमने गंगा किनारे के 6 हजार गांव खुले में शौच से मुक्त कर दिए हैं। अब इन्हें ओडीएफ प्लस अभियान से जोड़कर अन्य गंदगी हटाई जाएगी।
संन्यास, मोदी-योगी की शपथ सर्वाधिक खुशी के लम्हे
उमा भारती ने कहा कि उनके जीवन के तीन लम्हें सर्वाधिक खुशी के हैं। पहला जब उन्होंने अमरकंटक में नर्मदा नदी के किनारे अपने गुरू से संन्यास की दीक्षा ली। दूसरा, जब नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और तीसरा, जब योगी आदित्यनाथ ने यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाएं सेनेटरी नैपकिन
उमा भारती ने महिलाओं से आर्थिक तौर पर स्वावलंबी बनने का आह्वान किया। कहा कि ओडीएफ प्लस अभियान में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रत्येक महिला के लिए महीने में चार-पांच दिन आते हैं जब उन्हें सेनेटरी नैपकिन मिलना जरूरी है। इस विषय पर मैं आस्था की स्वतंत्रता का सम्मान करूंगी, उस पर कुछ नहीं बोलूंगी लेकिन हर महिला को सेनेटरी नैपकिन प्राप्त करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, हमने केंद्रीय कौशल विकास मंत्री से बात की है। सेनेटरी नैपकिन बनाने में बड़ी कंपनियों के कब्जे के बजाय गांव में सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर इनका निर्माण कराया जाए। इससे स्वरोजगार पैदा होगा और महिलाओं, बच्चियों को सस्ती व साफ नैपकिन मिलेगी।
महिला प्रधानों से अपील, न दहेज दीजिए, न लीजिए
उमा भारती ने कहा कि बेटी को बचाना है तो महिला सरपंचों, ग्राम प्रधानों को संकल्प लेना होगा कि बेटी की शादी में दहेज नहीं देंगे और न ही बेटे की शादी में दहेज लेंगे। दहेज देकर खरीदा हुआ लड़का नौकर तो हो सकता है पति नहीं। बाजार में खच्चर बेंचे जाते हैं बेटे नहीं। कहा कि शादी में दहेज के कारण ही बेटियों को बोझ माना जाता है।