उदयवीर ने बेबाकी से रखी बात, जो युद्ध लड़ रहा है उसे मिलें सारे अधिकार
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सपा में चिट्ठियों को लेकर छिड़े घमासान पर अब सपा परिषद सदस्य उदयवीर सिंह ने जवाब दिया है। उनका कहना है, मैंने नेता जी को गोपनीय चिट्ठी लिखी थी, मुझे नहीं पता ये कैसे लीक हो गई। मैंने पत्र नेताजी को लिखा था, आशू मलिक इस पर किस हैसियत से जवाब दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सपा लोकतांत्रिक पार्टी है जिसमें सबको अपनी बात रखने का हक है। अखिलेश साढ़े चार साल में अपनी काबिलियत साबित कर चुके हैं अब उन्हें पार्टी के हित में फैसले लेने का अधिकार मिलना चाहिए।
अगर हममे से कोई ये कहता है कि सब ठीक चल रहा है, कोई समस्या नहीं तो सवाल ये उठता है कि इतने दिनों चीजें हो क्यों नहीं पा रही हैं। कहीं न कहीं समस्या तो है ही। मैंने उन समस्याओं को नेताजी को पत्र के माध्यम से बताया क्योंकि नेताजी बड़े हैं और उनके सामने हर कोई बोल नहीं पाता है।
जब आशू मलिक के लेटर के बारे में उनसे पूछा गया तो कहा कि मेरी आशू मलिक से कोई लेटरबाजी नहीं हो रही है। मैंने सिर्फ राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुझाव लिखा है और मेरे जैसे सैकड़ों कार्यकर्ता उन्हें पत्र लिखते रहते हैं। जिसको चिट्ठी लिखी ही नहीं गई है उसे जवाब देने की क्या जरूरत है।
मुलायम को सुझाव दिया चुनौती नहीं
उन्होंने कहा कि हम मुलायम सिंह को अपना गॉड फादर और पिता मानते हैं, मैंने उन्हे सिर्फ सुझाव दिया था चुनौती जैसी कोई बात नहीं थी।
उदयवीर ने कहा, मैं पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता हूं और अपनी बात रख दी। पत्र में पार्टी की आंतरिक व्यवस्था को जानकर बातें लिखी हैं।
अखिलेश चुनाव का नेतृत्व कर रहे हैं तो उन्हें राजनैतिक फैसले लेने का अधिकार मिलना चाहिए। मैंने इसीलिए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का विकल्प रखा था। इस पार्टी में सभी लोग अखिलेश के हैं और सभी लोग नेताजी के हैं।
मतभेद हमेशा रहते हैं क्योंकि ये जिंदा लोगों की पार्टी है इसे मनभेद की तरह नहीं लेना चाहिए। ये पत्थर और बुत वाली पार्टी नहीं है जो लोगों में कुछ सोचने-समझने की क्षमता है।
अखिलेश को मिले उनका हक
उदयवीर का कहना है, मेरा मानना है कि जिसको युद्ध का सेनापति बना दिया है उसे सारे निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए, जिसमें टिकट वितरण का अधिकार भी शामिल है। अखिलेश को उनका हक मिलना ही चाहिए।
रजत जयंती के पहले रथयात्रा पर निकलने के जवाब में उन्होंने कहा कि ये मुख्यमंत्री और मुलायम सिंह का फैसला है। आपस में बात करके ही ऐसा हुआ होगा।
कुछ लोगों ने कम्यूनिकेशन गैप पैदा कर दिया है। ये बसपा नहीं है जहां पैरों में लेटकर राजनीति की जाती है। ये लोकतांत्रिक पार्टी है इसी लिहाज से मैंने अपनी बात रखी है।