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Lucknow News: एक आधार पर दो सिम, दूसरा पहुंचता था साइबर ठगों के पास
Fri, 31 Jul 2026 02:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 31 Jul 2026 02:32 AM IST
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लखनऊ। मोबाइल दुकानों पर ग्राहकों के नाम पर जारी एक सिम कार्ड का उपयोग जालसाज डिजिटल अरेस्ट में करते थे। यह बात पुलिस को आरोपियों ने पूछताछ में बताई है। एयरपोर्ट के पूर्व निदेशक भोलानाथ प्रसाद भगत को भी इसी तरह डिजिटल अरेस्ट किया गया था।
70 लाख रुपये की ठगी के मामले में एक नामचीन दूरसंचार कंपनी का वितरक सुमित गिरफ्तार हुआ है। उसके साथी प्रवीण कुमार को भी पकड़ा गया है। उन्होंने पुलिस को ठगी का तरीका बताया है। ग्राहक जब सिम खरीदने दुकान जाता है तो दुकानदार केवाईसी के दौरान अंगुलियों के निशान सही न लगने का बहाना बताता है। यह कहकर वह कई बार अंगुलियों को स्कैन कराता है। इससे वह एक ही आधार कार्ड पर दो सिम जारी कर लेता है। एक सिम ग्राहक को दिया जाता है। दूसरा सिम दुकानदार अपने पास रखकर सक्रिय कर लेता है।
इसी तरह बड़ी संख्या में सिम जमा होने पर दुकानदार इन सिम को ई-सिम में बदल देता है। इन ई-सिम को कंबोडिया और चाइना में बैठे साइबर जालसाजों को बेच दिया जाता है। सुमित ने बताया कि प्रवीण ने इन्हीं जारी हुए सिम का उपयोग किया था। इसी से उसने एयरपोर्ट के पूर्व निदेशक को डिजिटल अरेस्ट किया।
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ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
कोई खुद को पुलिस, सीबीआई, एटीएस, ईडी व आयकर विभाग का अधिकारी बताकर आपको डिजिटल अरेस्ट करने की बात कहे तो बातों में न आएं। पुलिस आपको कभी ऐसे अरेस्ट नहीं करती।
बिना पूरी जानकारी हासिल किए किसी को ओटीपी नहीं बताएं।
नया सिम कार्ड लेते समय सावधानी बरतें। सुनिश्चित करें कि आपका केवाईसी केवल एक बार ही किया जाए।
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70 लाख रुपये की ठगी के मामले में एक नामचीन दूरसंचार कंपनी का वितरक सुमित गिरफ्तार हुआ है। उसके साथी प्रवीण कुमार को भी पकड़ा गया है। उन्होंने पुलिस को ठगी का तरीका बताया है। ग्राहक जब सिम खरीदने दुकान जाता है तो दुकानदार केवाईसी के दौरान अंगुलियों के निशान सही न लगने का बहाना बताता है। यह कहकर वह कई बार अंगुलियों को स्कैन कराता है। इससे वह एक ही आधार कार्ड पर दो सिम जारी कर लेता है। एक सिम ग्राहक को दिया जाता है। दूसरा सिम दुकानदार अपने पास रखकर सक्रिय कर लेता है।
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इसी तरह बड़ी संख्या में सिम जमा होने पर दुकानदार इन सिम को ई-सिम में बदल देता है। इन ई-सिम को कंबोडिया और चाइना में बैठे साइबर जालसाजों को बेच दिया जाता है। सुमित ने बताया कि प्रवीण ने इन्हीं जारी हुए सिम का उपयोग किया था। इसी से उसने एयरपोर्ट के पूर्व निदेशक को डिजिटल अरेस्ट किया।
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ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
कोई खुद को पुलिस, सीबीआई, एटीएस, ईडी व आयकर विभाग का अधिकारी बताकर आपको डिजिटल अरेस्ट करने की बात कहे तो बातों में न आएं। पुलिस आपको कभी ऐसे अरेस्ट नहीं करती।
बिना पूरी जानकारी हासिल किए किसी को ओटीपी नहीं बताएं।
नया सिम कार्ड लेते समय सावधानी बरतें। सुनिश्चित करें कि आपका केवाईसी केवल एक बार ही किया जाए।