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UP News: यूपी में बनेंगे ग्रीन हाइड्रोजन के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, हाई एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा

Tue, 20 Jan 2026 09:28 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Tue, 20 Jan 2026 09:28 AM IST
सार

यूपी में ग्रीन हाइड्रोजन के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेंगे।  50 करोड़ रुपये की सरकारी सहायता से हाई एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा। ग्रीन हाइड्रोजन स्टार्टअप्स को 5 वर्षों तक 25 लाख रुपये की सालाना फंडिंग की जाएगी।

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Two Green Hydrogen Centers of Excellence will be established in UP with high-end research infrastructure
ग्रीन हाइड्रोजन। (सांकेतिक) - फोटो : संवाद

विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत शोध, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इस पहल के अंतर्गत प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे और इससे जुड़े स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। सरकार का लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को कम कर उत्तर प्रदेश को देश की ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाना है।

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योजना के अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीकों के विकास के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे। ये सेंटर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से संचालित होंगे। यहां होने वाला शोध उद्योग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप होगा, जिससे व्यावहारिक और किफायती समाधान विकसित किए जा सकें। 
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राज्य सरकार इन दोनों सेंटरों को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इस राशि से अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, परीक्षण सुविधाएं और हाई-एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
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भारत ने वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय किया है। इसी क्रम में गोरखपुर में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है, जिससे अनुमानतः 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। इसके अलावा प्रदेश में कई ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं। 


ग्रीन हाइड्रोजन नीति के तहत स्टार्टअप्स को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के इनक्यूबेटर से जुड़े स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी। इससे युवाओं को शोध-आधारित उद्यमिता के अवसर मिलेंगे और उद्योग को नई तकनीकें उपलब्ध होंगी।

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