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मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी बन करते थे ठगी, दो गिरफ्तार
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सचिवालय का पूर्व संविदाकर्मी चला रहा था गिरोह, मुख्यमंत्री के ओएसडी बन दिलाते थे नौकरी-ठेके, दो गिरफ्तार
सचिवालय का पूर्व संविदाकर्मी आलोक दुबे मुख्यमंत्री का विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) बनकर ठगी करने वालों का गिरोह चला रहा था।
सरगना समेत गिरोह के दो शातिरों को क्राइम ब्रांच व गौतमपल्ली पुलिस ने ‘ऑपरेशन 420’ के तहत गिरफ्तार कर लिया।
धरे गए आरोपियों में सुल्तानपुर के खुशामदपुर कादीपुर का आलोक दुबे और बरामदपुर का दुर्गेश प्रताप सिंह उर्फ रूसू है। दो अन्य गुर्गे संजय चतुर्वेदी व संतोष तिवारी की तलाश पुलिस कर रही है।
पुलिस ने दोनों के कब्जे से पुरानी करेंसी (500 व 1000 रुपये नोट) के 1.58 लाख रुपये भी बरामद किए। दोनों ठग सीयूजी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा जाली दस्तावेज व कई आदेश लेटर पैड बरामद हुए।
एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक, एक अक्तूबर को शिकायती पत्र मिला था कि मुख्यमंत्री का निजी सचिव विशेष कार्याधिकारी बताकर जिलाधिकारी बांदा, सहायक आयुक्त वाणिज्यकर गाजियाबाद को फोन किया गया।
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कॉलर ने अधिकारियाें पर अवैध काम करने के लिए दबाव बनाया था। गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज कर सीओ क्राइम व गाजीपुर दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम बनाई गई।
टीम ने जालसाजों को कैबिनेटगंज रेलवे क्रॉसिंग के पास से दबोच लिया। एसएसपी के मुताबिक, दोनों ने अपने नाम से कुछ सीएयूजी सिरीज का मोबाइल नंबर अलार्ट करा रखा है।
इसी फोन से दोनाें प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों, नेताओं और ठेकेदारों को चूना लगाते थे।
दोनों ठग अधिकारी को कॉल कर बोलते थे कि ‘मैं मुख्यमंत्री का ओएसडी बोल रहा हूं। एक आदमी भेज रहा हूं, जिसका काम करवा दीजिए। कोई दिक्कत हो तो बता दें, ताकि आपकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी जाए’।
इसी नंबर पर संचालित व्हॉट्सएप से मेसेज भी भेजते थे। इन व्हॉट्सएप की डीपी पर प्रदेश सरकार का राजकीय चिह्न लगा रखा था।
नौकरी, ठेका व आवास दिलाने का करते थे दावा
एसएसपी के मुताबिक , जालसाज नौकरी, ठेका, आवास दिलाने का दावा करते थे। यहां तक कि ट्रांसफर, पोस्टिंग और ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर भी वसूली करते थे। जालसाजों ने फर्जी आदेश पत्र भी बनवा रखे थे।
डायरी में दर्ज हैं कई अधिकारियों के नाम व नंबर
सीओ क्राइम दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, जालसाजों के पास से दो डायरी मिली है। एक डायरी में अधिकारियों के सीयूजी और निजी मोबाइल नंबर, पद और वर्तमान तैनाती स्थल लिखा है। वहीं, दूसरी डायरी में उनके नाम व मोबाइल नंबर दर्ज है, जिनके काम का ठेका लेते थे। नाम के आगे लिखा है कि कौन सा काम कराना है, कितनी रकम लेनी है, किस अधिकारी को कॉल करनी है।
राजधानी से चलाते थे गिरोह
प्रभारी निरीक्षक गौतम पल्ली सत्यप्रकाश सिंह के मुताबिक, जालसाजों का नेटवर्क पूरे प्रदेश में है। आलोक गोमतीनगर के विकल्प खंड और दुर्गेश विजयेंद्र खंड में रहता था। गिरोह के लोग पीड़ित को गोमतीनगर व हजरतगंज इलाके में बुलाकर लेनदेन करते थे। बातचीत के दौरान कई बार मोबाइल पर गिरोह के सदस्य को अधिकारी बता कॉल कर धमकाते थे।
यह सामान हुआ बरामद
फर्जी सचिवालय पास, छह मोबाइल, पांच सिमकार्ड, प्रदेश सरकार के तीन फर्जी परिचय पत्र, तीन विजिटिंग कार्ड, नौकरी दिलाने के लिए जमा 23 शैक्षिक प्रमाण पत्र, नौ स्थानांतरण रुकवाने व करवाने के आवेदन पत्र, सांसद, मंत्री व सचिवालय में तैनात अधिकारियों के नौ पत्र, दो सादा स्टांप पेपर, एक चेक बुक व रसीदें।
सचिवालय में सीखा अधिकारियों से बात करने का तरीका
कुछ दिनों तक सुल्तानपुर के सूचना विभाग में तैनात रहने के बाद जालसाज आलोक दुबे ने सचिवालय में तैनाती करा ली थी। इस दौरान ही उसने अधिकारियाें से बातचीत और अर्दब में लेने का तरीका सीखा था। ठग ने कुबूला कि नौकरी जाने के बावजूद परिचय पत्र होेने से सचिवालय में आने जाने पर रोक-टोक नहीं थी। हाई प्रोफाइल लाइफस्टाइल और जल्द करोड़पति बनने की चाह में वह ठग बन गया और बेरोजगारों का गिरोह तैयार कर लिया। वह उन लोगों से ज्यादा कॉल करवाता था, जिनकी आवाज भारी हो। दुर्गेश सिंह से बांदा के जिलाधिकारी को कॉल कराई थी।
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सचिवालय का पूर्व संविदाकर्मी आलोक दुबे मुख्यमंत्री का विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) बनकर ठगी करने वालों का गिरोह चला रहा था।
सरगना समेत गिरोह के दो शातिरों को क्राइम ब्रांच व गौतमपल्ली पुलिस ने ‘ऑपरेशन 420’ के तहत गिरफ्तार कर लिया।
धरे गए आरोपियों में सुल्तानपुर के खुशामदपुर कादीपुर का आलोक दुबे और बरामदपुर का दुर्गेश प्रताप सिंह उर्फ रूसू है। दो अन्य गुर्गे संजय चतुर्वेदी व संतोष तिवारी की तलाश पुलिस कर रही है।
पुलिस ने दोनों के कब्जे से पुरानी करेंसी (500 व 1000 रुपये नोट) के 1.58 लाख रुपये भी बरामद किए। दोनों ठग सीयूजी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करते थे। इसके अलावा जाली दस्तावेज व कई आदेश लेटर पैड बरामद हुए।
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एसएसपी कलानिधि नैथानी के मुताबिक, एक अक्तूबर को शिकायती पत्र मिला था कि मुख्यमंत्री का निजी सचिव विशेष कार्याधिकारी बताकर जिलाधिकारी बांदा, सहायक आयुक्त वाणिज्यकर गाजियाबाद को फोन किया गया।
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कॉलर ने अधिकारियाें पर अवैध काम करने के लिए दबाव बनाया था। गौतमपल्ली थाने में मुकदमा दर्ज कर सीओ क्राइम व गाजीपुर दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में टीम बनाई गई।
टीम ने जालसाजों को कैबिनेटगंज रेलवे क्रॉसिंग के पास से दबोच लिया। एसएसपी के मुताबिक, दोनों ने अपने नाम से कुछ सीएयूजी सिरीज का मोबाइल नंबर अलार्ट करा रखा है।
इसी फोन से दोनाें प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों, नेताओं और ठेकेदारों को चूना लगाते थे।
दोनों ठग अधिकारी को कॉल कर बोलते थे कि ‘मैं मुख्यमंत्री का ओएसडी बोल रहा हूं। एक आदमी भेज रहा हूं, जिसका काम करवा दीजिए। कोई दिक्कत हो तो बता दें, ताकि आपकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचा दी जाए’।
इसी नंबर पर संचालित व्हॉट्सएप से मेसेज भी भेजते थे। इन व्हॉट्सएप की डीपी पर प्रदेश सरकार का राजकीय चिह्न लगा रखा था।
नौकरी, ठेका व आवास दिलाने का करते थे दावा
एसएसपी के मुताबिक , जालसाज नौकरी, ठेका, आवास दिलाने का दावा करते थे। यहां तक कि ट्रांसफर, पोस्टिंग और ट्रांसफर रुकवाने के नाम पर भी वसूली करते थे। जालसाजों ने फर्जी आदेश पत्र भी बनवा रखे थे।
डायरी में दर्ज हैं कई अधिकारियों के नाम व नंबर
सीओ क्राइम दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, जालसाजों के पास से दो डायरी मिली है। एक डायरी में अधिकारियों के सीयूजी और निजी मोबाइल नंबर, पद और वर्तमान तैनाती स्थल लिखा है। वहीं, दूसरी डायरी में उनके नाम व मोबाइल नंबर दर्ज है, जिनके काम का ठेका लेते थे। नाम के आगे लिखा है कि कौन सा काम कराना है, कितनी रकम लेनी है, किस अधिकारी को कॉल करनी है।
राजधानी से चलाते थे गिरोह
प्रभारी निरीक्षक गौतम पल्ली सत्यप्रकाश सिंह के मुताबिक, जालसाजों का नेटवर्क पूरे प्रदेश में है। आलोक गोमतीनगर के विकल्प खंड और दुर्गेश विजयेंद्र खंड में रहता था। गिरोह के लोग पीड़ित को गोमतीनगर व हजरतगंज इलाके में बुलाकर लेनदेन करते थे। बातचीत के दौरान कई बार मोबाइल पर गिरोह के सदस्य को अधिकारी बता कॉल कर धमकाते थे।
यह सामान हुआ बरामद
फर्जी सचिवालय पास, छह मोबाइल, पांच सिमकार्ड, प्रदेश सरकार के तीन फर्जी परिचय पत्र, तीन विजिटिंग कार्ड, नौकरी दिलाने के लिए जमा 23 शैक्षिक प्रमाण पत्र, नौ स्थानांतरण रुकवाने व करवाने के आवेदन पत्र, सांसद, मंत्री व सचिवालय में तैनात अधिकारियों के नौ पत्र, दो सादा स्टांप पेपर, एक चेक बुक व रसीदें।
सचिवालय में सीखा अधिकारियों से बात करने का तरीका
कुछ दिनों तक सुल्तानपुर के सूचना विभाग में तैनात रहने के बाद जालसाज आलोक दुबे ने सचिवालय में तैनाती करा ली थी। इस दौरान ही उसने अधिकारियाें से बातचीत और अर्दब में लेने का तरीका सीखा था। ठग ने कुबूला कि नौकरी जाने के बावजूद परिचय पत्र होेने से सचिवालय में आने जाने पर रोक-टोक नहीं थी। हाई प्रोफाइल लाइफस्टाइल और जल्द करोड़पति बनने की चाह में वह ठग बन गया और बेरोजगारों का गिरोह तैयार कर लिया। वह उन लोगों से ज्यादा कॉल करवाता था, जिनकी आवाज भारी हो। दुर्गेश सिंह से बांदा के जिलाधिकारी को कॉल कराई थी।